Thursday, September 20, 2018

वशिष्ठेश्वर मंदिर, थिट्टाई, शिवलिंगम पर हमेशा टपकता है जल

तंजौर में हमारी अगली मंजिल है वशिष्ठेश्वर मंदिर। यह तंजौर से 12किलोमीटर दूर थिट्टाई ग्राम में स्थित है। हमलोग तंजौर शहर को पार करके कुंभकोणम मार्ग पर जाने के बाद ग्रामीण सड़क पर चल रहे हैं। तमिलनाडु के ग्राम्य जीवन को देखते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।


थिट्टाई ग्राम कावेरी नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। बारहवीं सदी के इस मंदिर को चोल राजाओं ने बनवाया था। इस मंदिर में शिव का विशाल लिंगम है जिसे स्वंतभूतेश्वर के नाम से पुकारा जाता है। तो मंदिर में स्थापित देवी का नाम उलगनायिकी है।

इस मंदिर की खासियत है कि यहां शिवलिंगम पर हर 24 मिनट पर मंदिर की छत से जल की बूंदे टपकती हैं। कहा जाता है कि इसलिए संभव है कि मंदिर की छत पर विशेष चंद्रकांत पत्थर स्थापित किया गया है। कहा जाता है कि यह पत्थर वातावरण में मौजूद जलकणों को शोषित कर लेता है जिसे शिवलिंगम पर लगातार जलाभिषेक होता रहता है। शिवलिंगम पर रखी एक छोटी सी पीली धोती इन जल बूंदों के कारण हमेशा गिली रहती है। अगर मंदिर के गर्भ गृह में थोड़ी देर रूकें तो जल की बूंदो को गिरते हुए देख सकते हैं।
थिट्टाई ग्राम के बारे में तमिल में और आख्यान है। कहा जाता है कि जब पूरी दुनिया का प्रलय हो गया तो देवताओं ने शिव की अराधना कर सुरक्षित स्थल के बारे में पूछा। तब शिव का निर्देश आया कि थिट्टाई वह स्थल है जिसका कभी लोप नहीं होता।

शिव का यह मंदिर दक्षिणामुखी है। यह भी अपने आप में विरल है। मंदिर परिसर में गुरु भगवान की भी प्रतिमा है। इनकी पूजा यहां राजगुरु के तौर पर होती है। इन्हें चोल राजाओं का राज गुरु माना जाता है। यहां राजगुरु की प्रतिमा के चार हाथ हैं। एक हाथ में शस्त्र धारण किए हैं तो एक हाथ में पुस्तक। चैत्र पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा मंदिर के खास त्योहार हैं। इस मौके पर यहां श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ती है।

मंदिर परिसर के बाहर एक सरोवर है जिसका नाम चक्रतीर्थम है। इसके बारे में कहा जाता है कि यह सरोवर विष्णु के चक्र से निर्मित हुआ है। चोल राजाओं के अन्य मंदिरों की तरह ही इस मंदिर का निर्माण पूरी तरह पत्थरों से हुआ है। मंदिर की दीवारें, छत, स्तंभ सभी के निर्माण में पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है।

खुलने का समय – शिव का यह अदभुत मंदिर से सुबह से दोपहर 1.30 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। मंदिर तंजौर से दूर गांव में स्थित है इसलिए आपको आरक्षित गाड़ी करके ही यहां पहुंचना होगा। 

महादेव की लीलाओं नमन करते हुए अब हम शहर की ओर वापस चल रहे हैं। रास्ते सड़क के किनारे कई और ऐतिहासिक मंदिर पड़ते हैं। इनमें गौरी अम्मान कोविल प्रमुख है। गौरी अम्मान के मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ है। इनमें कई मंदिर छोटे हैं पर वे निहायत सुरुचिपूर्ण ढंग से निर्मित और खूबसूरत हैं।

कैसे पहुंचे – तंजौर से शहर से मंदिर की दूरी 12 किलोमीटर है। यह मेलात्तुर रोड पर स्थित है। तंजौर और कुंभकोणम शहर से यहां सुगमता से पहुंचा जा सकता है। अच्छा होगा कि आप आरक्षित वाहन से यहां पहुंचे।  
---विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyut@daanapaani.net
 (TANJAUR TEMPLE, SHIVA, THITTAI  )