Thursday, September 6, 2018

बीदर से बसव कल्याण वाया कारंजा जलाशय

बीदर का किला देखकर सेंट्रल बस स्टैंड लौट आया हूं। रास्ते में आटो में एक स्थानीय सज्जन मिले उन्होंने मुझे बीदर से 10 किलोमीटर दूर नरसिम्हा मंदिर जाने की सलाह दी। वहां पास में एक झरना भी है। उन्होंने बताया कि बस स्टैंड से बस मिल जाएगी। पर मैंने कहा अगली बार सही। बीदर बस स्टैंड का प्रतीक्षालय साफ सुथरा है। कर्नाटक के दूसरे बस स्टैंड की तरह ही। पर प्रतीक्षालय में बीदर क्षेत्र से जुड़ी कुछ महान विभूतियों की तस्वीरें भी लगी हैं।इसमें एक तस्वीर मुझे लेखक, फिल्मकार, अभिनेता गिरिश कर्नाड की नजर आ रही है। हर क्षेत्र के लोगों को अपने क्षेत्र की महान विभूतियों को याद रखना ही चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती रहे।


मुझे लिंगायत परंपरा के महान गुरु बसवन्ना की कर्म स्थली बसव कल्याण जाना है। बसव कल्याण की सीधी बस देर से मिलेगी, ऐसी जानकारी मुझे बस स्टैंड में मिली। दूसरा विकल्प है कि बीदर से हुमनाबाद की बस ले लूं। वहां से बसव कल्याण की दूसरी बस आसानी से मिल जाएगी। तो देर क्यों करना हुमनाबाद की बस ले ली। बीदर शहर से बाहर निकलने के बाद बस हरे भरे रास्तों से आगे बढ़ रही है। रास्ते में बाईं तरफ एक विशाल जलाशय नजर आता है। यह कारंजा रिजरवयार है। ( KARANJA RESERVIOR ) यह कारंजा नदी पर ही बना है। कुल 74 किलोमीटर लंबी कारंजा नदी तेलंगाना और कर्नाटक के बीच बहती है। आगे यह मंजीरा नदी में मिल जाती है। इस पर 3400 मीटर लंबा डैम बनाया गया है। इसका कैचमेंट एरिया 2025 वर्ग किलोमीटर है। यह एक मध्यम ऊंचाई का बांध है। इससे निकाली गई नहरों से हैदराबाद कर्नाटक क्षेत्र के सैकड़ों गांवों को लाभ मिला है। गोदावरी बेसिन क्षेत्र में बना ये बांध 1989 में बनकर तैयार हुआ। आधार तल से बांध की ऊंचाई 28 मीटर है।

बीदर से हुमनाबाद की दूरी 55 किलोमीटर है। वहां से बसव 30 किलोमीटर है। कारंजा डैम को पार करके हमारी बस हाल्लीखेड में रूकी। यहां हाट बाजार लगा हुआ है। पके हुए आम बिक रहे हैं। दोपहर में गरमी लग रही है। बस हुमनाबाद बस स्टैंड में पहुंच चुकी है। यह बीदर जिले का ही छोटा सा कस्बा है। शहर की आबादी 50 हजार के आसपास है। बस स्टैंड बहुत ही शानदार है। यहां से मैं पानी की बोतल खरीदता हूं। अगली बस बासव जाने वाली मिल गई है तुरंत ही। बस में खिड़की वाली सीट भी मिल गई है।


 बसव कल्याण कर्नाटक के बीदर जिले का ऐतिहासिक शहर है। इसका पुराना नाम कल्याणी था। कुछ ग्रंथों के मुताबिक ये 3000 साल से भी ज्यादा पुराना शहर है। दसवीं शताब्दी में पश्चिमी चालुक्य राजाओं ने इस शहर को अपनी राजधानी बनाया था। आज भी इसके अवशेष शहर में देखे जा सकते हैं।

बसव कल्याण से चार किलोमीटर पहले हाईवे को छोड़कर बस शहर की तरफ मुड़ गई है। पर दो किलोमीटर आगे बढ़ते ही दाहिनी तरफ मुझे बसवन्ना की विशाल प्रतिमा दिखाई देती है। मैं बस कंडक्टर से आग्रह करता हूं कि वे मुझे यहीं पर उतार दें। बस रूक गई और मैं महान संत बसव की धरती पर उतर चुका हूं। 
( BASAVKALYAN, KALYANI CHALUKYA, BIDAR, KARNATKA )

-   विद्युत प्रकाश मौर्य
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