Sunday, August 19, 2018

नालगोंडा में सूफी संत लतीफ शाह की दरगाह - सौहार्द की मिसाल


दोपहर की गर्मी में बस के दो घंटे  के सफर के बाद मैं भुवनगिरी से नालगोंडा पहुंच गया हूं। बस स्टैंड में उतरने के बाद बाहर निकलते ही किसी ठिकाने की तलाश में हूं। सामने नजर आता है नालगोंडा लॉज। रिसेप्शन पर एक महिला हैं। बताती हैं कमरा 300 रुपये का है। मैं यहीं ठिकाना बना लेता हूं। इस होटल में दिन में भोजनालय भी संचालित होता है। पर मैं खाने के समय के बाद पहुंचा हूं। थोड़ी देर कमरे में आराम करने के बाद शाम गहराने के साथ नलगोंडा की सड़कों पर घूमने निकल पड़ता हूं।
नालगोंडा शहर बहुत बड़ा नहीं है। आबादी डेढ़ लाख के आसपास है। चौराहों पर कुछ महापुरुषों की प्रतिमाएं लगी हैं। इनमें महात्मा ज्योतिबा फूले भी हैं। गरमी बहुत है तो बाजार में जगह जगह शरबत की दुकाने हैं। यहां शरबत की दुकानें कुछ अलग किस्म की हैं। एक फ्रिजर में कई अलग अलग स्टील के पॉट हैं जिनमें अलग अलग तरह के शीतल पेय बनाकर रखे गए हैं। आप जो स्वाद मां करेंगे दुकानदार निकाल कर दे देता है। पांच, दस रुपये से लेकर 15 रुपये ग्लास तक।
नालगोंडा का पुराना नाम नीलगिरी था। यहां पाषाण युग और पूर्व पाषाण युग के अवशेष मिले हैं , इसलिए यह क्षेत्र पुरातात्व शास्त्रियों के लिए रुचि का विषय रहा है। मौर्य काल, सातवाहन काल और बहमनी सम्राज्य में नालगोंडा प्रमुख व्यापारिक केंद्र था।

लतीफ साहेब की दरगाह 570 सीढ़ियों की चढाई  - नालगोंडा शहर में सूफी संत लतीफ साहेब की दरगाह प्रमुख दर्शनीय स्थल है। शहर के मध्य में पहाड़ी पर स्थित दरगाह पर पहुंचने के लिए 570 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। पर रास्ता बड़ा ही साफ सुथरा और मनोरम है। रास्ते में नीम के पेड़ लगे हैं, जिनसे भीनी सी खुशबू आ रही है। पर इस दरगाह पर रोज श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं उमड़ती। हर शुक्रवार को लोग वहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

फरवरी- मार्च महीने में लतीफ शाह की दरगाह पर सालाना उर्स लगता है। तीन दिनों के इस उर्स के दौरान दूर-दूर से जायरीन यहां पहुंचते हैं। इस दौरान हनुमान जी के भक्त भी जलसे में हिस्सा लेते हैं। यह उर्स सांप्रदायिक सौहार्द का बेहतरीन नमूना होता है। हरे हरे पेड़ पौधों के बीच मेरी इच्छा सीढ़ियां चढ़कर दरगाह तक जाने की है। पर तकरीबन 100 सीढ़ियां चढ़ने के बाद लौट आया। लोगों ने बताया कि उपर कोई भी नहीं होगा। जो लोग आम दिनों में लतीफ शाह की दरगाह पर दुआ मांगने आते हैं, उनके लिए  नीचे आधारतल पर ही एक मसजिद बनी है। यहीं पर दुआ कबूल हो जाती है।



(NALGONDA, TELANGANA, LATIF SHAH, URS,  )
   -        विद्युत प्रकाश मौर्य
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