Sunday, June 3, 2018

जयगांव से दिल्ली- तीस्ता तोरसा से दूर होते हुए...

हम फुंटशोलिंग से अब दिल्ली के लिए वापसी की राह पर हैं। जयगांव में अगले दिन सुबह 5.45 में चेक आउट करके हमलोग भूटान गेट पर पहुंच गए और सिलिगुड़ी की बस का इंतजार करने लगे। एक दिन पहले ही पता कर लिया था, पहली बस 6 बजे सुबह में है। दूसरी बस 6.30 बजे तो भूटान की बस है। छह बजे वाली बस अपने समय से आई। पर इस बीच हमें एक टैक्सी (आल्टो) वाले मिल गए। उन्होंने कहा कि 250 रुपये प्रति सवारी पर आप हमारे साथ सिलिगुड़ी चलें, मैं बस से पहले पहुंचा दूंगा। हमें ये सौदा अच्छा लगा। 

अब वे दो और सवारियों का इंतजार करने लगे। संयोग से दो और लोग जल्दी ही मिल गए। एक बंगाली दंपति जो सिलिगुड़ी जाना चाह रहे थे। तो हम चल पड़े सुबह 6.30 बजे। पहले हासीमारा आया फिर उसी पुराने रास्ते पर जिससे आना हुआ था। अब हमारी टैक्सी दुआर्स के चाय बगानों के बीच बने हाईवे पर सरपट भाग रही थी। सड़क अच्छी बन गई है। फोर लेन सड़क पर कार की गति 100 के पार है। रेलवे लाइन के समांतर चल रही सड़क पर हमें सुबह सुबह ट्रेन जाती हुई दिखाई दे जाती है। सड़क के बाद चाय के बगान और उसके बाद रेल की इकहरी पटरी। 

हासीमारा और मदारीहाट के बीच तोरसा नदी पर पुल आया। वही तोरसा नदी जो भूटान से आती है। यहां भी तोरसा का जल निर्मल दिखाई दे रहा है।
वापसी के सफर में माल बाजार के बाद टैक्सी वाले सेवक बाघ पुल की तरफ नहीं गए, बल्कि वे शार्ट कर्ट से सिलिगुड़ी की तरफ चल पड़े। हालांकि बसे बाघ पुल से होकर ही जाती हैं। रास्ते में तीस्ता नदी पर तीस्ता बैराज आया। यहां बैराज बनाकर सिंचाई के लिए नहर निकाली गई है। तीस्ता नदी मे पानी खूब है। यहां से निकली नहर से सिलिगुड़ी के आसपास के खेतों को पानी मिलता है. यहां हमलोगों ने रुककर चाय पी और बिस्कुट खाया। चाय, पांच रुपये प्रति कप। महाराष्ट्र से बंगाल बहुत सस्ता है।
सिलिगुड़ी के पास तीस्ता नदी के बैराज पर। 

तीन घंटे के सफर में हमलोग सिलिगुड़ी में कदमतल्ला इलाके में पहुंच गए हैं। यहां पर मारवाड़ी दंपत्ति उतर गए। हमें लेकर टैक्सी वाले आगे चले। थोड़ी देर बाद हम दार्जिलिंग मोड पर पहुंच गए। टैक्सी वाले ने कहा कि आप हमें 100 रुपये और दें तो एयरपोर्ट पर छोड़ दूंगा। हमें यही तो चाहिए था। अगर सिलिगुड़ी बस स्टैंड जाते तो वहां से एयरपोर्ट के लिए टैक्सी वाले 600 रुपये मांगते हैं महज 12 किलोमीटर के लिए।

हमारे टैक्सी वाले का नाम जेके मंडल है। आप कभी बागडोगरा उतरें तो जयगांव, सिक्किम या दार्जिलिंग कहीं भी जाने के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं। ( जेके मंडल, टैक्सी –बागडोगरा – 7872873677 )
बागडोगरा में लंच, बंगाली थाली, इसमें साग भी है...

हम एयरपोर्ट के पास पहुंच गए हैं पर हमारी उड़ान में अभी देर है। तो टैक्सी वाले ने हाईवे से एयरपोर्ट को मुड़ने वाली सड़क के पास एक होटल में हमें छोड़ दिया। चारों तरफ चाय बगान बीच में भोजनालय। यहां 80 रुपये की शाकाहारी थाली है। चावल, दाल, सब्जी, भुजिया, घर जैसा बना हुआ साग, छोटे छोटे कटे हुए सलाद और चटनी। ये सब कुछ खाना अनलिमिटेड। खाने के बाद हमने थोड़ी देर यहीं टाइम पास किया। 12 बजे हम बागडोगरा एयरपोर्ट में प्रवेश कर चुके थे। चेक इन के बाद थोड़ा इंतजार। इस दौरान सिलिगुड़ी से प्रकाशित प्रभात खबर पढने को मिल गया।


बागडोगरा - चाय के बगान में , उड़ान से पहले। 
इस बीच हमने एयरपोर्ट पर बने गोल्डेन टिप्स के स्टाल से दार्जिलिंग की चाय खरीदी। ग्रीन टी और लीफ टी। एयरपोर्ट के स्टाल पर भी चाय की वही दरें हैं जो दार्जिलिंग के स्टोर में रहती हैं। यह सबसे अच्छी बात है। वर्ना कई जगह एयरपोर्ट के स्टाल पर हर चीज महंगी बिकती है। तो जब भी आप बाग डोगरा से विमान लें चाय पत्ती खूब खरीद सकते हैं। एयर इंडिया का विमान 13.40 में उड़ान के लिए तैयार हो गया। 13.50 में आसमान में था।  एक घंटे बाद कप्तान सरजीत सिंह की आवाज आई – हम 34 हजार फीट की ऊंचाई पर हैं। बाहर का तापमान -47 डिग्री सेल्सियस है। मौसम साफ है। विमान को चारों तरफ से शुद्ध हवा के हल्के धक्के लग रहे हैं।  विमान के को पायलट परवेज मल्हान हैं। क्रू प्रभारी तन्मय मित्रा। तो हमलोग  साढ़े तीन बजे दिल्ली में उतरने लगे हैं। खुशियों के देश भूटान से एक बार फिर उसी दौड़ती भागती जिंदगी में वापसी।  
( यहां भूटान की यात्रा खत्म हो रही है, पर फिर चलेंगे किसी और यात्रा पर, जिंदगी सफर ही तो है... ) 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(BHUTAN, PLING, JAIGAON, TORSA, TEESTA, BAGDOGRA, SILIGURI, DELHI, AIR INDIA )