Sunday, August 12, 2018

पटना से दिल्ली वाया लखनऊ - कुछ अपनों से मुलाकातें

पटना से 22 तारीख को भागलपुर गरीब रथ से दिल्ली वापसी के लिए मेरा कनफर्म टिकट था। अचानक 21 की शाम को मोबाइल पर संदेश आया कि आपकी ट्रेन रद्द हो गई है। रेलवे आजकल अनिश्चित लेट होने पर कई ट्रेनों को अचानक रद्द कर दे रहा है। एक दिन पहले संपूर्ण क्रांति के रद्द होने की खबर पढ़ी थी। अब मेरा दिल्ली जाना मुश्किल में पड़ गया है। देर रात गए चेक किया तो पाटलिपुत्र लखनऊ एक्सप्रेस के चेयरकार में लखनऊ तक का टिकट 22 तारीख में उपलब्ध है। मैंने उसमें रात 2 बजे ही मोबाइल से आरक्षण करा लिया। हालांकि पाटलिपुत्र जंक्शन से बाद दोपहर 3.15 बजे खुलने वाली ट्रेन शाम को पौने छह बजे खुली।

तब तक नए बने पाटलिपुत्र जंक्शन स्टेशन के बाहर इंतजार में लिट्टी चोखा खाता रहा। पाटलिपुत्र लखनऊ एक्सप्रेस हाल में शुरू हुई अच्छी ट्रेन है, यह बिहार और उत्तर प्रदेश की राजधानी को जोड़ती है। ट्रेन नए बने दीघा-पहलेजा रेलपुल से गुजरी। पुल शुरू हुए दो साल हो गए हैं पर अभी इसकी दूसरी लाइन चालू नहीं हो सकी है। पटना की तरफ एक दीघा पुल हाल्ट बना है। तो सोनपुर की तरफ हरपुरवा पहलेजा रेलवे स्टेशन। ट्रेन दीघवारा, छपरा, सीवान होती हुई चल रही है। कई साल बाद इस रेल मार्ग पर सफर कर रहा हूं। 

गोरखपुर से पहले कुसुम्ही के जंगल के पास एक स्टेशन पर ट्रेन आधे घंटे यूं ही रुक गई। गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर वाटर एटीएम से पानी लिया। यहां ट्रेन 10 मिनट रुकी। इसके बाद मुझे नींद आ गई। सुबह ट्रेन बाराबंकी को पार कर लखनऊ शहर में प्रवेश कर रही थी। प्रधानमंत्री को स्वच्छ भारत अभियान को धता बताते हुए लोग रेलवे लाइन के किनारे निपटान कर रहे हैं। ऐसा नजारा दिल्ली में भी खूब दिखाई देता है। ट्रेन ढाई घंटे लेट साढ़े छह बजे सुबह लखनऊ जंक्शन पहुंची है। सुबह दिल्ली जाने वाली गोमती एक्सप्रेस भी रद्द चल रही है। वैसे चल भी रही होती है तो लेट होने के कारण उस ट्रेन को पकड़ना मुश्किल होता।

मैं अब दिल्ली तक का सफर बस से तय करने की योजना बनाता हूं। रेलवे स्टेशन से कैसरबाग डिपो पहुंच गया। दिल्ली की अगली बस आठ बजे है। पर वह रात को 9 बजे आनंद विहार पहुंचाएगी। मतलब उस बस से जाकर भी मैं दफ्तर नहीं जा सकूंगा। शाम को 6 बजे तक भी आनंदविहार पहुंचने पर दफ्तर जा सकता था। सो अब तय किया कि भारी गर्मी में बस में दिन का सफर तय करने से बेहतर होगा कि रात की बस से दिल्ली जाया जाए। शाम को 7.30 बजे वाली जनरथ एक्सप्रेस में अग्रिम आरक्षण करा लिया।

बस कैसरबाग डिपो से ही खुलेगी। यूपी रोडवेज के कैसरबाग डिपो का कायाकल्प हुआ है। स्टेशन की बिल्डिंग रंगरोगन किया गया है। प्रथम तल पर एक अच्छा रेस्टोरेंट भी बना है, पर वह बंद है। अग्रिम बुकिंग काउंटर पर कैशलेस पेमेंट की कोई सुविधा नहीं है। देश के सबसे बड़े राज्य यूपी के लिए शर्मनाक स्थिति है। खैर बस का टिकट बुक करा लेने के बाद हमारे पास अब दिन भर का समय है। शायद मैं सातवीं या आठवीं बार लखनऊ शहर में हूं।


 हमारे दिल्ली कई साल तक स्थानीय अभिभावक रहे रामकृपाल मौर्य जी को फोन किया। वे अब लखनऊ शिफ्ट हो गए हैं। वे अपने घर का पता और आने का रास्ता बताते हैं। मैं उनसे मिलने चल पड़ा। कई सालों बाद मिलना हुआ। सुखदुख साझा किया। कुछ घंटे साथ गुजारने के बाद अपने एक और पुराने साथी से मिलना तय किया। अशोक वाजपेयी हमारे अग्रज पत्रकार। हमारी पहली नौकरी कुबेर टाइम्स के 1996-97 के साथी। विकास नगर में रहते हैं। लंबे समय से हिन्दुस्तान लखनऊ में हैं। संयोग से आज अवकाश पर भी हैं। 1998 के बाद 20 साल बाद उनसे मिलना हुआ। इस बीच हम दोनों की उम्र में 20-20 साल का इजाफा हो गया है।
अशोक जी के बेटे पढ़ाई में अच्छा कर रहे हैं। टीआईएसएस, महाराष्ट्र में स्नातक कक्षा में अध्ययनरत हैं। अशोक भाई के घर सात्विक घर का खाना खाकर और छाछ पीकर आनंद आ गया। कुछ घंटे गप्पे लड़ाते और ज्ञान की बातें साझा करते शाम गहराने लगी, तो मैंने उनसे विदा ली। अब दिल्ली की बस पकड़नी है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य   
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