Wednesday, April 18, 2018

बर्फीली वादियों में मस्ती और जीरो प्वाइंट


युमथांग वैली से चाय नास्ता करने के बाद हमलोग जीरो प्वाइंट की ओर रवाना हुए। आगे जाने के लिए मौसम हमारा साथ दे रहा था। वरना एक दिन पहले आए सैलानी खराब मौसम के कारण युमथांग वैली के पहले से ही लौटा दिए गए थे। सड़क पर बर्फ की मोटी चादर बिछी है। इसको काटते हुए हमारी बुलेरो आगे बढ़ रही है। रास्ते में फौजी भाई मिले जो हमे आगे जाने के इशारा करते हैं। तभी आगे हम देखते हैं कि एक जीप बर्फ में फंस गई है। हम सबने मिलकर धक्का देकर उसे बर्फ से निकाल दिया। हम धीरे धीरे ऊंचाई पर चढ़ रहे हैं। युमथांग घाटी 12,000 फीट की ऊंचाई पर है।


आगे एक शिव मंदिर आया जो 12,800 फीट की ऊंचाई पर है। यहां पर ऊंचाई का बोर्ड लगा हुआ है। इस मंदिर की व्यवस्था सेना ही देखती है। इस मंदिर की ऊंचाई तो चोपता के तुंगनाथ मंदिर से भी ज्यादा है। हो सकता है कि देश का सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में से हो।
 मंदिर के आसपास सेना का अस्थायी शिविर बना हुआ है। शिविर के सारे कैंप भवन बर्फ से ढके हैं। हम जब ऊंचाई पर चढ़ते जा रहे हैं तो नीचे ये बर्फ से ढका शिविर अत्यंत सुंदर दिखाई दे रहा है। 

अब हम चलते चलते 13,700 फीट की ऊंचाई पर आ गए हैं। यहां तीखे मोड़ हैं। सेना ने इस स्थल का नाम दिया है जलेबी प्वाइंट। शायद जलेबी जैसे तीखे मोड़ के कारण ही ऐसा नाम दिया गया है। इसके आगे चलकर हम 14 हजार फीट के आसपास की ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। इस तरह बर्फ का वादियों में सैर करना हमारे और अनादि के लिए पहला अनुभव है। पर हमें यहां कुछ खास ठंड नहीं लग रही है।

थोड़ी और ऊंचाई जाने पर जीरो प्वाइंट से थोड़ा पहले हमारी गाड़ी भी बर्फ में फंसने लगी। सड़क पर बर्फ की परत काफी मोटी हो गई थी। काफी कोशिश के बाद ड्राईवर महोदय ने कहा कि अब इससे आगे गाड़ी नहीं जा सकती। हमलोग अब नीचे उतर गए। उसके बाद पैदल थोड़ी दूर चले। हमने घुटने तक लंबे प्लास्टिक के बूट किराए पर ले  लिए थे। अब इसकी अहमियत समझ में आने लगी। थोड़ी दूर जाने पर सड़क किनारे एक फ्लैट टेबल लैंड दिखा। हम यहां पर उतर कर बर्फ पर चहलकदमी करने लगे। बगल में गहरी नदी की पतली सी धारा नजर आ रही थी। कुछ और वाहनों से भी लोग आ गए थे। उसके बाद शुरू हुआ बर्फ के गोले उड़ाने का खेल।

कुछ लोग बर्फ पर लेट गए तो कुछ लोग बर्फ के गोलों को फुटबाल बनाकर एक दूसरे पर फेंकने लगे। सभी अनजान लोग दोस्त बन गए। और ये खेल कुछ घंटो तक चलता रहा। सबको खूब मजा आया। कुछ लोग स्लो मोशन में वीडियो बनाने में व्यस्त हो गए। सभी अपने अपने तरीके से इस यादगार पल को जी लेना चाहते थे। अपनी यादों में समेट लेना चाहते थे। बर्फ की इतनी हसीन वादियां कई लोग शायद पहली बार देख रहे थे।




कुछ चाय काफी वाले भी तब तक परिदृश्य का हिस्सा बन चुके थे। कुछ चना मसाला बेचने वाले भी। तो उनकी दुकानदारी भी चलने लगी। जब बर्फ से खेलकर जी भर गया तो वापसी की बात सोची गई। तकरीबन 14000 फीट की ऊंचाई से वापसी।
युमथांग घाटी से ऊपर जीरो प्वाइंट का नजारा। 

वापस आने पर युमथांग वैली में एक बार फिर तस्वीरें लेने में हम जुट गए। पटना से आए हनीमून ट्रिप पर आए राजन ने ढेर सारी तसवीरें ली। एक बार फिर हमलोग पहुंचे उसी भूटिया महिला की दुकान पर। महिला बोल पड़ी- समधी जी और दामाद जी वापस आ गए। हमने वहां एक बार फिर चाय पी और मोमोज खाए। अब वापसी। पर जीरो प्वाइंट और युमथांग वैली का ये सफर और यहां गुजारे कुछ घंटे अनमोल बन गए। स्मृतियों के आंगन का अमिट हिस्सा। तो अब चलें।



-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
(YUMTHNAG, ZIRO POINT, LACHUNG VALLY, KATAO, NORTH SIKKIM ) 

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