Sunday, September 23, 2018

तमिलनाडु का सांस्कृतिक शहर तंजौर

तंजौर पैलेस कांप्लेक्स में कुछ घंटे गुजारने के बाद अब हमारी आगे चलने की तैयारी है। किले के अंदर हस्तशिल्प की दुकानें भी हैं। यहां से आप यादगारी के लिए कुछ खरीददारी कर सकते हैं। पर इससे पहले नारियल पानी पी लेते हैं।

अगर आप तंजौर और आसपास के सभी प्रमुख मंदिरों को अच्छी तरह देखना चाहते हैं और चोल राजाओं की कलाप्रियता को करीब से महसूस करना चाहते हैं तो तंजौर में आपको तीन दिन रुकना पड़ेगा।फिर यहां से 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित प्रमुख स्थलों के दर्शन की योजना बनानी होगी। हमने आधे दिन में ही तंजौर के प्रमुख स्थलों का दर्शन किया है। पर तंजौर दुबारा आने की इच्छा बनी रहेगी। तंजौर जिले में तकरीबन 25 प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। अगर आप शाम को तंजौर में हैं तो किले में लाइट एंड साउंड शो देख सकते हैं। हर रोज यहां दो शो होते हैं।

कावेरी नदी के उपजाऊ डेल्टा क्षेत्र में स्थित होने के कारण इसे दक्षिण में चावल का कटोरा के नाम से भी जाना जाता हैं। साल 850 ई. में चोल वंश ने मुथरयार प्रमुखों को पराजित करके तंजौर पर अधिकार कर लिया। इसके बाद चोल राजाओं इसे अपने राज्य की राजधानी बनाया। चोल वंश ने 400 साल से भी अधिक समय तक तमिलनाडु पर राज किया। इस दौरान तंजौर के वैभव में काफी  विकास हुआ।

चोल राजाओं के बाद नायक और मराठों ने भी यहां शासन किया। वे लोग कला और संस्कृति के कद्रदानों में थे। कला के प्रति उनका लगाव को उनके द्वारा बनवाई गई यहां इमारतों से साफ नजर आता है।


तंजौर का जो वर्तमान महल का इसका निर्माण 1550 में नायक राजाओं ने कराया था। तंजौर पर आखिरा शासन मराठा राजाओं का रहा। 1855 में यह ब्रिटिश राज्य के अधीन आ गया। ब्रिटिश शासन आने के बाद तंजौर में चर्च का भी निर्माण हुआ। शहर में प्रसिद्ध शिवगंगा किला और शिवगंगा कुंड है। इस कुंड से पूरे शहर को पीने का पानी मिलता था।

मशहूर है तंजौर पेटिंग – तमिलनाडु का तंजौर पेंटिंग्स अपनी विशेष शैली के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। यहां आने वाले सैलानी इन्हें खरीदना पसंद करते हैं। सही कीमत और अच्छी क्वालिटी के लिए आपको गांधी रोड पर बने कुछ एंटीक शॉप की ओर जाना होगा। यहां से पेंटिंग्स खरीद सकते हैं, साथ ही  तंजौर प्लेट्स, पंचलौह प्रतिमाएं, पूजा सामग्री आदि भी यहां से खरीद कर ले जा सकते हैं।  

तंजौर तमिलनाडु का एक जिला है। इस शहर की आबादी ढाई लाख से ज्यादा है। पर शहर काफी साफ सुथरा दिखाई देता है। शहर का नया बस स्टैंड विशाल है। यह शहर के बाहर है। पर पुराना बस स्टैंड शहर के बीच में है। पर शहर में कहीं भीड़भाड़ और चिलपों नहीं नजर आता।

कई घंटे तंजौर की यात्रा के बाद अब मुझे थोड़ी भूख लग रही है। तो आटो वाले ड्राईवर महोदय मुझे नए बस स्टैंड के सामने दो शाकाहारी रेस्टोरेंट में से किसी एक में खाने की सलाह देते हैं।

राज आर्य प्योर वेज होटल में प्रवेश कर गया हूं। खाने में आर्डर कर दिया है मसाला डोसा। थोड़ा हल्का फुल्का खाने के बाद एक बार फिर बस स्टैंड में आकर त्रिची जाने वाली बस में बैठ गया हूं। दोपहर मे बस के सफर में हल्की नींद आ रही है। एक घंटे में बस ने त्रिची पहुंचा दिया।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyut@daanapaani.net
( TANJAUR PAINTING ,  CITY, FOOD, CHOLA KINGDOM )