Tuesday, September 18, 2018

तंजौर - मारिअम्मन कोविल यानी मां काली का मंदिर

तंजौर बिग टेंपल यानी वृहदेश्वर मंदिर के दर्शन के बाद हमने अपने आटो वाले को कह रखा है कि शहर और आसपास के प्रमुख मंदिरों के दर्शन कराएं। तो हमारा अगला पड़ाव है मारिअम्मन कोविल यानी माता पार्वती का मंदिर। तंजौर शहर को पार करके छह किलोमीटर आगे नागपट्टनम मार्ग पर ये मंदिर स्थित है। रास्ते में तंजौर शहर में विशाल तालाब दिखाई देता है, जो शहर की पुरानी जल संरक्षण प्रणाली का परिचय दे रहा है।
पुन्नाईनालुर मारिअम्मान देवी के मंदिर में तंजौर और तमिलनाडु के लोगों की अगाध श्रद्धा है। तंजौर शहर से बाहरी इलाके में स्थित इस मंदिर के आसपास सदैव मेले जैसा वातावरण रहता है। इस मंदिर के निर्माण को लेकर कथा है कि तंजौर में महाराष्ट्र वंश के राजा वेनकोजी महाराजा छत्रपति को सपना आया। देवी ने सपने में कहा कि पुन्ना के जंगलों में मेरी मूर्ति है। राजा ने दिन में सपने के संकेत के मुताबिक देवी की मूर्ति की तलाश करवाई। उन्हें देवी की मूर्ति प्राप्त हुई और यहां विशाल मंदिर का निर्माण कराया।


इस मंदिर का निर्माण 1680 में हुआ। मंदिर का गलियारा काफी लंबा है। मंदिर के गोपुरम पर  देवी की अलग अलग भंगिमाओं में मूर्तियां बनाई गई हैं। इन्हें चटख रंगों से रंगा गया है। मंदिर के आसपास नारियल के पेड़ है। ग्रामीण परिवेश और शहर के कोलाहल से दूर मंदिर का परिसर इसका सौंदर्य और बढ़ाता है। 

स्थानीय लोगों में विश्वास है कि माता मारिअम्मन बहुत ही दयालू हैं और जो भी मांगों वह मनोकामना वे पूर्ण करती हैं। इसलिए काफी लोग अपनी इच्छाओं को लेकर यहां पहुंचते हैं। कहा जाता है कि अठारहवीं सदी के तुलजा राजा की पुत्री की आंखों की रोशनी चली गई थी जो माता की अनवरत अराधना से वापस आ गई। मंदिर के बाहर प्रसाद और पूजन सामग्री और तस्वीरों की तमाम दुकानें हैं। सुबह और शाम को मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है। मंदिर में तमाम तरह के संस्कारों के लिए भी लोग पहुंचते हैं।

कैसे पहुंचे – तंजौर के पुराने बस स्टैंड से मंदिर की दूरी 6 किलोमीटर है। वहीं नए बस स्टैंड से मंदिर की दूरी कोई 10 किलोमीटर के आसपास है। स्थानीय बसें मंदिर के पास से होकर गुजरती हैं। पर अच्छा होगा कि आप रिजर्ब आटो लेकर मंदिर पहुंचे।

दर्शन का समय – आम दिनों में सुबह 5.30 से रात्रि 9.30 बजे तक मंदिर खुला रहता है। रविवार को सुबह 4.30 से रात 9.45 तक मंदिर में दर्शन किए जा सकते हैं। रविवार को मंदिर में श्रद्धालुओ की भीड़ बढ़ जाती है। मंदिर में अलग अलग विशेष पूजा का भी समय तय है।  

मैं सुबह आठ बजे के आसपास माता के मंदिर में पहुंच गया हूं। यहां श्रद्धालुओं की दर्शन के लिए काफी भीड़ दिखाई दे रही है। मैं भी पंक्ति में लग जाता हूं। माता के दर्शन के बाद गर्भ गृह की परिक्रमा करता हूं। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं पहुंची हैं। मंदिर के आसपास छोटा सा बाजार है। यहां नास्ता, भोजन और जरूरत की तमाम वस्तुएं मिल जाती हैं।
--- विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyut@daanapaani.net
( TANJAUR, MARI AMMAN TEMPLE )