Saturday, August 4, 2018

सवाई माधोपुर से दिल्ली वापसी वाया जयपुर

राजस्थान की इस यात्रा से वापसी का समय है। पर वापसी की राह थोड़ी मुश्किल हो गई है। मैं रणथंभौर के किले से वापस रेलवे स्टेशन लौट आया हूं। सोचा ट्रेन से दिल्ली वापस चला जाए। तो दोपहर में गोल्डेन टेंपल मेल आने वाली है। मैं टिकट लेकर प्लेटफार्म पर इंतजार करने लगता हूं। इंजन के पास वाले जनरल डिब्बे के पास। कुछ और लोग भी चढने वाले हैं। इनमें से कई अमृतसर जाने वाले सिख भाई हैं। ट्रेन आधे घंटे लेट पहुंची। पर यह क्या जनरल डिब्बे में चढ़ने लायक बिल्कुल गुंजाइस नहीं है। कुछ लोग संघर्ष करके चढ़ गए पर मेरे लिए यह मुश्किल कार्य था। कुछ लोग स्लिपर और एसी कोच में चढ़ गए। टीटीई के मना करने के बावजूद भी। ट्रेन चल पड़ी और मैं प्लेटफार्म पर खड़ा रहा।
सोच रहा हूं कैसे दिल्ली जाना होगा। बस से भी जा सकता हूं। पर सवाई माधोपुर से मथुरा तक की सड़के काफी अच्छी नहीं है, ऐसा लोग बता रहे हैं। तो टिकट वापस करने के लिए टिकट खिड़की के पास पहुंच गया। यहां पर देखा आगे की लाइन मेंकुछ लोग जयपुर का टिकट ले रहे हैं। मतलब जयपुर की कोई ट्रेन आने वाली है। मैं पूछता हूं जगह मिल जाएगी क्या। लोग कहते हैं हां मिल जाएगी जी। तो मैं दिल्ली का टिकट वापस करके जयपुर का टिकट ले लेता हूं। यह ट्रेन दुर्ग जयपुर एक्सप्रेस(18213) है। यह सिर्फ हफ्ते में एक दिन यानी सोमवार को ही यहां पर है। तो दुर्ग जयपुर एक्सप्रेस का सफर शानदार रहा। रास्ते में बनस्थली निवाई नामक रेलवे स्टेशन आया। जयपुर शहर में दुर्गापुरा और बाइस गोदाम आए। ट्रेन ने समय पर जयपुर पहुंचा दिया।

जयपुर में मेट्रो रेल का सफर-  अब जयपुर शहर में भी मेट्रो चलने लगी है। तो इस बार सिर्फ मेट्रो में सफर के लिए ही हमने रेलवे स्टेशन से बस स्टैंड ( सिंधी कैंप) के बीच मेट्रो की यात्रा की। इस मेट्रो में भी उदघोषणा शम्मी नारंग की आवाज में हो रही है। जयपुर मेट्रो स्टैंडर्ड गेज की है। इसके कोच बीईएमएल द्वारा निर्मित हैं। फिलहाल इसका नेटवर्क ज्यादा लंबा नहीं है। जयपुर में मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार का काम जारी है।
जयपुर रेलवे स्टेशन को रंग रोगन करने का काम चल रहा है। परिसर का सौंदर्यीकरण हो रहा है। इस बीच मुझे एक गांधी जी की प्रतिमा दिखाई देती है जहां बापू के जयपुर आने के प्रकरण का जिक्र है। ये एक बेहतर कोशिश है इससे आते जाते लोगों को इतिहास की थोड़ी जानकारी मिल जाती है। साथ ही हम अपनी समृद्ध विरासत को भी याद रख पाते हैं। 
गुलाबी शहर जयपुर... वैसे तो न जाने कितनी बार आ चुका हूं। अब गिनती क्या करना। राजस्थान के कई क्षेत्रों से गुजरते हुए आपको जयपुर से होकर गुजरना ही पड़ता है। यहां से दिल्ली के लिए 24 घंटे बसें मिलती रहती हैं। कभी इंतजार नहीं करना पड़ता। तो एक दिल्ली जाने वाली बस हमारा इंतजार कर रही है। रास्ते में हमारी बस नीमराना में आनंदमहल होटल में खाने के लिए रूकी। खाना बेहद घटिया और महंगा भी। राजस्थान रोडवेज या हरियाणा रोडवेज की सरकारी बसों को इतने घटिया रेस्टोरेंट में खाने पीने के लिए नहीं रुकना चाहिए।

( SAWAI MADHOPUR, JAIPUR METRO, STEAM LOCO, BICYCLE ON RENT ) 

    ---- विद्युत प्रकाश मौर्य 
दानापानी के लेखों पर अपनी प्रतिक्रिया दें - 
Email- vidyut@daanapaani.net