Tuesday, September 11, 2018

कालबुर्गी (गुलबर्ग) – द लैंड ऑफ तूअर दाल

कर्नाटक का कालबुर्गी शहर। कालबुर्गी शहर के बाहर एक साइनबोर्ड नजर आया – वेलकम टू कालबुर्गी द लैंड ऑप तूअर दाल। यानी अरहर की दाल उत्पादित करने वाला इलाका। तो ये कालबुर्गी की एक पहचान है। इस क्षेत्र में तुअर यानी अरहर दाल का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। 

मिनी राजधानी: बेंगलुरु से 623 किलोमीटर और हैदराबाद से 220 किलोमीटर कालबुर्गी ( गुलबर्ग) उत्तर कर्नाटक का प्रमुख शहर है। कभी यह हैदराबाद राज्य का हिस्सा हुआ करता था बाद में मैसूर का हिस्सा बना। इसे कर्नाटक की मिनी राजधानी कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। बड़ा ही व्यस्त और व्यापारिक शहर है। बस स्टैंड से एक शेयरिंग आटो करके मैं शहर के बड़ी मस्जिद जिसके आसपास मुख्य बाजार है वहां छोड़ने को कहता हूं। मेरे पास सात घंटे शाम का समय खाली है। तो कालबुर्गी बाजार का मुआयना क्यों न किया जाए।


हिंदू, बौद्ध और इस्लाम का संगम-  गुलबर्ग में शरण बसेश्वर मंदिर, बौद्ध विहार, गुलबर्ग का किला, जामा मस्जिद आदि देखा जा सकता है। गुलबर्ग शहर लिंगायत मत, बौद्ध मत और इस्लाम धर्म के लोगों के लिए दर्शनीय स्थल है। गुलबर्ग शिक्षा का भी बड़ा केंद्र है। यहां गुलबर्ग यूनीवर्सिटी के अलावा सेंट्रल यूनीवर्सिटी ऑफ कर्नाटका की स्थापना हुई है। गुलबर्ग यूनीवर्सिटी से थोड़ा आगे बुद्ध विहार स्थित है। गुलबर्ग से वाडी मार्ग पर 70 किलोमीटर आगे भीमा नदी के तट पर सन्नति नामक गांव जहां मौर्य कालीन अवशेष मिले हैं।

गुलबर्ग जिले की आबादी 25 लाख से ज्यादा है। शहर की आबादी छह लाख के करीब है। पर यह देश के पिछड़े जिलों में गिना जाता है। यादगीर नया जिला बन जाने के बाद भी इस जिले में 11 तालुका हैं।

बाजार में फर्राटेदार हिंदी : मैं जब गुलबर्ग पहुंचा हूं रमजान का महीना चल रहा है। बाजार ग्राहकों की भीड़ है। हर बड़े शोरूम के बाहर सेल लगी है। एक जगह तरबूज खरीदकर खाते हुए मैं भी कई सेल का मुआयना करता हूं। एक ट्राउजर और एक टी शर्ट खरीद लेता हूं। इसके बाद गुलबर्ग के सब्जी बाजार घुस जाता हूं। अलग अलग तरह की सब्जियां और उसके भाव सुनता हूं। दुकानदार आवाज लगाकर ग्राहकों को बुलाकर सब्जियां बेच रहे हैं। बाजार सस्ता है। एक जगह जूस पीने के बाद और बाजार का मुआयना करता हूं। कई बड़े ब्रांड के शोरुम हैं। ये इलाका सुपर मार्केट कहलाता है। गुलबर्ग शहर का मुख्य शॉपिंग एरिया है।


इस इलाके में मेहबस मसजिद नामक विशाल मस्जिद है। सारे दुकानदार फर्राटे से हिंदी में बातें कर रहे हैं। इत्र की दुकानें, बेकरी की दुकानें सजी हैं।

कामत होटल में डिनर:  पर अब मुझे भूख लगी है। तो खाने के लिए चल पड़ता हूं। कामत होटल। दक्षिण भारत की प्रसिद्ध खाने पीने की चेन है कामत होटल।

गुलबर्ग के कामत होटल में ग्राउंड फ्लोर पर नास्ता मिलता है। पहली मंजिल पर खाना। एसी और नॉन एसी डायनिंग हॉल है। मैं अपना मोबाइल चार्ज में लगाकर खाने का आर्डर कर देता हूं। यहां शाकाहारी थाली 84 रुपये की है। थाली में खाना पर्याप्त और सुस्वादु है। कामत होटल की शाखाएं हैदराबाद, बैंगलुरु से लेकर गोवा के मडगांव तक है। कुछ लोग कहते हैं कि अब कामत होटल में पहलेजैसी बात नहीं रही, पर मुझे खाना और उनकी सर्विस काफी अच्छी लगी।
खाने के बाद चल पड़ा रेलवे स्टेशन की ओर। हल्की सी बारिश हो रही है। रेलवे स्टेशन यहां से 3 किलोमीटर है। एक शेयरिंग आटोरिक्शा मिल गया। गुलबर्ग रेलवे स्टेशन मुंबई चेन्नई लाइन का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। यह शोलापुर गुंतकल खंड में आता है। मेरी ट्रेन तकरीबन 4 घंटे बाद है। तो अब स्टेशन पर इंतजार। वाडी जाने वाली डीएमयू प्लेटफार्म नंबर एक पर खड़ी है। इसके कोच बहुत शानदार हैं। कई घंटे इंतजार करना है तो थोड़ी देर स्टेशन पर चहलकदमी। बारिश ने मौसम सुहाना कर दिया है।

(KAMAT HOTEL, GULBARGA, KALBURGI ) 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
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