Saturday, June 2, 2018

जयगांव से दिल्ली- तीस्ता तोरसा से दूर होते हुए...

हम भूटान के फुंटशोलिंग से अब दिल्ली के लिए वापसी की राह पर हैं। सीमांत शहर जयगांव में अगले दिन सुबह 5.45 में होटल से चेक आउट करके हमलोग भूटान गेट पर पहुंच गए हैं। यहां कोई बस स्टैंड तो नहीं है पर सिलिगुड़ी जाने वाली बस यहीं से मिलेगी।  यह एक अलसाई भोर है। विशाल भूटान गेट अपनी पूरी कलात्मकता के साथ उन्नत खड़ा दिखाई दे रहा है।

सुबह सुबह चाय की दुकानें खुल चुकी हैं। भारत और भूटान के बीच लोगों की आवाजाही शुरू हो चुकी है। थोड़ी देर में हमें कुछ धार्मिक समुदाय के लोग भजन गाते हुए सड़क पर प्रभात फेरी निकालते हुए मिले। हम सिलिगुड़ी की बस का इंतजार करने लगे। एक दिन पहले ही पता कर लिया था, पहली बस 6 बजे सुबह में है। 

दूसरी बस 6.30 बजे है भूटान की ओर आने वाली बस है जो सिलिगुड़ी तक जाती है । हमें इस बस के भी दर्शन हुए। यह बूंपा ट्रांसपोर्ट की बस है। छह बजे वाली बस अपने समय से आई,पर हमने इस बस को छोड़ दिया। क्योंकि इस बीच हमें एक टैक्सी (आल्टो) वाले मिल गए। उन्होंने कहा कि 250 रुपये प्रति सवारी पर आप हमारे साथ सिलिगुड़ी चलें, मैं बस से पहले पहुंचा दूंगा। हमें ये सौदा अच्छा लगा। तो हमने बस के बजाय टैक्सी से जाना तय कर लिया। 

अब टैक्सी वाले दो और सवारियों का इंतजार करने लगे। संयोग से दो और लोग जल्दी ही मिल गए। एक बंगाली दंपति जो सिलिगुड़ी जाना चाह रहे थे। पर उन्हें टैक्सी का किराया बेसी लग रहा था। वे थोड़ा सोचने लगे। हमें बंगाली बाबू लोगों की ये बात अच्छी लगती है। वे एक एक रुपये की कीमत समझते हैं। पर वे कार से ही जाने को तैयार हो गए हैं। हम चल पड़े हैं। सुबह 6.30 बजे सिलीगुड़ी की ओर। बंगाली दंपत्ति के साथ एक नन्ही सी बच्ची भी है।  

थोड़ी देर बाद ही हासीमारा आया। हासीमारा में हमारे एक परिचित रहते हैं पर उनसे मिलना नहीं हो सका। फिर उसी पुराने रास्ते पर जिससे आना हुआ था। अब हमारी टैक्सी दुआर्स के चाय बगानों के बीच बने हाईवे पर सरपट भाग रही थी। सड़क अच्छी बन गई है। फोर लेन सड़क पर कार की गति 100 के पार है। रेलवे लाइन के समांतर चल रही सड़क पर हमें सुबह सुबह ट्रेन जाती हुई दिखाई दे जाती है। सड़क के बाद चाय के बगान और उसके बाद रेल की इकहरी पटरी। 

हासीमारा और मदारीहाट के बीच तोरसा नदी पर पुल आया। वही तोरसा नदी जो भूटान से आती है। यहां भी तोरसा का जल निर्मल दिखाई दे रहा है। बिल्कुल नीला। कोई प्रदूषण का असर नहीं। पर आगे भी नदी ऐसी ही दिखाई देती होगी। शायद नहीं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
(BHUTAN, PLING, JAIGAON, TORSA, TEESTA, BAGDOGRA, SILIGURI, DELHI, AIR INDIA ) 

No comments:

Post a Comment