Thursday, April 19, 2018

बाघ पुल से भूटान गेट जयगांव, चाय के बगान के साथ सफर

गंगटोक से वापसी में हम सिलिगुड़ी जाने के बजाय बाघ पुल पर ही उतर गए हैं। हमें टैक्सी ड्राईवर मधुकर ने बताया था कि अगर आप भूटान के शहर फुंटशोलिंग, जयगांव बार्डर जाना जाहते हैं तो आपको गंगटोक से सिलिगुड़ी जाने की जरूरत नहीं है। सिलिगुड़ी से 30 किलोमीटर पहले बाघ पुल पर उतर जाएं। सिलिगुड़ी से जयगांव जाने वाली सभी बसें इस पुल से होकर गुजरती हैं। आपका समय और पैसा दोनो बचेगा। सचमुच हमारे दो घंटे की बचत हुई। साथ 200 से ज्यादा रुपये भी बचे। गंगोटक से बाघ पुल बस का किराया 140 रुपये। जबकि बाघ पुल से जयगांव का किराया 100 रुपये।
1941 में बना बाघ पुल - बाघपुल यानी कोरोनेशन ब्रिज। यह ब्रिटिश काल का ऐतिहासिक पुल है। तीस्ता नदी पर बने इस पुल के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ दो बाघ की प्रतिमाएं लगी हैं इसलिए इसे बाघ पुल कहते हैं। एनएच 31 पर बना यह पुल दार्जिलिंग और जलपाई गुड़ी जिले को जोड़ता है। इस पुल का निर्माण 1937 में शुरू हुआ था। किंग जार्ज पंचम और महारानी एलिजाबेथ के राज्यारोहण की याद में इस पुल को नाम मिला था। पुल 1941 में बन कर तैयार हुआ। इस आकर्षक पुल के निर्माण में तब 4 लाख रुपये का खर्च आया था। तब 1937 में बंगाल के गवर्नर जॉन एंडरसन ने इस पुल की आधारशिला रखी थी। स्थानीय लोग इस बाघ पुल कहते हैं। बाघ पुल के सामने तीस्ता नदी पर रेलवे का भी पुल बना हुआ है।
हमारी बस आकर बाघ पुल के बीचों बीच रुकी। पर ये बस जयगांव तक नहीं बल्कि बीरपाड़ा तक ही जा रही है। बस में जगह भी नहीं है। पर कंडक्टर महोदय भरोसा दिलाते हैं कि आगे जगह मिल जाएगी तो हमलोग बस में बैठ जाते हैं।
सड़क रेलवे लाइन के साथ चल रही है। बागरकोट चाय बगान सड़क के दोनों तरफ नजरों में है। उदयबाड़ी के बाद दमदिम कैंटोनमेंट एरिया आया। इसके बाद माल बाजार। यह जलपाईगुड़ी जिले का बड़ा बाजार है। यहां मुझे और अनादि को बस में सीट मिल गई। एक बंगाली महिला और उनकी बेटी ने सीट खाली की तो हम वहां जा बैठे। माल बाजार के बाद बस चालसा में रुकी। इसके बाद नगरकाटा, लूकसान और बानरहाट जैसे छोटे छोटे कस्बे आए। यहां डायना नदी पर पुल और डायना टी एस्टेट का विशाल चाय बगान नजर आया। इसके बाद हम पहुंचे हैं बिनागुड़ी। बिनागुड़ी थल सेना का बड़ा कैंटोनमेंट है। बिनागुड़ी से कुछ किलोमीटर के सफर के बाद एथलबाड़ी से अलीपुर दुआर जिला शुरू हो जाता है। बंगाल के दुआर्स रीजन में चाय की कई प्रसिद्ध बगाने हैं।

बीरपाड़ा शहर में भारी जाम लगा है। हमारी बस यहीं तक है। यहां से उतरने के बाद हमें अगली बस मिली मदारीहाट तक की। लोगों ने बताया वहां से जयगांव की बस मिल जाएगी। बीरपाड़ा से मदारीहाट सिर्फ 12 किलोमीटर है। मदारीहाट में उतरकर हम बस का इंतजार करने लगे पर देर तक कोई बस नहीं आई। हमलोग चौराहे  पर खड़े हैं लोग बता रहे हैं बस फालकाटा से भी आ सकती है और सिलिगुड़ी की तरफ से भी। मदारीहाट से जयगांव 30 किलोमीटर है।

शाम के 7 बज गए हैं। मैं आश्वस्त हूं अगर बस नहीं आई तो सामने एक गेस्ट हाउस दिखाई दे रहा है। रात को यहीं रुक जाएंगे। पर थोड़ी देर में सिलिगुड़ी से आने वाली बस आ गई। हमलोग फटाफट इसमें जा बैठे। पहले हाशीमारा रेलवे स्टेशन आया, जो न्यू हाशीमारा कहलता है। इसके बाद ओल्ड हाशीमारा फिर जयगांव बाजार। सरपट भागती बस ने हमें जयगांव बस स्टैंड में उतार दिया। वहां से शेयरिंग आटो रिक्शा मिला जिसमें 7 रुपये प्रति सवारी की दर से हम भूटान गेट पहुंच गए। पूरे दुआर्स इलाके में हमें लोग बांग्ला के बजाय हिंदी बोलते नजर आए। 
जयगांव के भूटान के गेट के सामने लिंक रोड पर होटल आराम हमारा ठिकाना बना। जयगांव में रहने के लिए किफायती और बेहतरीन जगह है। हमें उन्होने तीसरी मंजिल पर डबलबेड रुम दिया 600 रुपये प्रतिदिन की दर पर. होटल में अच्छा भोजनालय भी है। 
जयगांव फुंटशोलिंग के बारे में हमारे हमारे फेसबुक मित्र बिबेक शाह ने भी काफी जानकारी दी थी। वे हाशिमारा में रहते हैं। पर उनसे इस यात्रा के दौरान मिलना नहीं हो सका। 
( यात्रा मार्ग-  बाघपुल - बागरकोट- उदयबाड़ी- दमदिम- माल बाजार- चालसा- नगरकाटा-लुकसान - बनारहाट- बिनागुड़ी –तेलीपाड़ा- एथलबाड़ी – बीरपाड़ा- मदारीहाट- न्यू हाशीमारा- ओल्ड हाशीमारा- जयगांव )
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmal.com 
     ( BAGH PUL, TEA GARDEN, BIRPARA, MADARIHAT, HASIMARA, JAIGAON, ARAM LODGE )