Wednesday, September 26, 2018

साल्ट सिटी था फारुख नगर – कभी यहां 40 कुओं से निकलता था नमक

गढ़ी हरसुरु से स्टीम लोकोमोटिव के सफर पर हम चल पड़े हैं फारुख नगर की ओर। ये सफर 12 किलोमीटर का है। रास्ते में एक स्टेशन आता है सुल्तानपुर कालियावास । गाड़ी यहां रुकती है। स्टीम चलित ट्रेन को देखने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा है। थोड़ी देर रुकने के बाद सिटी बजाती हुई ट्रेन आगे के सफर पर चल पड़ी। रेलवे लाइन केएमपी (कुंडली मानेसर पलवल एक्सप्रेस वे ) को पार करती हुई आगे बढ़ गई। दोनों तरफ हरे भरे खेत हैं। कुछ मिनट के सफर के बाद हमलोग पहुंच गए हैं फारुख नगर। इस स्टीम के सफर के साथ रेवाड़ी स्टीम शेड के प्रभारी आरएच मीणा और उनकी पूरी टीम भी आई हुई है। रेलवे की ओर से नए बहाल हुए दो असिस्टेंट लोको पायलटों के भी भेजा गया है स्टीम की कार्य प्रणाली को समझने के लिए।

बड़े पैमाने पर नमक का निर्यात  - फारुख नगर स्टेशन पहुंचना मतलब अतीत की यादों में खो जाने जैसा है। सन 1732 में इस नगर को नवाब फौजदार खान ने बसाया था। 
फारुखनगर अब गुरुग्राम जिले की नगरपालिका है। यहां आप नवाब फौजदार द्वारा निर्मित शीश महल, दिल्ली गेट, जामा मसजिद, बावडी , शैतान की छतरी आदि देख सकते हैं। शीश महल में इन दिनों नगर पंचायत का दफ्तर है।
इलाके का पानी अत्यंत खारा था। इसलिए यहां के पानी से नमक निकाला जाता था। खारे पानी को खाली प्लाटों में सुखाकर नमक तैयार किया जाता था। फारुखनगर के आसपास कुल 40 कुएं थे जिनसे नमक निकलता था। इस नमक को रेलगाड़ी से ट्रांसपोर्ट करके दिल्ली ले जाया जाता था। वहां से नमक अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजा जाता था। कभी फारुख नगर से हर साल 18350 टन नमक रेलगाड़ी से ले जाया जाता था।

1873 में आई रेलवे लाइन - फारुख नगर के नमक की मांग को देखते हुए ही यहां तक ब्रिटिश काल में 1873 में दिल्ली से रेलवे लाइन बिछाई गई थी। यह मीटर गेज लाइन तब नमक की ढुलाई के लिए बिछाई गई थी। पर कुछ दशक बाद यहां का नमक को राजस्थान के सांभर साल्ट वर्क्स के नमक से टक्कर मिलने लगी। फारुख नगर का नमक महंगा पड़ने लगा तो कारोबार कम होने लगा। एक समय ऐसा आया जब 1923 में यहां से नमक निकालने का काम बिल्कुल बंद हो गया। फिर इस रेलवे लाइन की अहमियत भी कम हो गई। इसके साथ ही फारुकनगर में बेरोजगारी भी बढ गई। उसके बाद यह इलाका अभिशिप्त हो गया।

2011 में ब्रॉडगेज लाइन - आजादी बाद इस लाइन पर कुछ पैसेंजर ट्रेने चलती रहीं। सन 2000 के आसपास दिल्ली से रेवाड़ी और अन्य मार्गों को मीटर गेज से ब्राड गेज में बदला गया। पर गढ़ी हरसुरु जंक्शन से फारुख नगर की 12 किलोमीटर की रेलवे लाइन को 2011 में ब्राडगेज में बदला गया। अब यहां तक हर रोज कुछ पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होता है। पर फारुखनगर रेलवे स्टेशन बाबा आदम के जमाने का दिखाई देता है।
अब स्टेशन बिल्डिंग को नया रूप दिया गया है। पास में एक मिनी स्टेडियम का निर्माण रेलवे ने कराया है। रेलवे यहां पर स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए भी कुछ कार्य कर रही है। पर रेलवे स्टेशन पर टिकट की व्यवस्था अभी भी गत्ते वाली ही चल रही है। 

फारुक नगर वैसे गुरुग्राम से पटौदी रोड पर है। सड़क मार्ग से यहां पहुंचना आसान है। गुरुग्राम यहां से 25 किलोमीटर तो पटौदी सात किलोमीटर है। हरियाणा के दूसरे जिले झज्जर की दूरी यहां से 23 किलोमीटर है। अब इस रेलवे लाइन को आगे झज्जर तक विस्तार देने की मांग उठ रही है।


फारुख नगर के इलाके में ज्यादातर क्षेत्रों में पानी आज भी खारा है। पर यहां कई औद्योगिक इकाइयां आ रही हैं। मारुति अपना दूसरा प्लांट लगा रही है। पानासोनिक भी पहुंच गई है। कुछ और कंपनियां आने वाली है। तो फारुख नगर के दिन फिर से बहुरने लगे हैं। गांव के लोगों को 1.17 करोड़ प्रति एकड़ के दर से मुआवजा मिला है।
फारुख नगर रेलवे स्टेशन के पास मुझे कई सौ नई मारूति कारों के विभिन्न माडल दिखाई दे रहे हैं। दरअसल यहां से मारुति कारों की रेलवे में लोडिंग होती है। इसके लिए मोबाइल एक रैंप भी बना हुआ है।
   
वापसी का सफर - चलिए वापसी का समय हो गया है। आजाद लोकोमिटव को ट्रेन से काटकर पीछे से लाकर आगे लगाया जा चुका है। स्टीम स्पेशल की वापसी का समय 11.15 बजे का है। ट्रेन ने सिटी बजा दी है। हम वापसी का टिकट खरीदकर ट्रेन में सवार हो गए हैं। हल्की बारिश हो रही है। फारुख नगर में जिन इलाकों में मीठा पानी है वहां फूलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। गेंदे के फूल झूम रहे हैं और ट्रेन आगे बढ़ती जा रही है। वापसी में भी ट्रेन सुल्तानपुर कलिवास में रुकी। 

ट्रेन में मेरे साथ सफर कर रहे हंसराज यादव मेरे दोस्त बन गए हैं। वे भले ही प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते हैं पर रेलवे के बारे में उनका ज्ञान अदभुत है। वे देश भर में रेलवे में हो रही घटनाओं से अपडेट रहते हैं। वे कह रहे हैं कि मैं तो हर हफ्ते इस स्टीम के सफर पर आउंगा। स्टीम एक्सप्रेस 12 बजे से पहले गढ़ी हरसुरु में आकर रुक गई। तो अब आजाद को अलविदा कहने का समय है।
(HARYANA , RAIL , STEAM LOCOMOTIVE, AZAD, FARUKHNAGR, SALT CITY ) 
-    विद्युत प्रकाश मौर्य


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