Monday, August 20, 2018

नालगोंडा में ज्वार की रोटी और टमाटर की चटनी


तेलंगाना के नालगोंडा शहर की सैर के बाद शाम को लौटकर नालगोंडा के बाजार में मसाला डोसा खाया 20 रुपये का। यह मसाला डोसा नहीं बल्कि छोटा ओनियन डोसा है। इसका स्वाद अच्छा है। अब रात के खाने के लिए निकला हूं। स्थानीय स्वाद की तलाश में।
चलते चलते मैंने देखा शहर के अस्पताल रोड पर फुटपाथ पर महिलाएं लकड़ी के चुल्हे पर ज्वार की रोटियां बना रही हैं। आटा गूंथने के बाद हाथ से ही रोटी को थपका कर पराठे से भी बड़ा कर देती हैं। बिल्कुल पतला। फिर उन्हे तवे पर बड़े ही करीने से पका रही हैं। इसको पकाने के लिए पानी का इस्तेमाल करती हैं। कोई घी तेल नहीं। बिना परथन के पानी पर रोटी सेंक लेना यह भी एक कला है।


रोटी के साथ मिर्च और टमाटर की लाल चटनी। एक रोटी 10 रुपये की। एक खाई तो अच्छी लगी। और लेने की इच्चा हुई। एक एक कर मैं तीन ज्वार की रोटियां खा लेता हूं। अब देख रहा हूं कि कई लोग यहां से ज्वार की रोटियां पैक कराकर भी ले जा रहे हैं। लोगों ने बताया कि गरमी ज्वार की रोटी खाना सेहत के लिए अच्छा है। रोटी पकाने वाली महिला की श्रम को मन ही मन नमन करते हुए वापस होटल की ओर लौट आया।


 ज्वार की रोटी के फायदे (GRAIN SORGHUMSEED )

 ज्वार को मोटा अनाज माना जाता है। कई जगह इसकी खेती जानवरों के चारे के लिए की जाती है। ज्वार को संस्कृत में यवनालयवाकार या जूर्ण कहते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि ज्वार का आटा प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। यह हृदय और मधुमेह रोगियों समेत कई रोगों में फायदेमंद है। ज्वार के फायदे बवासीर और घावों को भरने में भी कारगर हैं। गर्मियों में इसका सेवन शीतलता प्रदान करता है। ज्वार ठंडा होता है जिसके कारण इसे खाने से हमे प्यास अधिक लगती है। ज्वार की रोटी को छाछ में भिगोकर भी खा सकते हैं।

आमतौर पर ज्वार की रोटी हाथो से ही बनाई जाती हैभारत के ग्रामीण लोग आज भी इसे मुख्य भोजन के रूप में खाते है। यह गेंहू की रोटी का सबसे अच्छा विकल्प बन सकता हैं।  ज्वार में पोटैशियमकैल्शियम और आयरन होता हैं। चावल और गेहूं की तुलना में ज्वार में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। मधुमेह वाले व्यक्ति के लिएगेहूं के आटे की चपाती की तुलना में ज्वारी आटा की रोटी बनाने की सलाह दी जाती है।


(NALGONDA, TELANGANA, JWAR KI ROTI )

   -        विद्युत प्रकाश मौर्य

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