Thursday, June 21, 2018

दिल्ली से अजमेर और मां अन्नपूर्णा रसोई में सस्ता भोजन


एक बार फिर राजस्थान की ओर चल पड़ा हूं। दिल्ली से देर रात बस से। पर कश्मीरी गेट पहुंचने पर पता चला कि जयपुर की बसें अब सरायकाले खां से जाती हैं। रात एक बजे एक टैक्सी वाले मिल गए, शेयरिंग में 50 रुपये में धौलाकुआं पहुंचाने को कहा। हालांकि दिल्ली में ऐसी टैक्सियां लेना कई बार सुरक्षित नहीं होता। पर मैं बैठ गया। धौलाकुआं मेट्रो स्टेशन के नीचे रात भर जयपुर जाने वाली बसें रुकती हैं। वहां रात को एक से दो बजे के बीच भी चहलपहल थी। मैं जयपुर की बस में बैठ गया। अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक बस बहरोड़ के पास एक ढाबे में रुकी। सुबह सुबह मैं जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड में था। यहां से तुरंत दूसरी बस अजमेर की मिल गई। बाईपास पर बस कुछ मिनट रूकी।

इसके बाद किशनगढ़ बस स्टैंड में पांच मिनट का ठहराव। जयपुर अजमेर हाईवे बहुत शानदार बन चुका है। बस कुलांचे भरती है। मैं सुबह 9 बजे से पहले अजमेर के बस स्टैंड में पहुंच चुका हूं। बस स्टैंड में टूथब्रश-कुल्ला आदि करके एक चाय पी लेता हूं। चाय मैं सिर्फ सर्दियों में ही पीता हूं।
अजमेर शहर में कई साल बाद आया हूं, तीसरी बार। शहर कुछ नया सा लग रहा है। कई दीवारों में सुंदर म्युरल्स लगे हैं। शहर की सड़कें भी पहले की तुलना में काफी अच्छी नजर आ रही हैं। 

तभी मेरी नजर बाहर अन्नपूर्णा भोजन केंद्र के स्टाल पर पड़ती है। यह राजस्थान की वसंधरा सरकार का नया उपक्रम है। गरीबों और आम आदमी को सस्ते में भोजन और नास्ता उपलब्ध कराने का। एक चलते फिरते वैन को भोजनालय का रुप प्रदान किया गया है। यहां मिलता है 5 रुपये में नास्ता और आठ रुपये में भोजन। यह योजना फिलहाल राज्य के 12 शहरों में चलाई जा रही है।
इसके स्टाल रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास लोकप्रिय स्थलों पर हैं। मैंने ऐसी रसोई आगे भीलवाड़ा और कोटा में भी देखी। अभी ऐसे 500 भोजन वैन संचालित हो रहे हैं। मैंने यहां से सुबह का नास्ता लिया। पहले कंप्यूटराइज्ड टोकन खरीदें फिर काउंटर से नास्ता प्राप्त करें। नास्ते था पोहा और उसके साथ चटनी। पोहा काफी अच्छा बना था। वसुंधरा राजे ने यह योजना 15 दिसंबर 2016 को आरंभ की थी। हालांकि यह योजना श्रमिक वर्ग और असहाय लोगों के लिए है। पर खाने की गुणवत्ता अच्छी है इसलिए आते जाते लोग भी खाते नजर आते हैं। वे डिस्पोजेबल पेपर प्लेट में खाना परोसते हैं। पोहा वजन करके दिया जाता है ताकि किसी को कम मात्रा में नहीं मिले। वैन पर शिकायत करने के लिए फोन नंबर भी लिखा है। अगर आप खाने से संतुष्ट नहीं हैं तो शिकायत भी कर सकते हैं।

इस तरह की रियायती भोजन योजना सबसे पहले तमिलनाडु में जयललिता सरकार ने शुरू की थी।बाद में ऐसी ही योजना तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद और कुछ अन्य शहरों में शुरू की। राजस्थान सरकार की यह योजना काफी लोकप्रिय हो रही है। अब दिल्ली सरकार भी रियायती कैंटीन शुरू करने की योजना बना रही है। हालांकि दिल्ली में पहले जन आहार योजना शुरू की गई थी। पर वहां 18 रुपये का खाना परोसा जाता था। पर राजस्थान सरकार आठ रुपये में लोगों का पेट भर रही है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  
( DELHI- AJMER, MA ANNPURNA KITCHEN )