Friday, April 20, 2018

जयगांव - भूटान का लोकप्रिय प्रवेश द्वार

बंगाल के अलीपुर दुआर जिले का जयगांव शहर। जयगांव हमारे पड़ोसी देश भूटान का सबसे लोकप्रिय प्रवेश द्वार है। रोज हजारों लोग सैकड़ो वाहन यहां से भूटान में प्रवेश करते हैं। 

भूटान के तीन प्रवेश द्वार : वैसे भारत से भूटान जाने के लिए तीन चेकपोस्ट वाले शहर हैं जहां से भूटान में प्रवेश किया जा सकता है।
जयगांव के अलावा असम के बंगाईगांव से गलपे बार्डर से और असम से रंगिया पास समद्रुप जोंगखार बार्डर से भी भूटान में प्रवेश किया जा सकता है। पर इनमें जयगांव-फुंटशोलिंग सबसे लोकप्रिय प्रवेश मार्ग है भूटान के लिए। ज्यादातर सैलानी यहीं से प्रवेश करते हैं भूटान में। भारत से भूटान जाने वाले रसद व अन्य सामान की सप्लाई भी यहीं से होती है। जयगांव में आकर्षक भूटान गेट बना है, जिसके उस पार घड़ी अपना समय बदल लेती है। भूटान की घड़ी हमसे 30 मिनट आगे है। यहां दोनों देशों के बीच कोई नो मेन्स लैंड नहीं है। एक दीवार के इस पार भारत उस पार भूटान। सीमा की रक्षा एसएसबी के हवाले है।
भूटान में पैदल प्रवेश करने के लिए भूटान गेट बगल से छोटा सा प्रवेश द्वार है जिससे आप सुबह 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक बेधड़क आ जा सकते हैं। गेट पर मेटल डिटेक्टर लगे हैं। आप भारतीय हैं तो भूटान गेट के अंदर 5 किलोमीटर तक यानी फुंटशोलिंग शहर में बिना किसी परमिट के जा सकते हैं। तो दिन भर भारत भूटान के बीच आवाजाही लगी रहती है। पर इस पार और उस पार का अंतर दिखाई देता है। फुंटशोलिंग शहर की सड़के साफ सुथरी चमचमाती हुई हैं, तो भारतीय पक्ष जयगांव की टूटी फूटी। जयगांव का बाजार सस्ता है तो फुंटशोलिंग महंगा।

अगर आप भूटान जाना चाहते हैं तो देश के किसी भी कोने से जयगांव पहुंचे। विमान से आए तो बागडोगरा एयरपोर्ट से सिलिगुड़ी शहर। सिलिगुड़ी शहर से बस से जयगांव। दूरी 170 किलोमीटर के आसपास है और किराया 100 से 140 रुपये। बागडोगरा से सीधे जयगांव टैक्सी बुक करके भी पहुंच सकते हैं। जयगांव का निकटतम रेलवे स्टेशन हाशीमारा है। हाशीमारा से जयगांव की दूरी 18 किलोमीटर है। आटोरिक्शा और बसें मिल जाती हैं। न्यू जलपाईगुड़ी गुवाहाटी रेल मार्ग पर फालाकाटा उतर कर भी जयगांव पहुंच सकते हैं। फालाकाटा से जयगांव 52 किलोमीटर है। बसें दिन भर मिलती हैं। सिक्किम की राजधानी गंटटोक और दार्जिलिंग कलिंपोंग से भी जयगांव के लिए शेयरिंग टैक्सियां रोज चलती हैं। पर ये टैक्सियां रोज सुबह ही दोनो तरफ से मिलती हैं।
भूटान में प्रवेश से पहले परमिट बनवाना पड़ता है। इसलिए हर सैलानी को एक रात तो अक्सर जयगांव में गुजारना ही पड़ता है। तो जयगांव में भूटान गेट के आसपास एनएस रोड और लिंक रोड पर कई होटल उपलब्ध हैं। यहां हर बजट में कमरे हैं 300 से लेकर 1500 तक।
जयगांव मतलब एक्सटेंशन ऑफ बिहार – पूरे जयगांव शहर में  बिहार के कारोबारी और मजदूर भरे हुए हैं। बंगाल का शहर होकर भी हिंदी भोजपुरी बोलता नजर आता है। यहां आप सत्तू, लिट्टी चोखा, गोलगप्पा, मोमोज सब कुछ खा सकते हैं। ज्यादातर दुकानदार बिहार के हैं।
इतना ही नहीं जयगांव से रोज बिहार के पूर्णिया, सहरसा, मुजफ्फरपुर, छपरा, सीवान, गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी के लिए सीधी बसें खुलती हैं। मतलब साफ है जयगांव की आधी से ज्यादा आबादी बिहार से संबंध रखती है। जयगांव के सड़कों पर शाम-सुबह टहलते हुए यूं लगता है जैसे बिहार में ही हों।
एनएस रोड पर गोकुल स्वीट्स नामक मिठाइयों की दुकान है। दुकानदार महोदय अलवर राजस्थान के हैं। वे कलाकंद भी बनाते हैं। रसमलाई भी और रसमाधुरी भी। सुबह नास्ते में दो छोटे भठूरे 25 रुपये के। हमने रात को मिठाइयां खाई तो सुबह छोला भठूरा। सुबह सुबह मुझे तो छपरा के साव जी एनएस रोड पर सत्तू बेचते मिले, 10 रुपये का गिलास। साव  जी 40 साल से जयगांव में हैं। 10 रुपये का एक गिलास सत्तू बनाने से पहले 50 ग्राम सत्तू तराजू में तौलते हैं फिर बड़े प्रेम से सत्तू का ग्लास तैयार करते हैं। मैंने पिया तो देखा देखी अनादि भी सत्तू पीने लगे।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 
( GOKUL SWEETS, JAIGAON , BENGAL)