Saturday, April 14, 2018

सिलिगुड़ी से गंगटोक की दूसरी यात्रा


बाग डोगरा एयरपोर्ट से निकलने के बाद हमलोग सिलिगुड़ी में महानंदा नदी  के पुल  को पार कर रहे है। पर नदी में  ज्यादा पानी नहीं है। यूं कहें की बहुत कम है। सिलिगुड़ी के हिलकार्ट रोड पर हमलोग गंगटोक स्टैंड पर पहुंच गए हैं।   हिलकार्ट  रोड पर होटल हेरिटेज  के आसपास से  सिलिगुड़ी और  गंगटोक के लिए टैक्सी मिलती है। इन टैक्सी  पर बोर्ड लगा है - गंगटोक फर्स्ट टर्न। मतलब सबसे पहले ये टैक्सी जाएगी।

इसी हिलकार्ट  रोड पर आगे जाकर जनरल बस स्टैंड भी है। यहां पर हमने  गंगटोक जाने वाली एक शेयरिंग सूमो में जगह ले ली है। यहां से गाड़ी सीट भरने पर चलेगी। इसमें कई बार ज्यादा समय लग जाता है। कई बार लोगों को लंबा इंतजार  भी करना पड़ जाता है। इस समय का सदुपयोग करते हुए हमने थोड़ी सी पेट पूजा कर ली।



सिलिगुडी शहर में  श्रीकृष्ण वेदांत आश्रम दिखाई देता है। यहां   स्वामी विवेकानंद की सुंदर सी विशाल प्रतिमा लगी हुई है।   सिलिगुड़ी शहर में नेपाली संस्कृति का भी पूरा प्रभाव दिखाई देता है। टैक्सी स्टैंड के आसपास कई नेपाली भोजनालय दिखाई दे रहे हैं।  दरअसल दार्जिलिंग और सिक्किम क्षेत्र में बड़ी संख्या में नेपाली लोग हैं। इसका असर सिलिगुड़ी पर भी दिखाई देता है।


हम जिस गाड़ी में बैठे हैं उसमें थोड़ी देर बाद एक यात्रियों का समूह आ गया। उन सबको एक साथ एक गाड़ी में जगह देने के लिए   हमें उतारकर अगली गाड़ी में बिठा दिया गया।   हमने इसका विरोध किया,   क्योंकि पहले आने वाले  का पहले सफर करने का  हक बनता है। पर इसका कोई फायदा नहीं हुआ।   खैर थोड़ी देर में ये दूसरी टैक्सी  भी भरने के बाद चल पड़ी। 


वैसे सिलिगुड़ी   दार्जिलिंग और  सिक्किम का प्रवेश द्वार होने के साथ ही   कई राज्यों को जोड़ने वाला शहर है। यहां से आपको  असम के गुवाहाटी, तेजपुर और मेघालय के शिलांग के लिए सीधी बसें मिल जाएंगी।  वहीं कोलकाता , आसनसोल बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर  जैसे शहरों  के लिए भी  निजी बसें चलती हैं। असम के कोकराझार इलाके के लिए भी बसें यहां से चलती हैं। 

गंगटोक के रास्ते में, मोमोज के बाद चनाजोर गरम का मजा। 

सेवक पहुंचने पर बायीं तरफ मां काली का मंदिर आया। सेवकेश्वरी काली मंदिर। इस मंदिर की स्थानीय लोगों में काफी आस्था है। फिर शुरू हुआ तीस्ता नदी के संग हरा भरा सफर।  मेरे लिए रास्ता पुराना था पर अनादि के लिए नया नया। सो वे खूब तीस्ता दर्शन करते चल रहे थे। हमलोग किरने में खाने के लिए रूके। वहां हमें बिहार के चना जोर गरम वाले मिल गए। उत्तर बिहार से आकर 22 साल से यहीं चना जोर गरम बेच रहे हैं। उनके ग्राहक रोज गंगटोक जाने वाले सैलानी हैं।


चार घंटे के सफर के बाद हमलोग पहुंच गए हैं गंगटोक के देवराली स्टैंड। ये रास्ता मेरे लिए जाना पहचाना था पर अनादि के लिए नया-नया। यहां से लोकल टैक्सी से हमलोग अपने होटल प्लीजेंट हिल रेसिडेंसी पहुंचे। यह होटल लोअर अरिथांग इलाके में है। एमजी रोड से आधा किलोमीटर उतरने पर होटल आता है। इसके संचालक बलिया के बिस्मिल्लाह भाई हैं। उनके मिलते ही मित्रता हो गई। होटल में सामान रखकर हमलोग गंगटोक की सबसे सुहानी जगह एमजी रोड की सैर करने निकल पड़े।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
( BAGDOGRA, AIR INDIA, TEA GARDEN, SILIGURI, HILL CART ROAD, HOTEL PLEASANT HILL RESIDENCY ) 

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