Thursday, September 27, 2018

रॉक फोर्ट मंदिर : 417 सीढियों की चढ़ाई और कावेरी नदी

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त्रिची शहर का रॉक फोर्ट टेंपल अदभुत है। मंदिर के शहर के बीचों बीच एक विशाल चट्टान पर स्थित है इसलिए इसका नाम रॉक फोर्ट टेंपल है। मंदिर में जाने का रास्त बीच बाजार से होकर है। नीचे चप्पल स्टैंड पर अपनी पादुका उतार कर आपको 417 के आसपास सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। मंदिर की ऊंचाई 272 फीट है। चोटी पर दो मुख्य मंदिर बने हैं। एक शिव पार्वती का और दूसरा गणपति का।
मंदिर में चढ़ने के रास्ते घुमावदार हैं। इन रास्तों में बीच में कई मंदिर आते हैं। पर मंदिर की चोटी से त्रिची शहर का अदभुत नजारा दिखाई देता है। त्रिची शहर के बीचों बीच सेंट थॉमस कॉलेज से मुख्य बाजार में प्रवेश करने पर एक विशाल सरोवर आता है। उससे आगे चलने पर बायीं तरफ एक पतली गली है। इसमें अंदर जाने पर रॉक फोर्ट मंदिर का प्रवेश द्वार है। यहीं पर जूते चप्पल जमा करने का स्टैंड है। इसके बाद शुरू हो जाती है चढ़ाई। आधार तल पर भी दो मंदिर हैं। मंदिर की चढ़ाई किसी तिलिस्मी किले में प्रवेश जैसी है। 
पत्थरों को काटकर बनाई गई घुमावदार सीढ़ियां। बीच में ठहराव आता है। हर ठहराव पर भी कुछ मंदिर बने हैं। इनके दर्शन करते हुए आगे बढ़िए। पत्थरों को काटकर बनाई गई विशाल गुफा में शिव का अदभुत मंदिर है। इसे तमिल में थाईयूमुनवार मंदिर कहते हैं। 

इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी में पल्लव राजा महेंद्रवर्मन ने कराया था। इसके साथ ही माता पार्वती भी विराज रही हैं। मंदिर की दीवारों पर देवी देवताओं के सुंदर चित्र भी उकेरे गए हैं। मंदिर परिसर में शिव के भक्त 63 नयनारों की भी प्रतिमाएं हैं। दक्षिण के कुछ मंदिरों में आपको इन नयनारों की प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं। पल्लव राजाओं के बाद मदुरै के नायक शासकों ने इस मंदिर परिसर में कुछ नवनिर्माण कराए।  

शिव पार्वती के मंदिर के दर्शन के बाद फिर ऊपर की ओर चढ़ाई है। इस चढाई के बाद आप खुले आसमान में आ जाते हैं। यहां पर गणेश जी का मंदिर है। यानी गणेश जी का मंदिर पर्वत की शीर्ष चोटी पर है। इसे तमिल में उच्ची पिलियार मंदिर कहते हैं। यह सातवीं सदी का बना हुआ मंदिर है। श्रद्धालु मंदिर में मत्था टेकते हैं। इसके बाद यहां से पूरे तिरूचिरापल्ली शहर का विहंगम नजारा करते हैं। मंदिर में हर शाम को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है।

रॉक फोर्ट मंदिर की चोटी से पूरे त्रिची शहर का नजारा दिखाई देता है। पर यहां से शहर के बीचों बीच बह रही कावेरी नदी का विस्तार दिखाई देता है। पर आश्चर्य तब होता है जब यह देखते हैं कि कावेरी नदी में एक बूंद भी पानी नहीं है। यानी कावेरी नदी यहां पर बिल्कुल सूखी हुई हैं। कावेरी का तो सारा पानी कर्नाटक में ही रूका हुआ है। मंदिर परिसर में इसके शीर्ष पर मुझे बुरके वाली मुस्लिम युवतियां भी नजर आती हैं जो इस शीर्ष से शहर के सौंदर्य का नजारा लेने आई हैं।
त्रिची के रॉक फोर्ट टेंपल से शहर का नजारा, बीच में सूखी हुई कावेरी नदी और सामने श्रीरंग मंदिर का गोपुरम दिखाई दे रहा है।

खुलने का समय मंदिर सुबह 5.30 बजे से रात्रि 10 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में चैत्र मास में बड़ा उत्सव मनाया जाता है जो 15 दिनों तक चलता है। इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
( ROCK FORT TEMPLE, TRICHY ) 
    विद्युत प्रकाश मौर्य

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