Monday, July 16, 2018

मानसून में चलें - मेनाल, मनमोहक महानालेश्वर मंदिर

जोगणिया माता के दर्शन के बाद मैं आगे की यात्रा के लिए बस का इंतजार कर रहा हूं। पर दो घंटे इंतजार के बाद बस नहीं आई। यहां से हाईवे पर पहुंचने के दो रास्ते हैं 20 किलोमीटर दूर काटूंदा मोड़ या फिर 7 किलोमीटर दूर मेनाल। एक स्थानीय दुकानदार ने सलाह दी अब बस आने की उम्मीद नहीं है। आप पैदल मेनाल निकल जाओ। मुझे आगे कोटा की बस लेनी है। कोई उपाय न देख मैं पैदल मेनाल के लिए चल पड़ता हूं। जोगणिया माता और मेनाल के बीच 6 किलोमीटर कोई आबादी नहीं है। निर्जन वन क्षेत्र से होकर पक्की सड़क जा रही है। एक किलोमीटर चलने के बाद मुझे मेनाल 6 किमी का मील का पत्थर दिखाई देता है।

तभी पीछे से एक हीरो होंडा बाइक पर दो युवक आते दिखाई देते हैं। मैं उन्हें इशारा करके लिफ्ट मांगता हूं। बाइक पर तीसरी सवारी के तौर पर वे मुझे लिफ्ट दे भी देते हैं। रास्ते में उनसे थोड़ी बात होती है। वे मांडलगढ़ इलाके के रहने वाले हैं। मेनाल से मुझे कोटा की बस पकड़नी है। तभी मुझे अपने बायीं तरफ एक मंदिर दिखाई देता है। मैं उनसे पूछता हूं। वे बताते हैं कि यह मेनाल का ऐतिहासिक मंदिर है। आप तो घूमने ही निकले हो तो इस मंदिर को देख ही लो। बस तो आधे घंटे बाद भी मिल जाएगी। बस मैं उनसे आग्रह करता हूं और वे हमें मेनाल के ऐतिहासिक मंदिर के प्रवेश द्वार पर छोड़ देते हैं। उनका बहुत बहुत धन्यवाद।


महादेव शिव का 12वीं सदी में बना अनूठा मंदिर 
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का मेनाल ग्राम। यहां स्थित है महादेव शिव का अनूठा मंदिर। यह मंदिर अपने नैसर्गिक वैभव और शानदार कलाकृतियों के लिए जाना जाता है। मंदिर के पास ही बेहद खूबसूरत जल प्रपात है। मेनाल भीलवाडा जिले में मांडलगढ़ से 20 किलोमीटर दूर चितौडगढ़ की सीमा पर स्थित है। मेनाल का महानालेश्वर मंदिर 12 वीं शताब्दी के चौहान कला का सुंदर नमूना है। इसका निर्माण 1164 में पृथ्वीराज चौहान द्वितीय ने करवाया था। मंदिर का तोरण द्वार जयचंद और संयोगिता ने बनवाया था। लाल पत्थरों से निर्मित महानालेश्वर मंदिरइससे थोड़ी दूर पर स्थित रूठी रानी का महल और हजारेश्वर मंदिर यहां देखने योग्य हैं। 

महानालेश्वर मन्दिर पत्थर जड़े बड़े चौक के बीच में स्थित है। मंदिर के आगे विराज रहे नन्दी की प्रतिमा खंडित है। इस मन्दिर की बाहरी दीवारों पर बेल-बूटों और फूलों के बीच देवताओं की अनेक मूर्तियां बनी हैं। इन मूर्तियों में कई कामकला से जुडी हैं। मेनाल का यह मंदिर राजस्थान का ऐलोरा प्रतीत होता है। मन्दिर के मण्डप और शिखर के बीच एक ऊंचे विमान  पर एक विशाल शेर की मूर्ति बनाई गई है। इसके एक बगल में एक हाथी बैठा है। मंदिर परिसर में शिव के अलावा गौरी और गणेश के भी मन्दिर बने हैं। परिसर में कुछ और भवन बने हैं, जिनके बारे में बताया जाता है कि कभी वे धर्म शिक्षा के विद्यालय हुआ करते थे। इस परिसर में कभी सैकड़ो छात्र रहकर शिक्षा प्राप्त किया करते थे।  


 महानालेश्वर मन्दिर के ठीक सामने का द्वार जिस स्थल पर खुलता है ठीक उसी बिन्दु पर  मेनाल नदी झरने के रूप में सौ फीट से ज्यादा नीचे गिरती है। नदी के पाट के पार एक और शिव मन्दिर और मठ बना है। यह मंदिर 1170 में महारानी सूया देवी ने बनवाया था। इसे लोग रूठी रानी का मंदिर भी कहते हैं। 

महानाल या मेनाल - मेनाल वास्तव में पुरातत्व, धर्म और पर्यटन का अनोखा संगम है।  मेनाल के मंदिर के पास एक बरसाती नदी ग्रेनाइट की चट्टानों पर वेग से बहती हुई आती है और घोड़े की नाल की आकृति वाले एक गहरे गड्ढे में जा गिरती है। यहां एक खूबसूरत झरने का निर्माण होता है। तो झरने का नाम हुआ महानाल। यही शब्द लगता है कि अपभ्रंश हो कर बाद में मेनाल बन गया।


मेनाल को 1956 से भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया। वर्तमान में यहां की देखभाल भारत सरकार पुरातत्व विभाग (एएसआई) करता है। पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां पर विभाग द्वारा एक होटल भी स्थापित किया गया है।

बारिश में निखर जाता है सौंदर्य - मेनाल में वैसे तो पुरे साल भर लोग घूमने के लिए आते रहते हैं पर यहां पर आने का सबसे अच्छा समय बरसात का है। उस समय मेनाल का झरना बहुत ज्यादा तेजी से नीचे की और गिरता है और चारों और बहुत ज्यादा हरियाली होती है। बरसात के सीजन में यहां सैलानियों का तांता लगा रहता है। रविवार को यहां सैलानियों की संख्या ज्यादा होती है।

कैसे पहुंचे - मेनाल चित्तौड़-कोटा राज मार्ग पर स्थित बूंदी से करीब 100 किमी दूरी पर स्थित है। चित्तौड़गढ़ से करीब 70 किमी की दूरी पर स्थित है। वहीं कोटा से मेनाल की दूरी 86 किलोमीटर है।
( MENAL , SHIVA TEMPLE, RAJSTHAN ) 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य 
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