Sunday, July 29, 2018

बाघों के शहर सवाई माधोपुर में 26 साल बाद

राजस्थान का शहर सवाई माधोपुर जाना जाता है बाघों के शहर के लिए। रेलवे स्टेशन पर उतरते ही आपके दर्शन बाघों के म्युरल्स से होते हैं। हो भी क्यों नहीं देश दुनिया से लोग यहां पर बाघ देखने ही तो आते हैं। सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन का परिसर काफी खुला खुला हुआ है। राजस्थान का यह शहर मथुरा-कोटा रेलवे लाइन पर है। मुंबई जाने वाले ज्यादातर ट्रेनें यहां से गुजरती हैं। मैं इस शहर में पूरे 26 साल बाद उतरा हूं। 1992 के जून में सवाई माधोपुर आना हुआ था। तब भाई दिग्विजय नाथ सिंह साथ थे। इच्छा एक बार फिर रणथंभौर वाले गणेश जी तक जाने की है। शाम हो गई है तो कल सुबह सुबह ही जाना होगा।

सवाई माधोपुर का रेलवे स्टेशन काफी खुला खुला है। मुख्य भवन से बाहर निकलते ही दूसरे भवन के बीच बांगड़ धर्मशाला है। हम अपनी 1992 की यात्रा में यहीं रुके थे। पर इस बार आगे बढ़ता हूं। स्टेशन के बाहर बजरिया मतलब मार्केट एरिया है। यहीं पर एक होटल में कमरा मिल गया। कमरे में सामान जमाने के बाद बाहर निकल गया। स्टेशन के पास एक छोटा सा शापिंग मॉल खुल गया है। यहां पर प्रसिद्ध मिठाई की दुकान कान्हा की चेन खुल गई है। वही कान्हा जिसके कोलकाता शाखा में हमने रात को मिठाइयां खाई थी। पर यहां हमने कान्हा में कुछ नहीं खाया।

स्टेशन के पास बाजार का मुआयना करने पर तीन चार दुकाने ऐसी मिली जो पूरी सब्जी को प्रतिकिलो की दर से बेच रहे हैं। हां पूरी सब्जी 100 रुपये किलो। अगर ढाई सौ ग्राम खाना है तो 25 रुपये की। काफी लोग खा रहे थे हमने भी रात के खाने में यही खाना तय किया। पूरी सब्जी का स्वाद अच्छा है।
अब पूरी सब्जी खाने के बाद सवाई माधोपुर की सड़क पर घूमने लगा। एक बारात जा रही है। बारात में बड़ी संख्या में धोती वाले बाराती हैं। पर वे डीजे की धुन पर जमकर नाच रहे हैं। पर बेगानी की शादी में मेरा क्या। होटल के पास ही एक दूध की दुकान है। इसमें बड़े से कड़ाह में दूध खौल रहा है। मैं भी 20 रुपये के दूध का टोकन लेता हूं। इसके बाद छाली वाले गर्म दूध का आनंद लेने लगा। और इस दूध के साथ एक सेल्फी भी ले ली।

 चलिए अब सोने का वक्त हो गया। अगली सुबह स्नान करके 5 बजे ही रणथंभौर के लिए चल पड़ा। रेलवे स्टेशन से दाहिनी तरफ जीप स्टैंड से रणथंभौर किले के लिए जीप चलती है। पर यहां का कायदा है भरेगी तो चलेगी। आज टूरिस्ट कम हैं। इसलिए जीप को भरने में ज्यादा वक्त लग रहा है। सवारियां जल्दी मचा रही हैं तो जीप वाला कह रहा है कि आप खाली सीटों के पैसे दो दो तो ही चलूंगा। मैं जीप  आगे वाली सीट पर बैठा हूं। एक घंटे इंतजार के बाद हमलोग चल पड़े हैं। हमारे साथ एक अलवर के युवक हैं वे रणथंभौर गणेश जी को अपनी बहन की शादी का कार्ड देने जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन से रणथंभौर किले के द्वार की दूरी 11 किलोमीटर है। रास्ते में कुछ मंहगे होटल और रिजार्ट बने हैं। किले के प्रवेश द्वार के बाद भी कोई पांच किलोमीटर अंदर चलने के बाद किले का मुख्य द्वार आता है। सर्दी की सुहानी सुबह में हमलोग रणथंभौर किले में प्रवेश कर चुके हैं। सामने कई मोर अटखेलियां कर रहे हैं।

(RAJSTHAN,  TIGER CITY, SAWAI MADHOPUR )
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
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