Tuesday, April 24, 2018

दुआर्स के चाय बागानों से होकर गुजरते हुए


हमारा बाघ पुल से आगे का सफर शुरू चुका है। ये लोकल बस है। हर जगह रुकती हुई चल रही है। नेशनल हाईवे के साथ साथ रेलवे लाइन भी चल रही है। ये सिंगल लाइन वाली रेलवे है जो दुआर्स से होती हुई अलीपुर दुआर, कूचबिहार होते हुए असम में धुबड़ी तक चली जाती है। पर ये दुआर्स के लोगों के लिए लाइफ लाइन जैसी है। इस लाइन पर हासीमारा रेलवे स्टेशन से भी जयगांव पहुंचा जा सकता है। 



ये बस हर छोटे छोटे कस्बे में रुक रही है तो कई लोग उतर रहे हैं और चढ़ रहे हैं। भीड़ कम नहीं हो रही है। बागरकोट चाय बगान सड़क के दोनों तरफ हमारी नजरों में है। इसके बाद आया उदयबाड़ी। उदयबाड़ी के बाद दमदिम कैंटोनमेंट एरिया आया। दमदिम नाम से इल इलाके में टी एस्टेट भी है। यहां काफी लोग उतरे पर हमें बैठने की जगह नहीं मिली। 

और हमें सीट मिल गई - इसके बाद आया माल बाजार। यह जलपाईगुड़ी जिले का बड़ा बाजार है। यह नगरपालिका भी है और सब-डिवीजन भी है। माल बाजार इस इलाके का वाकई बड़ा बाजार है। यहां बाजार में रौनक दिखाई दे रही है।
यह बड़ा अच्छा रहा कि यहां मुझे और अनादि को बस में सीट मिल गई। एक सुंदर बंगाली महिला और उनकी बेटी ने सीट खाली की तो हम वहां जा बैठे। सीट मिलने से थोड़ी राहत मिली। तो हमारा आगे का सफर बैठकर होने लगा। 
तीस्ता की सहायक डायना नदी पर रेल पुल 

माल बाजार के बाद बस चालसा नामक छोटे से कसबे में रुकी। इसके बाद नगरकाटा, लूकसान और बानरहाट जैसे छोटे-छोटे कस्बे आए। यहां डायना नदी पर पुल नजर आया। अभी नदी में पानी नहीं है। पर नदी का विस्तार चौड़ा है। डायना नदी भूटान से निकल कर बंगाल के दआर इलाके में प्रवेश करती है। आगे यह तीस्ता में मिल जाती है। इसके बाद हमें डायना टी एस्टेट का विशाल चाय बगान नजर आया। यह 1911 मेें स्थापित चाय कंपनी है। इसे क्वीन ऑफ दुआर्स कहा जाता है। धुपगुड़ी इलाके में स्थित कंपनी के पास कई सौ एकड़ में फैला चाय बागान है। 

इसके बाद हम पहुंचे हैं बिनागुड़ी। यह नाम कई सालों से मेरे जेहन में है। मेरे एक परिचित कभी यहां सेना में पदस्थापित थे तो उनकी पत्नी बार बार बिनागुड़ी का नाम लिया करती थीं। बिनागुड़ी थल सेना का बड़ा कैंटोनमेंट एरिया है। बिनागुड़ी कैंटोनमेंट के प्रवेश द्वार पर बुद्ध की प्रतिमा नजर आई। बुद्ध मतलब युद्ध नहीं, यानी शांति के प्रतीक। 

बिनागुड़ी से कुछ किलोमीटर के सफर के बाद एथलबाड़ी से अलीपुर दुआर जिला शुरू हो जाता है। बंगाल के दुआर्स रीजन में चाय की कई प्रसिद्ध बगाने हैं। बंगाल का दुआर्स इलाका पूरे पश्चिम बंगाल से थोड़ा अलग है। इस तरफ के लोग हिंदी भी खूब बोलते हैं। शायद ऐसा चाय के बगानों में सदियों से काम करने आए यूपी बिहार के लोगों के कारण होगा। काफी लोग तो इसी इलाके में बस गए हैं।  
अब हमलोग बीरपाड़ा पहुंचने वाले हैं। पर बीरपाड़ा शहर से पहले भारी जाम लगा है। हमारी बस यहीं तक है। जाम में जगह बनाती हुई बस बीरपाड़ा चौराहे तक पहुंच गई। हम बस से उतर गए। अपना सामान छत से उतरवाया। बीरपाड़ा अलीपुर दुआर जिले का भीड़भाड़ वाला बाजार है। 

( यात्रा अभी जारी है- पढ़ते रहिए दानापानी ) 

( यात्रा मार्ग-  बाघपुल - बागरकोट- उदयबाड़ी- दमदिम- माल बाजार- चालसा- नगरकाटा-लुकसान - बनारहाट- बिनागुड़ी तेलीपाड़ा- एथलबाड़ी बीरपाड़ा- मदारीहाट- न्यू हाशीमारा- ओल्ड हाशीमारा- जयगांव )
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  vidyutp@gmal.com
   ( DUARS TEA GARDEN, MAL BAZAR, BINAGURI, BIRPARA, RIVER )

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