Sunday, September 16, 2018

तंजौर का वृहदेश्वर मंदिर - शिव का विशालतम मंदिर

सुबह के छह बजे हैं, मैं तंजौर बस स्टैंड में पहुंच गया हूं। तमिलनाडु का यही प्रमुख शहर है जहां मैं अब तक नहीं आ पाया था। तो तंजौर की धरती प्रणाम है। आपको पता है देश में सबसे विशाल, खूबसूरत और कलात्मक हिंदू मंदिर कौन से राज्य में हैं। इसका उत्तर है तमिलनाडु। क्यों भला कांचीपुरम, त्रिची, तंजौर, मदुरै, रामेश्वरम, कन्याकुमारी जैसे विशाल भव्य मंदिर किसी और प्रांत में कहां हैं।



मेरी पहली मंजिल होगी तंजौर का बिग टेंपल यानी वृहदेश्वर मंदिर। महादेव शिव का विशाल मंदिर जो यूनेस्को के विश्व विरासत की सूची में शामिल है। पर मंदिर जाने से पहले स्नान जरूरी है। बस स्टैंड में ही ब्रश करने के बाद सार्वजनिक शौचालय और स्नानागार परिसर में पहुंचा। काउंटर पर मौजूद सज्जन ने कहा, स्नानागार का 20 रुपये शुल्क है। पैसे दो फिर चाबी देता हूं। मैंने धन चुका कर चाबी प्राप्त कर ली। स्नान से निवृत हो कपड़े बदल कर बाहर आया। धूप खिली है। रात भर के बस के सफर की कोई थकान नहीं है। एक आटो वाले से मोल भाव करता हूं। तंजौर और आसपास के प्रमुख मंदिर और अन्य स्थल दिखाने के लिए। सौदा पट गया और सफर शुरू।

शिव का विशालतम मंदिर – वृहदेश्वर मंदिर यानी बिग टेंपल
तमिलनाडु के शहर तंजौर के सभी मंदिरों में वृहदेश्वर मंदिर सबसे विशाल है। इसलिए तो इसे बिग टेंपल भी कहा जाता है। इतना ही नहीं यह शिव के देश के सबसे विशाल मंदिरों में से एक है।

तंजौर बस स्टैंड से मंदिर की दूरी 6 किलोमीटर है। मंदिर पूरब रुख का है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर पादुका और गठरी (बैग) आदि के लिए स्टैंड है। मंदिर का संरक्षण भारत सरकार का पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) करता है। वृहदेश्वर मंदिर दक्षिण के चोल राजाओं की अनुपम कृति है।
वदावरु नदी के दक्षिणी तट पर स्थित तंजाउर सामरिक महत्व का शहर था। 11वीं सदी के चोल अभिलेखों में इस शहर का नाम तंजई भी मिलता है। चोल राजा राजराज प्रथम ने शहर के महत्व को और परिमार्जित किया। यह नगर मंदिरों और धार्मिक उत्सवों की नगरी बन गया।

वृहदेश्वर मंदिर का निर्माण कार्य 1003 ई में राज राज चोल के शासन काल में आरंभ हुआ और 1010 ई में पूरा हुआ। मंदिर की स्थापत्य संरचना महामेरू जैसी है। इसके गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंगम 3.66 मीटर ऊंचा है। मंदिर का नामकरण इसकी विशालता के अनुरूप राजराजेश्वर मुदयार ने किया। मंदिर का प्रांगण आयताकार 240 मीटर लंबा और 120 मीटर चौड़ा है। मंदिर का शिखर 60.96 मीटर ऊंचा है। इसके निर्माण के लिए पत्थर 50 किलोमीटर दूर से लाए गए थे। कल्पना करें की 11वीं सदी में सात साल तक इस मंदिर का निर्माण किस भव्यता के साथ हो रहा होगा।

मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा पांच और मंदिरों का निर्माण कराया गया है। चंडिकेश्वर, अम्मन, सुब्रमण्यम, गणेश और कार्तिकेश्वर के मंदिर परिसर में स्थित हैं। मंदिर का विशाल गोपुरम भी मुख्य मंदिर निर्माण के समय ही बना था। मंदिर की दीवारों पर विभिन्न देवी देवताओँ की कलात्मक मूर्तियां निर्मित की गई हैं। यहां गणेश, श्रीदेवी, भूदेवी, विष्णु अर्धनारीश्वर, चंद्रशेखर आदि देव रूपों की मूर्तियां देखी जा सकती हैं। मुख्य मंदिर के सामने नंदी की विशाल प्रतिमा एक चबूतरे पर बनी है। मंदिर की दीवारों पर शिव की नटराज रूप में कई सुंदर नृत्यरत प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में - मंदिर परिसर में चोल, पांड्य, विजयनगर और मराठा शासकों के अभिलेख हैं। इनसे ज्ञात होता है कि चोल राजाओं ने मंदिर को प्रयाप्त रूप से दान दिया था। वृहदेश्वर मंदिर को 1987 में यूनेस्को ने विश्व विरासत की सूची में शामिल किया। इस मंदिर के साथ ही चोल राजाओं द्वारा निर्मित गंगीकोंडा चोलापुरम मंदिर और ऐरावतेश्वर मंदिर इस सूची में शामिल हैं।

सबके लिए खोले गए मंदिर - मंदिर परिसर में महात्मा गांधी का 1939 का महात्मा गांधी का आशीर्वाद स्वरूप लिखे गए पत्र की प्रति लगाई गई है। इस पत्र में जिक्र है कि चोल राजा ने अपने शासन क्षेत्र के 90 मंदिरों को सभी जातियों के प्रवेश और पूजा अर्चना के लिए खोल दिया है। इसमें वृहदेश्वर मंदिर भी शामिल है। सितंबर 2010 में मंदिर के 1000 साल पूरे होने पर शानदार जश्न मनाया गया था।

मंदिर का प्रसाद - 
मंदिर परिसर में प्रसाद की दुकान है। यहां आप मंदिर प्रशासन द्वारा निर्मित लड्डू और मीठी रोटी खरीद सकते हैं। मंदिर सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। मंदिर में दर्शन का समय 5.30 सुबह से दोपहर 12 बजे और शाम को 4 से 8 बजे तक का है।

कैसे पहुंचे – चेन्नई से तंजौर 350 किलोमीटर और तिरुचिरापल्ली से 50 किलोमीटर है। यहां रेल और बस से पहुंचा जा सकता है। तंजौर जिला मुख्यालय शहर है, यहां रहने के लिए बेहतर होटल उपलब्ध हैं।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
(TANJAUR, BIG TEMPLE, SHIVA, UNESCO )