Thursday, August 2, 2018

रणथंभौर के किले के जैन मंदिर और सूफी संत की दरगाह

हमलोग रणथंभौर के किले के मुख्य द्वार से गणेश जी के मंदिर तक पदयात्रा की तैयारी में है। यह कोई ढाई किलोमीटर की चढ़ाई है। पहले सीधी चढ़ाई बाद में कुछ समतल। रास्ते में किले का भव्य रूप नजर आता है। पर किले के मुख्य द्वार पर लगेज रखने का कोई इंतजाम नहीं है। इसलिए आपके पास ज्यादा लगेज है तो होटल में ही छोड़कर आएं या फिर रेलवे स्टेशन के क्लाक रूम में जमा करके आएं। हमारे साथ दिल्ली का एक परिवार है जो अपने भारी भरकम सामान को लेकर परेशान है। खैर उनके सामान रखने का इंतजाम हुआ और हमलोग आगे बढ़े।
प्रथम पूज्य गणेश जी के मंदिर के पास एक सरोवर भी है जहां आप पूजा से पहले स्नान कर सकते हैं। गणेश मंदिर में सालों भर रौनकर रहती है। खास तौर पर राजस्थान के आसपास के ग्रामीण लोग यहां खूब पहुंचते हैं। गणेश जी का ही प्रताप है किले में पहुंचने के लिए कोई प्रवेश टिकट का प्रावधान नहीं है।

महाराजा की शिकारगाह और टाइगर सफारी - रणथंभौर का यह वन क्षेत्र कभी जयपुर के महाराजा का शिकार क्षेत्र हुआ करता था। वे यहां पर बाघों के शिकार के लिए आते थे। महाराजा मान सिंह द्वितीय ( 1912-1971) यहां नियमित शिकार खेलने आते थे। अब सैलानी यहां टाइगर सफारी के लिए आते हैं। खुली जीप में टाइगर सफारी का आनंद यहां लिया जा सकता है। इसके लिए सवाई माधोपुर से रणतंभौर के बीच कई होटलों और रिजार्ट में बुकिंग प्वाइंट बने हुए हैं। हालांकि टाइगर सफारी में बाघ दिखाई दे जाएगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। पर हमारे सामने एक विदेशी सैलानियों का समूह टाइगर सफारी के लिए निकल पड़ा है।
पर हम तो सीढ़ियां चढ़ रहे हैं रणथंभौर के किले की। रणथंभौर के किले में गणपति के मंदिर के अलावा कई और मंदिर भी हैं। खास तौर पर किले के अंदर कई जैन मंदिर हैं। इन मंदिरों में भी नियमित पूजा अर्चना होती है।  
गणपति के अलावा रास्ते में आपको अन्नपूर्णा जी का मंदिर दिखाई देता है। यह मंदिर भी बड़ा ही खूबसूरत है। इसके बगल में कालिका जी का मंदिर है। किले के परिसर में लक्ष्मीनारायण जी का भी सुंदर मंदिर है। हिंदू तीर्थ यात्री इन सभी मंदिरों मेंदर्शन और पूजन करते हैं।

पर किले में कई जैन मंदिर और मस्जिद भी है। जैन मंदिरों में दिगंबर जैन मंदिर और संभवनाथ जी का मंदिर प्रमुख है। इन मंदिरों में जैन श्रद्धालु नियमित पूजा पाठ करते हैं। दूर दूर से आने वाले जैन श्रद्धालु यहां विशेष अनुष्ठान के लिए भी पहुंचते हैं। हालांकि वे इन मंदिरों में फोटोग्राफी करने की इजाजत नहीं देते।
रणथंभौर के किले में एक मजार और एक मसजिद भी है। किला जब मुस्लिम शासकों के अधीन हुआ तो यहां इबातगाह भी बनी। यहां काजी पीर जनाब सदरुद्दीन नामक सूफी संत की दरगाह है। दरगाह के पास एक सरोवर भी है जिसमें पानी नहीं है। हालांकि यहां लगे साइन बोर्ड में इसके पास जाने पर खतरे की ताकीद दी गई है।

किले में जब आप प्रवेश करते हैं तो आप हाथी पोल, गणेश पोल और अंधेरी पोल जैसे विशाल दरवाजों से होकर गुजरते हैं। अंधेरी पोल का दरवाजा टेढ़ा और भ्रमित करने वाला है इसलिए इसे अंधेरी पोल का नाम दिया गया है। हां, किले में कई जगह रास्ते में बंदरों का जबरदस्त आतंक है इसलिए घूमते समय थोड़ा सावधान रहें।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
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(RANTHAMBHAUR FORT, SAWAI MADHOPUR, RAJSTHAN) 


1 comment:

  1. गणेश जी के दर्शन करने गए थे या मुस्लिम मजार ओर मुस्लिम राजा का भखान करने ,, हम्मीर के बारे में या जो नीचे खण्डित शिव मंदिर उस के बारे में बता ते या मजार पे चादर चढ़ा कर आ गए ???

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