Thursday, July 19, 2018

कोटा उम्मीदों का शहर, सपनों का शहर

चंबल नदी के किनारे बसा कोटा शहर अब देश भर में अपनी नई पहचान रखता है। कोटा कोचिंग हब बन चुका है। कभी यह शहर कोटा स्टोन के लिए जाना जाता था। रात को आठ बजे के आसपास कोटा बस स्टैंड पर उतरा हूं। यहां से शेयरिंग आटो से रेलवे स्टेशन पहुंच गया हूं। कोटा रेलवे स्टेशन का भवन बाहर से सुंदर लग रहा है। स्टेशन के मुख्य भवन के बाहर रंग बिरंगे फव्वारे स्टेशन भवन की सुंदरता और बढ़ा रहे हैं।
कोटा मथुरा से मुंबई मार्ग का अति व्यस्त रेलवे स्टेशन है। मैं अनगित बार कोटा से होकर गुजरा हूं। पर कोटा में उतरने का कभी मौका नहीं मिला। मेरे एक पत्रकार साथी अनिल भारद्वाज कोटा के रहने वाले हैं। पर संयोग है कि जब मैं कोटा आया हूं वे शहर के बाहर हैं। इसलिए उनसे मिलना नहीं हो सका।
कोटा रेलवे स्टेशन पश्चिम मध्य रेलवे जोन में आता है। पश्चिम मध्य रेलवे जोन का मुख्यालय जबलपुर में है। कोटा देश के सौ अति व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। 1987 से ही यह मार्ग विद्युतीकृत है। स्टेशन भवन के पास ही मंडल रेल प्रबंधक का कार्यालय है। यहां पर रेल कर्मचारी यूनियन के कई पोस्टर लगे हैं। इनमें एक पोस्टर में प्रधानमंत्री जी से मांग की गई है कि रेलवे में पुरानी पेंशन योजना को फिर लागू किया जाए। इसके लिए रेल कर्मचारी प्रधानमंत्री को पत्र लिख रहे हैं। उन्हें एनपीएस में जाना रास नहीं आ रहा है।
रेलवे स्टेशन पर हरियाणा की लोकप्रिय गायिका सपना चौधरी के कार्यक्रम का पोस्टर लगा है। सपना अब हरियाणा से निकल कर राजस्थान, यूपी और बिहार में जाकर स्टेज शो कर रही हैं।
मुझे सुबह झालावाड़ की ट्रेन लेनी है तो रात को यहां रुकना है। स्टेशन के बाहर बायीं तरफ राम मंदिर रोड पर एक होटल में ठिकाना बनाया है। सिंगल कमरा 300 रुपये में। अब रात की पेट पूजा करनी है। पर इसके पहले थोड़ा सड़क पर टहलने निकल पड़ता हूं।
आगे चलकर राम मंदिर में प्रवेश कर गया। यह कोटा शहर का अति सुंदर मंदिर है। परिसर काफी बड़ा है। मुख्य मंदिर में रामजी का सुंदर दरबार सजा है। मंदिर परिक्रमा पथ में राम जानकी के अलावा दूसरे देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित है। यहां थोडा वक्त गुजारना काफी अच्छी अनुभूति देता है। मंदिर में शहर व्यापारी वर्ग के लोगों की आवाजाही लगी रहती है। मंदिर प्रबंधन की ओर से कई कार्यक्रमों का भी नियमित आयोजन किया जाता है। मंदिर की ओर से चिकित्सालय और धर्मशाला का भी संचालन किया जाता है। मंदिर सुबह 5 बजे खुल जाता है। अगले दिन सुबह ट्रेन पकड़ने से पहले एक बार फिर मैं राम मंदिर में मत्था टेकने पहुंच जाता हूं।
कोटा शहर के हर इलाके में कोचिंग संस्थान और हास्टल की भरमार है। इन कोचिंग संस्थानों ने कोटा शहर की अर्थव्यवस्था बदल दी है। देश भर से छात्र यहां जागती आंखों में सपना लेकर आते हैं और कई सालों तक जमकर इंजीनयरिंग या मेडिकल की तैयारी करते हैं। बड़ी संख्या में छात्रों का चयन भी हो जाता है। तो कुछ हिस्से में निराशा भी आती है। लेकिन कोटा तो उम्मीदों का शहर है। सपनों का शहर है।
(KOTA, RAJSTHAN, CHAMBAL,  COACHING CITY )
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
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