Tuesday, May 8, 2018

टाइगर नेस्ट यानी ताकसांग - बाघ वाली गुफा

 


भूटान के अनूठे बौद्ध मठ टाइगर नेस्ट का मूल नाम ताकसांग है। भूटानी में इसका अभिप्राय बाघ से ही है।  क्या सचमुच यहां तक आचार्य पद्मसंभव  बाघ पर सवार होकर आए थे। भूटान   के  लोग  तो ऐसा ही मानते हैं।   
 कहा जाता है कि इतने ऊंचे पहाड़ों पर गुफाओं में आचार्य पद्मसंभव ने लंबे समय तक ध्यान किया। वे तीन बार यहां लंबे समय तक रहे।



नीचे से यह टाइगर नेस्ट  पहाड़ों के बीच टंगा हुआ सा दिखाई देता है। पर टाइगर नेस्ट में  इतनी ऊंचाई पर कुल सात मंदिर बने हुए हैं। यहां बौद्ध भिक्षु गण निवास करते हैं।  जाहिर है जो  बौद्ध भिक्षु एक बार यहां आ जाते होंगे नीचे काफी दिनों बाद ही उतरते होंगे। दूर से देखने में  टाइगर नेस्ट पहाड़ों के बीच गुफा सा ही लगता है। पर अंदर से देखने में काफी भव्य है। 

साल 2005 में जापान सरकार के सहयोग से टाइगर नेस्ट को   नवीकृत किया गया है। मंदिर में आचार्य पद्मसंभव और गौतम बुद्ध की विशाल मूर्तियां हैं। पहाड़ों पर जिस तरह पर्वत श्रंखला को काट कर इन गुफाओं और मंदिरों का निर्माण किया गया है वह किसी अजूबे से कम नहीं है।   जाहिर है कि इसके निर्माण के  लिए सारा कच्चा माल   पैदल खच्चरों पर लाद कर लाया गया होगा।


मुझे लगता है कि इसे दुनिया के  सेवेन वंडर की सूची में और नए विश्व विरासत की सूची में भी शामिल किया जाना चाहिए। यहां एक सज्जन से मुलाकात हुई जो पारो कालेज में प्रोफेसर हैं। उन्होंने हमें टाइगर नेस्ट के महत्व के बारे में बताया। मंदिर से हमें आशीर्वाद के तौर पर पवित्र जल भी दिया।



टाइगर नेस्ट के प्रवेश द्वार पर टिकट चेक हो रहा था।  दरअसल बाकी जोंग की तरह यहां प्रवेश के लिए भी  350 रुपये का टिकट है। यह टिकट आधार तल पर ही बने काउंटर पर मिलता है। पर हमलोग बिना टिकट लिए ही यात्रा पर चल  पड़े  थे। दरअसल जब हम चले तक टिकट काउंटर खुला ही नहीं था।  थोड़ा समझाने  पर टिकट चेक करने वाले सज्जन मान गए और हमें प्रवेश मिल गया।


 इतनी लंबी ट्रैकिंग करके टाइगर नेस्ट पहुंचने के बाद  यहां  इसकी भव्यता देखकर मन प्रसन्न हो गया। यहां  आकर  एक अलग किस्म की आत्मिक शांति मिलती है।  हां, बुद्धम शरणम गच्छामि। संघम शरण  गच्छामि।  धम्म शरणम गच्छामि।


 एक घंटे टाइगर नेस्ट मठ के अंदर गुजारने के बाद हमलोग  अब वापसी की राह पर हैं। तो आ अब लौट चले। पहले 350 से  ज्यादा सीढ़ियां उतरना फिर करीब 400 सीढ़िया चढ़ना है। इसके बाद तो लगातार उतरना है। चढाई की तुलना में हमारी उतरने में गति तेज हो गई है।


हमने रास्ते में किसी सज्जन के भूटान के लोकल मोबाइल नंबर से अपने ड्राईवर को आने की सूचना दी। वे टाइगर नेस्ट के बेस कैंप पर अपना वाहन लेकर पहले से ही हाजिर थे। वापसी पर देखा कि बेस कैंप के पास कई रंग बिरंगी दुकानें सज गई थीं जो उपहार में दिए जाने योग्य वस्तुएं बेच रहे थे।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(TIGER NEST, PARO ) 
  

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