Tuesday, April 24, 2018

यहां से मिलता है पूरे गंगटोक शहर को पानी....

 

गंगटोक का वाटर रिजरवायर -   पूरे   गंगटोक शहर को पानी कहां से मिलता है।  यहां कोई कुआं या  हैंडपंप नहीं है।    हमें ड्राईवर साहब गंगटोक शहर का वाटर रिजरवयार दिखाते हैं। पहाड़ो से झरनों से आने वाला पानी यहां स्टाक किया जाता है। फिर उसे प्यूरीफाई करके पूरे शहर को सप्लाई किया जाता है। पूरे गंगटोक शहर को यहीं से पानी मिलता है। कहीं कोई हैंडपंप या बोरिंग की जरूरत नहीं है। यह जल संरक्षण का सुंदर नमूना है। 

प्लांट कंजरवेशन सेंटर - इसके बाद हम  चलकर रुक जाते हैं प्लांट कंजरवेशन सेंटर के पास। यहां पर अलग अलग तरह के  पौधों को  तैयार किया जाता है। उनपर शोध भी होता है। इसके अंदर जाकर भी हमने थोड़ी देर घूमा।  यहां लगे बोर्ड के मुताबिक 10 अप्रैल 2015 को मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने इस कंजरवेटरी का उदघाटन किया। यह सिक्किम के वन विभाग के अंतर्गत आता है।
इस केंद्र  के अंदर रंग बिरंगे फूलों के संग हम कुछ वक्त गुजारते हैं। उद्यान बड़ा है। समय होता तो थोड़ा और वक्त गुजारते थे। पर वक्त रुकता कहां है किसी के लिए...  हमारे मन में वह गीत याद आता है - फिर छिड़ी बात फूलों की...रात  है या बारात फूलों की...ये फूल भी ना जिंदगी के हर मोड़ पर चले आते हैं  किसी न किसी रूप में।


ताशी  व्यू प्वाइंट से नजारा -  
इसके बाद हमारा अगला पड़ाव है ताशी व्यू प्वाइंट।    ताशी व्यू प्वाइंट से पहाड़ों का नजारा करने के लिए लोग जुटते हैं। इस व्यू प्वाइंट के अंदर एक सोवनियर शॉप  भी बना हुआ है। यहां पर हमारी मुलाकात बनारस के एक शिक्षक दंपति से हुई जो हमें एक दिन पहले युमथांग वैली में भी मिले थे। घूमते हुए कई लोगों का बार-बार टकरा जाना बड़ा रोचक लगता है। 


ताशी व्यू प्वाइंट के पास एक  माइल स्टोन लगा है। इस पर लिखा है नाथुला 54 किलोमीटर। चुंगथांग 90 किलोमीटर।  सिलिगुड़ी 129 किलोमीटर और गंगटोक 6 किलोमीटर। मतलब ये एक चौराहा है जहां से कई रास्ते अलग अलग दिशाओं की ओर जाते हैं।


सच ही कहा है कि सिर्फ हम ही नहीं ये  रास्ते भी चलते रहते हैं। और  कहां से कहां हम पहुंच जाते हैं  यूं ही चलते हुए। पर हमें चलना ही पड़ेगा क्योंकि चलना  ही जीवन की निशानी है। यहां पर मुझे एक सिक्किम के सज्जन मिलते हैं  वे टोकरी और कुल्हाड़ी लेकर निकल पड़े हैं। लकड़ियां काटने के लिए।   मैं उनकी फोटो लेता हूं तो वे देखकर मुस्कुराते हैं। 

ल्हासा फाल्स  - इसके बाद  हम ल्हासा फाल्स नामक झरना  के पास पहुंच जाते  हैं। यह चुंगथांग रोड पर  स्थित है। फिलहाल इस झरने  में पानी कम आ रहा है। बारिश के दिनों में इसमें खूब पानी आता है। झरने के आसपास ढेर सारी बौद्ध पताकाएं फहरा रही हैं।   ऐसा प्रतीत होता है कि इस झरने का आध्यात्मिक महत्व है। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 
(WATER RESERVOIR GANGTOK, PLANT CONSERVATERY, TASHI VIEW POINT, LAHASA FALLS )          
   

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