Thursday, April 12, 2018

लाचुंग वाया डिकचू, मंगन, चुगंथांग- मीठे मीठे झरने हैं...

सुबह 6 बजे जगकर हमलोग 7 बजे तक तैयार हो गए। होटल प्लेजेंट हिल रेसिडेंसी के पैकेज में सुबह का नास्ता शामिल था। 7.30 में हमारे कमरे में आलू पराठे और चाय हाजिर थे। अनादि का फेवरिट डिश पराठा।  वे देखकर खुश हो गए। वैसे हमारा रिपोर्टिंग टाइम 9 बजे है। तो पहले घंटे भर एमजी रोड पर सैर की। इसके बाद हमलोग अपने टूर ऑपरेटर के दफ्तर पहुंचे। वहां से लोकल टैक्सी करके वज्र स्टैंड पहुंचे। वज्र स्टैंड से ही नाथुला और लाचूंग के लिए टैक्सियां चलती हैं। यह गंगटोक के बलुआखानी इलाके में है। एमजी रोड से दो किलोमीटर आगे। वज्रा स्टैंड से कंचनजंगा की धवल चोटियां दिखाई दे रही हैं। वैसे ये चोटियां सिक्किम में कई स्थलों से दिखाई देती हैं। 

थोड़ी देर में हमें टैक्सी का नंबर पता चला (2582)। ड्राईवर 22 साल के नेपाली युवक हैं। बुलेरो गाड़ी में दस लोग बैठते हैं। दो आगे, चार बीच में और चार पीछे। बीच वाली सीट पर मुंबई से आए नौजवान हैं। आगे वाली सीट पर पटना के राजन हैं। उनकी 23 फरवरी को शादी हुई है वे हनीमून ट्रिप पर हैं। पीछे वाली सीट पर कोलकाता के संजीत अपनी पत्नी के साथ हैं। बाकी दो सीट पर मैं और अनादि। जल्दी सहयात्रियों से दोस्ती हो गई। साढ़े दस बजे हमारी गाड़ी अपने सफर पर निकल पड़ी।
हमलोग नेशनल हाईवे नंबर 10 पर चल रहे हैं। हमारा पहला पड़ाव आता है 32 किलोमीटर चलने के बाद डिकचू। डिकचू में तीस्ता नदी का पुल पर गाडी रूकती है। यह एक व्यू प्वाइंट है। यहां से नदी और डिकचू शहर का मनोरम नजारा दिखाई देता है। डिकचू से ही हम पूर्वी सिक्किम जिले को छोड़कर उत्तर सिक्किम में प्रवेश कर जाते हैं।
डिकचू मे तीस्ता नदी के पुल पर। 
56 किलोमीटर चलने के बाद हमलोग लंच के लिए रुके। रंग रंग में चिराग ढाबा के बाहर गाड़ी रुक गई है। बुफे सजा है। शाकाहारी और मांसाहारी दोनों विकल्प है। चावल, दाल, सब्जी की थाली। खाने के बाद आगे का सफर शुरू हुआ। अगला शहर आया मंगन। यह नार्थ सिक्किम जिले का मुख्यालय भी है।
सेवेन सिस्टर्स फॉल – मंगन के आगे ऑन रोड एक विशाल और अतिसुंदर झरना नजर आता है। इसे सेवेन सिस्टर फाल्स के नाम से जाना जाता है। यहां पानी काफी ऊंचाई से बड़ी ही तीव्र गति से गिरता हुआ नजर आता है। लाचुंग जाने वाले सारे सैलानी यहां जरूर रुकते हैं।

यहां फोटो के लिए पर्याप्त मौके हैं। पहाड़ों का सारा पानी तीस्ता नदी में चला जाता है। थोडी देर मस्ती के बाद हमलोग भी आगे बढ़ते हैं। पर ड्राईवर साहब बताते हैं कि इस प्वाइंट के बाद प्लास्टिक की बोतलें प्रतिबंधित हैं। तो हम अपनी बोतलों को यहीं कचरा पेटी के हवाले कर देते हैं। आपके पास थर्मोवेयर वाली या धातु की बोतल है तो आगे ले जा सकते हैं। 
थोड़ी दूर आगे जाने पर चुंगथांग शहर को पार करने के बाद चेक पोस्ट आया। यहां पर लाचुंग घाटी में जाने वाले वाहनों और सैलानियों की जानकारी की एंट्री होती है। हमलोग आगे बढ चले हैं। रास्ता चढ़ाई वाला और थोड़ा खराब मिल रहा है।
भेवमा फाल्स या अमिताभ बच्चन फाल्स  - लाचुंग से कोई 15 किलोमीटर पहले एक और सुंदर झरने से मुलाकात होती है। सडक पर ही बायीं तरफ आया है भेवमा फाल्स। स्थानीय भाषा में भेवमा का अर्थ लाल सांप से है। इसे लोग लाचुंग फाल्स भी कहते हैं। काफी लोग इसे अमिताभ बच्चन फाल्स भी कहते हैं। शायद इसकी लंबाई के कारण ऐसा कहा जाता होगा। यह झरना तीन चरणों में दिखाई देता है। यहां 275 फीट से ज्यादा ऊंचाई से पानी गिर रहा है। यहां अंदर जाकर झरने को करीब से देखने के लिए 20 रुपये का टिकट भी है। अभी शाम नहीं गहराई है तो हम इस झरने का भी नजारा कर सके हैं। रुकते रुकते कोई सात घंटे के सफर के बाद हमारी मंजिल आ गई है। 125 किलोमीटर चलकर हमलोग लाचुंग शहर में पहुंच चुके हैं। अंधेरा गहरा चुका है। पर लाचुंग बाजार की दुकानों में जल रही नन्ही मोमबत्तियां हमारा स्वागत कर रही हैं।
- vidyutp@gmail.com

( मार्ग – गंगटोक- डिकचू- रंग रंग- मंगन- मनूल, थेंग – चुंगथांग- भेवमा फाल्स – लाचूंग घाटी। GANGTOK, DIKACHU, RANGRANG, MANGAN, CHUNGTHANG, SEVEN SISTER FALLS, BHEWMA FALLS )