Wednesday, May 16, 2018

खुमसुम स्तूप मतलब भूटान का गोल्डेन टेंपल

पुनाखा जोंग के दर्शन के बाद हमलोग आगे निकल पड़े हैं गासा रोड पर। कोई 7 किलोमीटर जाने के बाद पोचू नदी पर रिवर राफ्टिंग प्वाइंट आता है। एक दल राफ्टिंग के लिए तैयार है। उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है। यहां राफ्टिंग का शुल्क 8 लोगों के लिए 8 हजार है। पर इन दिनों कम सैलानी होने के कारण 5 हजार में भी हो जा रहा है। पर हमें तो राफ्टिंग नहीं करना। हम चल रहे हैं खुमसुम यूली नामाग्लाय छोटेन जोंग की ओर। इसे स्थानीय लोग गोल्डेन टेंपल के नाम से भी जानते हैं क्योंकि इसके कलश में सोना मढ़ा गया है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस जोंग तक जाने के लिए 2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।


टैक्सी ड्राईवर ने गाड़ी पार्किंग में लगाई। हमलोगों ने एक सुंदर सस्पेंसन ब्रिज से मोचू नदी पार किया और चल पड़े मंदिर की ओर। पहले 500 मीटर का रास्ता हरे भरे खेतों से होकर गुजरा। इसके बाद शुरू हुई चढ़ाई। आधी चढ़ाई के बाद क साईन बोर्ड नजर आया जिससे पता चला कि हम सही दिशा में जा रहे हैं। करीब 45 मिनट की चढ़ाई के बाद हम मंदिर पहुंच गए हैं। यहां से मोचू नदी का नजारा बड़ा भव्य दिखाई दे रहा है।


खुमसुम छोटेन का निर्माण 2004 में कराया गया। यह येपाइसा गांव में स्थित है। यह एक नया बौद्ध स्तूप है। रानी मां आशी शेरिंग योंगदान वांगचुक द्वारा इस भव्य स्तूप का निर्माण कराया गया है। हरित परिसर में बना यह स्तूप तीन मंजिला है। जब हमलोग परिसर में पहुंचे हैं तो स्तूप बंद है, पर 10 मिनट के इंतजार के बाद खुल गया। परिसर में एक बोधि वृक्ष भी लगाया गया है। वृक्ष के नीचे ध्यानरत बुद्ध की प्रतिमा भी है।  

स्तूप की आंतरिक सज्जा शानदार है। इसे भूटान को बुरी आत्माओं के कहर से बचाने के निमित्त बनवाया गया है। स्तूप के अंदर तीनों मंजिलों पर अति सुंदर मूर्तियां बनी हैं।
स्तूप के परिसर में अलग अलग स्थलों से आए लामा दिखाई दे रहे हैं। कुछ विदेशी नागरिक भी स्तूप देखने आए हैं। वैसे पुनाखा आने वाले कम ही लोग इस स्तूप तक आते हैं। पर अगर आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं तो यहां जरूर पहुंचे। पारो के टाइगर नेस्ट की तुलना में यहां की चढ़ाई काफी कम है। पर स्तूप की तीसरी मंजिल के चौबारे से चारों तरफ का नजारा बड़ा शानदार दिखाई देता है। इस स्तूप तक एक रोपवे का भी निर्माण कराया गया है। पर वह सिर्फ सामान ढुलाई के लिए है। 
वैसे  तो ऐसे स्थलों पर पदयात्रा करके आने का अपना अलग आनंद है। आप प्रदूषण मुक्त वातावरण में प्रकृति संग संवाद करते हुए बढ़ते है।
स्तूप तक चढाई की तुलना में उतरने में हमें काफी कम समय लगा। हमलोग लगभग दौड़ते हुए उतर गए। सड़क पर आने पर पता चला कि इस बीच ड्राईवर महोदय दोपहर का लंच कर चुके हैं। पर हम सुबह के नास्ते के बाद लगातार घूम रहे हैं, सिर्फ जूस पीकर और गाजर खाकर। राफ्टिंग वाला दल नदी में उतर चुका है। हम चल चुके हैं अगली मंजिल की ओर।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - लिखें - vidyutp@gmail.com 
(KHUMSUM YULLEY NAMAGYAL CHOTEN, YEPAISA PUNAKHA )