Friday, August 17, 2018

मुसुनुरी नायकों की वीरगाथा सुनाता भुवनगिरी का किला

बालाजी के दर्शन के बाद हम भुवनगिरी बाजार के बस स्टैंड  पहुंच गए हैं। काफी गरमी है तो थोड़ा जूस ले लेना चाहिए। अब बात भुवनगिरी की। भुवनगिरी नाम सही है, पर अंग्रेजी में इसका स्पेलिंग है उसके हिसाब से इसे भोंगीर पढ़ा जाएगा। तो इसकी अंगरेजी की स्पेलिंग ठीक किए जाने की जरूरत है।
तेलंगाना राज्य का नया जिला है यदाद्रि भुवनगिरी। नया जिला नलगोंडा से विभाजित होकर अक्टूबर 2016 में बना है। रंगारेड्डी और नलगोंडा इसके पड़ोसी जिले हैं। हैदराबाद से महज 60 किलोमीटर दूर स्थित भुवनगिरी शहर जिले कामुख्यालय है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 163 पर स्थित है। भुवनगिरी बस स्टैंड के सामने भुवनगिरी का किला दिखाई देता है। दरअसल पूरा शहर विशाल पहाड़ी की तराई में बसा हुआ है।

दसवीं सदी का किला - भुवनगिरी शहर का अपना इतिहास है, जिसकी कहानी भुवनगिरी का विशाल किला सुना रहा है। किले पर जाने के लिए बस स्टैंड से थोड़ा आगे चलने पर सीढ़िया बनी हुई है। प्रवेश के लिए 10 रुपये का टिकट भी रखा गया है। किले का रख रखाव राज्य सरकार का पुरातत्व विभाग करता है। भुवनगिरी शहर के किसी भी इलाके में आप खड़े हों वहां से किला दिखाई देता है। यह किला 10वीं सदी में बनवाया गया। इसका निर्माण चालुक्य राजा त्रिभुनमल विक्रमादित्य चतुर्थ ने 1074 ई में करवाया था। तब इसका नाम निर्माता राजा के नाम पर ही त्रिभुवनगिरी रखा गया था। बाद में इसे छोटा करके भुवनगिरी कहा गया। चौदहवीं सदी में यह किला मुसुनुरी नायकों को अधीन रहा। काकातीय सम्राज्य के अधीन मुसुनुरी नायक शूद्र समाज से आने वाले वीर योद्धा थे।
किले में कन्नड़ और तेलगु में लिखे कुछ अभिलेख मिलते हैं जो उस समय के लोगों के जीवन शैली पर प्रकाश डालते हैं। बाद में यह किला लंबे समय तक काकातीय सम्राज्य के अधीन रहा। पर एक हजार साल पुराना किला आज भी बेहतर हाल में दिखाई देता है। पंद्रहवी सदी में यह किला बहमनी सल्तनत के अधीन हो गया। निजाम के शासन में कुतुबशाही के दौरान इस किले का इस्तेमाल लंबे समय तक जेल के रूप में किया जाता रहा। पर ब्रिटिश काल में यह किला लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रहा।


रॉक क्लाइंबिंग की ट्रेनिंग - तकरीबन 500 फीट की ऊंचाई पर यह किला अंडाकार क्षेत्र में बना हुआ है। नीचे से किले तक जाने वाली सीढ़ियां अभी भी अच्छे हाल में हैं। सीढ़ियों की शुरुआत में आधार तल पर एक हनुमान जी का मंदिर है। किले में अस्तबल, तालाब, कुएं आदि का निर्माण कराया गया था। किले के ऊपर से पूरे शहर और आसपास का विहंगम दृश्य बड़ा शानदार दिखाई देता है। 
यहां लोग बताते हैं कि भुवनगिरी किले से गोलकुंडा किले तक कभी सुरंग हुआ करती थी। हालांकि इसकी कोई ऐतिहासिकता नहीं मिलती। भुवनगिरी के किले में एक रॉक क्लाइंबिंग का प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित किया जाता है। यहां दूर दूर से सैर सपाटा के शौकीन लोग रॉक क्लाइंबिंग का प्रशिक्षण लेने आते हैं। इस स्कूल की स्थापना 2013 में तेलंगाना टूरिज्म की ओर से की गई।
भुवनगिरी तेलंगाना का छोटा सा शहर है। इसकी आबादी 60 हजार के आसपास है। यहां के बस स्टैंड से हैदराबाद, नलगोंडा समेत आसपास के शहरों के लिए बसें हमेशा मिल जाती हैं। बस स्टैंड सुविधाजनक बना हुआ है। स्टैंड के अंदर छोटा सा बाजार है। मुझे आधे घंटे के इंतजार के बाद नलगोंडा की ओर जाने वाली बस मिल जाती है।  
- विद्युत प्रकाश मौर्य

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( BHUWANGIRI, BHONGIR, TELANGANA, ROCK CLIMBING )