Tuesday, April 10, 2018

एक बार फिर सुहाने देस सिक्किम में

दूसरी बार सिक्किम की राह पर हूं। साल 2015 के दिसंबर में सिक्किम जाना हुआ था। तब सिक्किम को 16 जनवरी 2016 को आरगेनिक स्टेट का दर्जा मिलने वाला था। अब हम आरगेनिक स्टेट में जा रहे हैं। दिल्ली के टी3 से एयर इंडिया की बागडोगरा वाली फ्लाइट समय पर है। यह 36 नंबर गेट से उड़ान भरेगी। सारे यात्रियों के प्रवेश करने के बाद यह विमान अपने तय समय से 20 मिनट पहले ही हवा में है। इस बार खिड़की वाली सीट पर अनादि हैं बीच में मैं और बगल वाली सीट पर एक युवा सरकारी अधिकारी। उनसे बातों सिलसिला शुरू हुआ। इसी बीच विमान की खिड़की श्वेत धवल हिमालय की चोटियां दिखाई देती रहीं। कहते हैं दिल्ली से गुवाहाटी, बागडोगरा जाते समय में माउंट एवरेस्ट भी विमान की खिड़की से दिखता है। हालांकि हमें माउंट एवरेस्ट नहीं दिखा पर बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां हमेशा नजर में रहीं।

बीच बीच में एयर इंडिया के शाकाहारी खाने का लुत्फ उठाता रहा। इसी बीच दो घंटे कब गुजर गए पता नहीं चला और विमान बागडोगरा में उतरने लगा है। चारों तरफ हरे भरे चाय के बगान नजरों में हैं। इन बगानों के बीच हरियाला एयरपोर्ट। बागडोगरा एयरपोर्ट सिलिगुड़ी शहर से 12 किलोमीटर बाहर बिहार जाने वाले हाईवे पर हरे भरे चाय के बगानों के बीच में है।
बागडोगरा महत्वपूर्ण सैन्य हवाई अड्डा भी है। साथ ही दार्जिलिंग, सिक्किम, बंगाल के दुआर्स और भूटान जाने के लिए निकटतम एयरपोर्ट। बागडोगरा एयरपोर्ट से गंगटोक के लिए सिक्किम टूरिज्म का छोटा हेलीकॉप्टर रोज उड़ान भरता है। इसकी पूछताछ आप यहीं कर सकते हैं। वहीं भूटान के पारो के लिए भी यहां से विमान सेवा है। एयरपोर्ट से बाहर निकलने पर अगर आप टैक्सी बुक करते हैं तो सिलिगुड़ी जंक्शन के लिए वे 500 से 600 मांगते हैं। पर हमें एक सूमो वाले मिल गए उन्होंने हम दो सवारियों को 100 रुपये में  ही हिलकार्ट रोड पर छोड़ दिया। वैसे बागडोगरा से आपको गंगटोक या दार्जिलिंग जाने के लिए रिजर्ब छोटी या बड़ी गाड़ी चाहिए तो मिल जाएगी।
अगर सस्ते में एयरपोर्ट से शहर जाना चाहते हैं तो टैक्सी के चक्कर में न पड़कर थोड़ा बाहर निकलें। बाहर निकलकर आधा किलोमीटर पैदल चलें। आप एनएच 31 पर पहुंच जाएंगे यहां से आपको बागडोगरा बाजार और सिलिगुड़ी के लिए आटो बैटरी रिक्शा आदि मिल जाएंगे। बंगाली मानुस के शहर में एयरपोर्ट पहुंचने का सस्ता विकल्प जरूर होता है। आपको एयरपोर्ट के बाहर से भी आटो रिक्शा मिल सकते हैं।
सिलिगुड़ी में महानंदा नदी पर पुल आता है। पर नदी में पानी नहीं है। यूं कहें की बहुत कम है। सिलिगुड़ी के हिलकार्ट रोड पर हमलोग गंगटोक स्टैंड पर पहुंच गए हैं। यहां से गंगटोक जाने वाली शेयरिंग सूमो में हमने जगह ली। यहां से गाड़ी सीट भरने पर चलेगी। इसमें कई बार समय लग जाता है। पर थोड़ी देर बाद एक यात्रियों का समूह आ गया। उन सबको एक साथ एक गाड़ी में जगह देने के लिए  हमें उतारकर अगली गाड़ी में बिठा दिया गया।
गंगटोक के रास्ते में, मोमोज के बाद चनाजोर गरम का मजा। 
खैर थोड़ी देर में ये गाड़ी भरने के बाद चल पड़ी। सेवक पहुंचने पर बायीं तरफ मां काली का मंदिर आया। सेवकेश्वरी काली मंदिर। इस मंदिर की स्थानीय लोगों में काफी आस्था है। फिर शुरू हुआ तीस्ता नदी के संग हरा भरा सफर।मेरे लिए रास्ता पुराना था पर अनादि के लिए नया नया। सो वे खूब तीस्ता दर्शन करते चल रहे थे। हमलोग किरने में खाने के लिए रूके। वहां हमें बिहार के चना जोर गरम वाले मिल गए। उत्तर बिहार से आकर 22 साल से यहीं चना जोर गरम बेच रहे हैं। उनके ग्राहक रोज गंगटोक जाने वाले सैलानी हैं।


चार घंटे के सफर के बाद हमलोग पहुंच गए हैं गंगटोक के देवराली स्टैंड। यहां से लोकल टैक्सी से हमलोग अपने होटल प्लीजेंट हिल रेसिडेंसी पहुंचे। यह होटल लोअर अरिथांग इलाके में है। एमजी रोड से आधा किलोमीटर उतरने पर होटल आता है। इसके संचालक बलिया के बिस्मिल्लाह भाई हैं। उनके मिलते ही मित्रता हो गई। होटल में सामान रखकर हमलोग गंगटोक की सबसे सुहानी जगह एमजी रोड की सैर करने निकल पड़े।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
( BAGDOGRA, AIR INDIA, TEA GARDEN, SILIGURI, HILL CART ROAD, HOTEL PLEASANT HILL RESIDENCY )