Thursday, September 13, 2018

चन्नकेशव पेरुमाल के शहर चेन्नई में

चेन्नई रेलवे स्टेशन से बाहर आते ही मैं बायीं तरफ वालटेक्स रोड पर चल पड़ता हूं। मुझे चन्नकेशव पेरुमाल मंदिर जाना है। मैं वालटेक्स रोड पर जाकर जल्दी ही अंदर मुड़ गया। इवनिंग बाजार रोड, रासपा चेट्टी स्ट्रीट, पार्क टाउन से होकर गुजरा। ये चेन्नई का होलसेल बाजार का इलाका है। दिल्ली के चांदनी चौक की गलियों की तरह ही इन गलियों बरतन और दूसरी चीजों की होलसेल दुकानें हैं। इन बाजारों से होता हुआ लोगों से रास्ता पूछता हुआ आगे बढ़ रहा हूं। अब मैं देवराज मुदाली स्ट्रीट पर हूं। यहां एक विग और अलग अलग तरह के बालों की दुकान दिखाई देती है। जरूर ड्रामा कंपनी वाले यहां से बाल खरीद कर ले जाते होंगे।


इस मंदिर के नाम पर पड़ा चेन्नई का नाम : चन्नकेशव पेरुमाल मंदिर चेन्नई के प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। इसे पत्तनाम कोविल के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि चेन्नई शहर का नाम इसी मंदिर के नाम पर पड़ा। पहले चेन्नई को मद्रास कहा जाता था। पर 17 जुलाई 1996 को इस शहर का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर चेन्नई किया गया।
चेन्ना वास्तव में कन्नड़ भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है बढ़िया और सुंदर। ब्रिटिश राज से पहले यह शहर चेन्नापटनम के नाम से जाना जाता था। तमिल में चेन्नी की मतलब होता है चेहरा। तो ये मंदिर चेन्नई शहर का चेहरा है। चेन्नई के जार्ज टाउन इलाके का यह मंदिर मद्रास के न्यू सेटलमेंट एरिया में ब्रिटिश कालोनी बसने के दौरान बना था।
चेन्ना केशव पेरुमाल मतलब भगवान विष्णु। इन्हें चेन्नई शहर का संरक्षक और पालक देवता माना जाता है। चेन्नई के इतिहासकार बताते हैं चेन्ना केशव और चेन्ना मालेश्वर मंदिर पहले वर्तमान हाईकोर्ट भवन के पास हुआ करते थे। पर ब्रिटिश शासन में शहर के नवनिर्माण के दौरान इन मंदिरों को यहां शिफ्ट किया गया।


फोर्ट सेंट जार्ज के आसपास शहर में नए भवनों के निर्माण के लिए पुराने मंदिरों को ब्रिटिश सरकार ने तोड़ डाला था। मद्रास हाईकोर्ट के पास स्थित पुराने चन्ना केशव मंदिर को 1757 में ध्वंस कर दिया गया था। इसी के बाद मनाली मुत्थु कृष्ण मुदालियार ने सन 1762 में वर्तमान स्थल साहुकार पेट में दोनों मंदिरों का निर्माण कराया। ब्रिटिश सरकार ने मंदिर के लिए जमीन का एक हिस्सा उपलब्ध कराया, पर मंदिर का निर्माण लोगों के सहयोग से हुआ। चन्ना केशव मंदिर के बगल में शिव के मंदिर का भी निर्माण कराया गया।

चन्न केशव मंदिर द्रविड़ शैली में बना है। निर्माण में पत्थरों का प्रयोग ज्यादा हुआ है। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान विष्णु सुंदर प्रतिमा है। प्रतिमा सुनहले रंग की है। गर्भ गृह के चारों तरफ विशाल गलियारा है। मंदिर परिसर में पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ आस्थावान श्रद्धालु पूजा में लीन दिखाई देते हैं। मंदिर में अलग अलग तरह के पूजा के लिए दरें निर्धारित की गई हैं। पोंगल मंदिर का प्रमुख त्योहार है।

मंदिर खुलने का समय - मंदिर सुबह 5 बजे खुलता है और दोपहर 12 बजे बंद हो जाता है। फिर शाम को 4.30 बजे खुलता है और रात को 9 बजे बंद हो जाता है।
चन्नकेशव का मंदिर पुराने मद्रास के भीड़भाड़ वाले इलाके में है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो द्वारपाल की मूर्तियां हैं। मंदिर परिसर में भगवान की विशाल प्रतिमाओं के फोटो फ्रेम वाली दुकानें हैं।

कैसे पहुंचे - चन्नकेशव पेरुमाल मंदिर साहुकार पेट में है। रेलवे स्टेशन से यहां पहुंचने का आसान रास्ता है कि आप वालटेक्स रोड पर आधा किलोमीटर चलकर जाएं फिर साहुकार पेट वाले मोड से एनसीबोस रोड पर अंदर जाएं। आगे एक तिराहे पर देवराज मुदाली स्ट्रीट के कोने में चन्नकेशव मंदिर स्थित है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य Email - vidyut@daanapaani.net
( CHENNAI, CHENNA KESHVA PERUMAL TEMPLE )