Wednesday, May 30, 2018

भूटान मतलब खुशियों का देश – ग्रॉस नेशनल हैपीनेस

भूटान को खुशियों का देश लैंड ऑफ हैपिनेस कहा जाता है। दक्षिण-पूर्व एशिया में भूटान एक बहुत छोटा-सा देश है लेकिन इसकी ख्याति इस कारण है कि यह खुशनुमा देश है। ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस' ( जीएनएच) का मंत्र भी यहीं से दुनिया को मिला है। 'ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्शन' यानी जीडीपी के पीछे दौड़ती दुनिया को   भूटान ने कुछ अलग संदेश दिया है। यह संदेश है -  जीवन में खुश कैसे रहे सकते हैं।  इस   देश   की सबसे खास बात ये है कि यहां सफलता को जीडीपी के बजाय जीएनएएच (ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस) यानी   खुशियों   के हिसाब से नापा जाता है। जीएनएच को भूटान के 2008 में लागू नए संविधान में शामिल किया गया है।  

पर्यावरण संग  सामंजस्य बिठा कर खुश रहें-  क्या अंधाधुंध प्रगति से खुशियां खरीदी जा सकती हैं। नहीं ना। ऐसा होता चीन के कुछ अति विकसित बड़े शहरों में हर साल प्रदूषण के कारण कर्फ्यू लगाने की नौबत नहीं आती। शानदार सड़के, महंगी गाड़ियां, दिन रात बिजली से चलने वाले ऐश ओ आराम के उपकरण से खुश नहीं रहा जा सकता। असली खुशी तो बेहतर पर्यावरण और प्रकृति से मिलने वाले संसाधनों के साथ सामंजस्य बिठाकर ही प्राप्त की जा सकती है। हम प्रकृति से मिली सुविधाओं का लाभ तो उठाएं पर उनका अंधाधुंध दोहन न करें।

अमेरिका में रहने वाली लिंडा लेमिंग नब्बे के दशक में भूटान पहुंची तो यहां के लोगों की जीवन शैली देखकर वे चकित रह गईं। भूटान की जीवन शैली से प्रभावित होकर उन्होंने 'मैरिड टू भूटान' नामक एक पुस्तक लिखी। अब उनकी दूसरी किताब 'अ फील्ड गाइड टू हैप्पीनेस' भी आई है। इन दोनों किताबों में उन्होंने भूटान के लोगों की खुशी का रहस्य उजागर किया है। वे कहती हैं कि भूटान के नागरिक जिंदगी को बहुत इत्मीनान और भरपूर तरीके से जिंदगी को जीते हैं और इसलिए वे खुश रहते हैं। 
एक और बात है, बेहतर पर्यावरण के कारण भूटान   की हवा में ऑक्सीजन की मात्रा इतनी अधिक है कि आप पूरे समय तरोताजा महसूस करते हैं।


नो स्मोकिंग कंट्री - हमने पूरे भूटान  भ्रमण के दौरान किसी को भी सिगरेट पीते हुए नहीं देखा। हालांकि लोग यहां पूर्वोत्तर राज्यों की तरह तांबुल (सुपारी) खाते हैं। यहां पर तांबुल को दोमा कहते हैं। हालांकि यहां कुछ लोग चोरी चुपके ड्रग्स भी लेते हैं। युवा पीढ़ी खास तौर पर कुछ ऐसे नशे के गिरफ्त में है।  

गासा में ऑरगेनिक खेती – भूटान में हमें चीन की सीमा क्षेत्र के शहर गासा की कहानी सुनने को मिलती है। वहां आरगेनिक फार्मिंग शुरू की गई है। गासा के किसान कुछ बड़े होटलों को आरगेनिक तरीके से उगाई गई सब्जियां सप्लाई कर रहे हैं। वहां लहसुन, गाजर, आलू आदि की खेती हो रही है। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ी है। भूटान का पड़ोसी भारत का राज्य सिक्किम पूरी तरह आरगेनिक राज्य बन चुका है। अब भूटान भी उसी नक्शेकदम पर है।

चीन से तस्करी - भूटान की बहुत लंबी सीमा चीन के साथ लगती है। चीन हमेशा से भूटान पर अपना वर्चस्व कायम करने की इच्छा भी रखता है। पर भूटान के रिश्ते ऐतिहासिक तौर पर भारत के साथ बेहतर तरीके से जुड़े हैं। हमें भूटान में एक सज्जन बताते हैं कि भूटान को कई बार चीन प्रलोभन देने की कोशिश करता है। हम भारत से आपकी तीन गुनी आर्थिक सहायता करेंगे पर आप हमारे साथ आओ। भूटान तक चीन सड़क बनाने की इच्छा जाहिर करता है। व्यापारिक मार्ग खोलने की बात करता है। पर भूटान की विदेश नीति भारत निर्धारित करता है। भूटान की सरकार कभी चीन के प्रलोभन में नहीं आई।


पर भूटान में ये सुनने में आया कि काफी लोग हा  बार्डर की तरफ से चीन जाकर तस्करी करते हैं। इस तस्करी में भारत से चंदन की लकड़ी चीन भेजी जाती है। वहीं चीन से कपड़े और कास्मेटिक जैसे सामान लेकर लोग आते है। लोग हा से पैदल चलकर एक दो दिन में चीन के निकटवर्ती शहर तक पहुंच जाते हैं। कई लोग तो घोड़े से भी चीन जाते हैं। इसमें कई लोग पकड़े भी जाते हैं। सजा भी होती है। फिर छूटने पर इस काम में लग जाते हैं। चीन से इस तरह की तस्करी करके भूटान के पारो शहर के कई लोग करोड़पति बन चुके हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(BHUTAN, GROSS NATIONAL HAPPINESS )



2 comments:

  1. sateek jankaari k liy aabhaar

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन हिंदी पत्रकारिता दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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