Wednesday, August 15, 2018

दिल्ली से यदाद्रि बालाजी नरसिम्हा के चरणों में

एक बार फिर दक्षिण की ओर। अब तक कितनी बार दक्षिण जा चुका हूं इसकी गिनती मुश्किल है। पर जनवरी 1992 में पहली बार दक्षिण जाना हुआ था। इसके बाद दिसंबर 2006 में। फिर जनवरी 2007 से हैदराबाद लंबा ठिकाना बन गया। फिर हैदराबाद से दिल्ली वापसी हो गई। पर 2012 में एक बार फिर दक्षिण की लंबी यात्रा। उसके बाद तकरीबन हर साल दक्षिण के किसी न किसी हिस्से में जाना हुआ। दक्षिण भारत की कई बातें अच्छी लगती हैं। खासतौर पर खाना पीना, मंदिर और ऐतिहासिक विरासत के स्थल।
इस बार हमारी उड़ान टी-2 से है। सुबह 3 बजे टी 2 के प्रवेश द्वार पर पहुंच गया हूं। टी-3 से टी-2 जाने के लिए एक लंबा गलियारा बन गया है। हालांकि टी-3 की टी2 विशाल और आकर्षक नहीं है। चेकइन के बाद गो एयर के विमान का इंतजार। 
एयरोब्रिज के बजाय बसों में सवार होकर विमान तक पहुंचाया गया। हालांकि टी-2 में एयरोब्रिज की सुविधा है। सुबह 5.40 की उडान है।पायलट हैं कैप्टन दीप वर्धन, को पायलट आदित्य पाटिल। क्रू मेंबर हैं सुमित, अयान, सिमरन और प्रज्ञा। मुझे सीट नंबर 5 एफ मिली है। खिड़की वाली सीट। पर मैं रात भर जगा हूं सो फ्लाइट में सीट पर आते ही सो गया। 
 हैदराबाद के राजीव गांधी विमानपत्तन पर साढ़े सात बजे सुबह पहुंच गए हैं हम। वहां से सिटी में जाने के लिए बस। किराया 210 रुपये। हैदराबाद के हर इलाके के लिए बसें मिलती हैं यहां से। मैं उप्पल वाली बस में बैठा। एक घंटे बाद उप्पल में उतर गया। सड़क पार करके भुवनगिरी-यादगिरीगुट्टा जाने वाली बस तुरंत मिल गई। एक घंटे का रास्ता है उप्पल से।

तेलंगाना की के चंद्रशेखरराव की सरकार ने यदाद्रि-भुवनगिरी को नया जिला बना दिया है। पहले यह नलगोंडा जिले का हिस्सा था। भुवनगिरी जिले का मुख्यालय है। भुवनगिरी काजीपेट-सिकंदराबाद लाइन का रेलवे स्टेशन भी है। बस भुवनगिरी बस स्टैंड में पहुंची। वहां से फिर यदाद्रि के लिए चल पड़ी। कोई 11 किलोमीटर और आगे। पुराना नाम तो यादगिरीगुट्टा है, पर अब छोटा नाम दिया गया है यदाद्रि। बस ने यदाद्रि स्टैंड के अंदर उतार दिया। पर मंदिर जाना है तो स्नान करना जरूरी है। सुलभ में स्नानागार की सुविधा 30 रुपये में है।
स्नान कर कपड़े बदल कर मंदिर जाने वाली बस में बैठ गया। मंदिर यहां 4 किलोमीटर ऊंची पहाड़ी पर है। रास्ता बहुत अच्छा बन गया है। तेलंगाना रोडवेज की बस चलती है मंदिर के प्रवेश द्वार तक। किराया 10 रुपये। वैसे आटो वाले भी 10 रुपये में ले जाते हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार के बाहर श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ है। काफी संख्या में ग्रामीण लोग पहुंचे हैं।यदाद्रि के बालाजी नरसिम्हा का मंदिरतेलंगाना का सबसे बड़ा मंदिर है। एक घंटे लाइन में लगे रहने के बाद बालाजी नरसिम्हा के दर्शन लाभ प्राप्त हो गए। मंदिर के निकास द्वार पर प्रसाद मिल रहा है।

तो लेमन राइस, नमकीन चावल मंदिर का प्रमुख प्रसाद है। मंदिर के रास्ते में खिलौनों की भी दुकाने हैं। ये खिलौने देखकर अपना बचपन याद आ जाता है। जब हम रुक कर मचल उठते थे। पर मैं एक बार फिर यहां अपना पसंदीदा कच्चे आम खाता हूं। दक्षिण  कच्चे आम को बड़े सुंदर ढंग से काटकर बेचते हैं। सिर्फ 10 रुपये में। मंदिर से लौटकर बस स्टैंड के पास एक रेस्टोरेंट में वेज बिरयानी खाई।
वेज बिरयानी 35 रुपये में - स्वाद अच्छा है...
यहां वेज बिरयानी सिर्फ 35 रुपये में मिली। दही-रायता के साथ। खूब स्वाद है। अब दोपहर हो चुकी है। आगे का सफर आटो रिक्शा से हुआ भुवनगिरी तक। रास्ते में यादगीर का रेलवे स्टेशन दिखाई दिया। पर आपको यदाद्रि आना हो तो हैदराबाद से रेल या बस से भुवनगिरी आएं। भुवनगिरी भी रेलवे स्टेशन है। भुवनगिरी में भी रहने खाने पीने के अच्छे इंतजामात उपलब्ध हैं।
-    - विद्युत प्रकाश मौर्य  

कृपया इस लेख पर अपनी प्रतिक्रिया दें -  Feedback – vidyut@daanapaani.net