Sunday, August 26, 2018

हलीम बिरयानी की खुशबू और हैदराबाद का एमजी बस स्टैंड

नागार्जुन सागर से हैदराबाद जा रही बस नॉन स्टाप थी। इसमें कंडक्टर नहीं होता। रास्ते में ड्राईवर ही टिकट काट देता है। हालांकि हमें राहुल बुलेट से हैदराबाद तक लिफ्ट देने की बात कर रहे थे, पर मैंने ये सोचकर की बस में आराम से सो जाउंगा बस से चलना उचित समझा।
पर बस में मुझे सीट देर से मिली। हैदराबाद शहर की सीमा में प्रवेश करते ही बस जाम में फंस गई। हैदराबाद में आप कहीं से किसी भी तरफ प्रवेश करें जाम से सामना होता ही है। खैर बस धीरे धीरे सरकती हुई इमलीबन यानी महात्मा गांधी बस स्टैंड की ओर पहुंच रही है। रास्ते में बाजार सजे हैं। ईद करीब है तो बाजार में त्योहारी डिस्काउंट के बोर्ड लगे हैं।

बस मुझे इमली बन बस स्टैंड जो मूसी नदी के किनारे है, उतार देती है। मैं बस स्टैंड के अंदर घुस कर मुआयना करता हूं। कई साल पहले से तुलना करूं तो बस स्टैंड का कायाकल्प हुआ है। यहां सौ से ज्यादा प्लेटफार्म है। स्वच्छ भारत अभियान का असर दिखाई दे रहा है। जगह जगह पे एंड यूज शौचालय बने  हैं। बस स्टैंड सारी रात गुलजार रहता है। एमजी बस स्टैंड से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों के लिए हमेशा बसें मिलती हैं। यह देश की तीसरा सबसे बड़ा व्यस्त बस स्टैंड है। कई मार्गों के लिए यहां अग्रिम आरक्षण की भी सुविधा उपलब्ध है। बस स्टैंड के अंदर बाजार भी है, जहां आपको जरूरत की चीजें मिल जाएंगी।

मुझे पता चला की बीदर की बस प्लेटफार्म नंबर 48 से मिलेगी। वैसे मुझे बस तो सुबह पकडनी है। बीदर के लिए बस रात 11.30 बजे तक है। फिर सुबह 4 बजे से बसें शुरू हो जाती हैं। पर मैं रात को आराम करना चाहता हूं। पर आराम से पहले पेटपूजा। बस स्टैंड के अंदर नंदिनी कैंटीन में लेमन राइस खा लिया। 45 रुपये में अच्छा खाना है। वैसे बस स्टैंड के अंदर खाने पीने के कई रेस्टोरेंट हैं। पाराडाइज बिरयानी का भी टेक अवे काउंटर है। बस स्टैंड के अंदर प्रति घंटे के हिसाब से चुकाकर आराम करने के लिए हॉल बने हैं जहां आराम कुरसियां लगी हैं। पर यहां 20 रुपये घंटा देने की तुलना में मैं किसी सस्ते होटल में रात गुजराना चाहता हूं।

एमजी बस स्टैंड का नाम इमली बन भी है। कभी यहां खूब इमली के पेड़ हुआ करते थे। अब कम हैं। बस स्टैंड के एक तरफ हैदराबाद का चादरघाट मुहल्ला है। यहां धोबी मूसी नदी के किनारे कपड़े धोया करते थे इसलिए ये चादर घाट कहलाया। दूसरी तरफ गोवालीगोडा मुहल्ला है। यहां पर मैं रात को पहुंचा हूं होटल बालाजी में। यहां मुझे 300 रुपये में डबल बेड रुम मिल गया। कमरा अच्छा है। उन्होने खाने के लिए भी पूछा पर मैं तो पेट पूजा कर चुका हूं। पर सोने से पहले खूब नहा कर दिन भर की थकान मिटाई।

सुबह 4.30 बजे जगकर तैयार होकर एमजी बस स्टैंड के प्लेटफार्म नंबर 48 पर पहुंच गया हूं। इतनी सुबह सुबह एक कप ईरानी चाय पीने में कोई बुराई नहीं है। बीदर की दो बसें जाने को तैयार हैं। एक बस की खिड़की वाली सीट ले ली है। बस हैदराबाद की सड़कों को पार करती हुई मुंबई मार्ग पर चल पड़ी है। सुबह भी बाजार में रमजान की खूशबु आ रही है। हलीम बिरयानी और शीप के मांस पर डिस्काउंट के बोर्ड लगे हैं। बस चादरघाट, अफजल गंज, नामपल्ली, लकड़ी का पुल, सोमाजीगुडा, पंचगुट्टा, आमीरपेट, एसआर नगर से होकर गुजर रही है। ये वो इलाके हैं जहां मैं हैदराबाद प्रवास के दौरान खूब घूमता था।

आगे भारत नगर, मूसापेट आया। मूसापेट तक अब मेट्रो रेल चल रही है। इसके बाद कुकुटपल्ली, मिसापुर, बीएचईएल, रामचंद्रपुरम, पटनचेरू आया। पटनचेरु बस टर्मिनल में जाकर बस थोड़ी देर रूकी। इसके बाद सदाशिवपेट फिर जहीराबाद। ये इलाके संगारेड्डी जिले में आते हैं। जहीराबाद में हमारी बस मुंबई हाईवे को छोड़कर कर्नाटक जाने वाले मार्ग पर मुड़ गई।
(HYDRABAD, MG BUS STAND, IMLIBAN, CHADARGHAT ) 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य