Saturday, June 23, 2018

अजमेर का जैन चैत्यालय - अयोध्या का अदभुत नजारा

अजमेर का अद्भुत आकर्षण है सोनी जी का नसिया। वैसे इसका असली नाम श्री सिद्धकूट जैन चैत्यालय है। पर निर्माताओं के नाम पर स्थानीय लोग इसे सोनी जी का नसिया कहते हैं। मैं बस स्टैंड से आटो से चला था ढाई दिन का झोपड़ा देखने के लिए पर आटो वाले ने चौराहे पर उतार दिया और कहा यहां से पैदल ढाई दिन के झोपड़ा तक जा सकते हैं। वैसे देखना चाहें तो सामने सोनी जी का नसिया भी है।

अजमेर के पृथ्वीराज रोड पर स्थित यह मंदिर दिगंबर जैन समाज की श्रद्धा का प्रतीक है। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में  से प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी को समर्पित है यह मंदिर। इसका निर्माण 10 अक्तूबर 1864 को आरंभ हुआ। 26 मई 1865 को इसमें प्राण प्रतिष्ठा की गई। मंदिर की मध्य वेदी पर भगवान आदिनाथ ( ऋषभदेव जी) की प्रतिमा स्थापित है।
मंदिर के भवन के निर्माण में करौली के लाल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इसलिए लोग इसे लाल मंदिर भी कहते हैं। इसके निर्माण में सेठ मूलचंद सोनी का बड़ा योगदान रहा, तो सोनी जी नसिया भी कहलाता है।

मुख्य मंदिर में तीन वेदियां हैं। इस पर जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर के इस हिस्से में सिर्फ जैन धर्म के लोगों को प्रार्थना पूजा करने की अनुमति है। पर मंदिर का मुख्य आकर्षण है अयोध्या का अदभुत नजारा। इसे देखने के लिए मामूली सा प्रवेश टिकट है। प्रवेश द्वार पर जूते आदि उतार कर टिकट लेकर सीढ़ियों से ऊपर जाने पर आप मंदिर का भव्यता निहार सकते हैं।
वास्तव में मंदिर बनने के पांच साल बाद सेठ मूलचंद सोनी की इच्छा हुई कि मंदिर में जैन शास्त्रों में वर्णित भगवान ऋषभदेव के पंचकल्याणकों का मूर्त रूप स्थापित किया जाए। इसके बाद मंदिर में अयोध्या नगरी और सुमेरू पर्वत के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई। सुनहले रंग की इस अदभुत रचना का निर्माण जयपुर में आरंभ हुआ। इसमें तकरीन 25 साल का समय लगा। पूरी रचना सोने के वर्क से ढकी है। जब सीसे के अंदर अयोध्या नगरी का भव्य नजारा देखते हैं तो आंखे चौंधिया जाती है। आप ये नजारा दूसरी और तीसरी मंजिल से अलग अलग झरोखों से देख सकते हैं।
हर झरोखे से देखने पर कुछ अलग नजारा दिखाई देता है। पहले ये रचनाएं जयपुर में ही प्रदर्शित की गई थीं। वहां दस दिन के मेले में काफी लोग इसे देखने आए। पर 1895 में इसे अजमेर स्थानांतरित किया गया। इसके लिए मंदिर के पीछे भवन का निर्माण कराया गया। इसके बाद यह अजमेर शहर का प्रमुख आकर्षण बन गया।
जैन चैत्यालय में प्रवेश करते समय आपको विशाल टावर दिखाई देता है। यह मान स्तंभ है। 82 फीट ऊंचा यह स्तंभ रायबहादुर सेठ टीकम चंद सोनी द्वारा निर्माण कराया गया। यह इस मंदिर परिसर की सबसे नवीनतम रचना है। यह 1953 में बनकर तैयार हुआ।
अजमेर के इस स्थल का मुआयना करने देश विदेश की महान विभूतियां पधार चुकी हैं। यहां देश के पहले राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद, प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, मोरारजी देसाई, राजीव गांधी जैसे लोग पधार चुके हैं।
कैसे पहुंचे – अजमेर रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से दो किलोमीटर के दायरे में स्थित है सोनी जी का नसियां। शेयर आटो रिक्शा से यहां पहुंचा जा सकता है। प्रसिद्ध अजमेर शरीफ दरगाह से भी पैदल चलकर 10 मिनट में पहुंचा जा सकता है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
( RAJSTHAN, TEMPLE, SIDHAKUT JAIN CHAITYALYA )