Monday, April 16, 2018

लाचुंग वाया डिकचू, मंगन, चुगंथांग- मीठे मीठे झरने हैं...

गंगटोक में सुबह  छह बजे जगकर हमलोग सात बजे तक तैयार हो गए। होटल प्लेजेंट हिल रेसिडेंसी के पैकेज में सुबह का नास्ता शामिल था। सुबह 7.30 में हमारे कमरे में आलू पराठे और चाय हाजिर थे। अनादि का फेवरिट डिश है पराठा।  वे देखते ही खुश हो गए। पराठे  उन्हें इतने अच्छे लगे कि एक पराठा आग्रह करके  उन्होंने रास्ते के लिए पैक भी करवा लिया है।


वैसे   हमारा रिपोर्टिंग टाइम नौ बजे है। तो पहले घंटे भर हमने एमजी रोड पर सैर की। इसके बाद हमलोग अपने टूर ऑपरेटर के दफ्तर पहुंचे। वहां से लोकल टैक्सी करके वज्र स्टैंड पहुंचे। वज्र स्टैंड से ही नाथुला और लाचुंग के लिए टैक्सियां चलती हैं। यह गंगटोक के बलुआखानी इलाके में है। एमजी रोड से दो किलोमीटर आगे। वज्रा स्टैंड से कंचनजंगा की धवल चोटियां दिखाई दे रही हैं। वैसे ये चोटियां सिक्किम में कई स्थलों से दिखाई देती हैं। 

थोड़ी देर में हमें टैक्सी का नंबर पता चला (2582)। पर विशाल टैक्सी स्टैंड में अपनी टैक्सी की तलाश में काफी मुश्किल पेश आई। ड्राईवर 22 साल के नेपाली युवक हैं। बुलेरो गाड़ी में दस लोग बैठते हैं। दो आगे, चार बीच में और चार पीछे। बीच वाली सीट पर मुंबई से आए चार नौजवान हैं। आगे वाली सीट पर पटना के राजन हैं। उनकी 23 फरवरी को शादी हुई है वे हनीमून ट्रिप पर हैं। पीछे वाली सीट पर कोलकाता के संजीत अपनी पत्नी के साथ हैं। बाकी दो सीट पर मैं और अनादि। जल्दी सहयात्रियों से दोस्ती हो गई। 
डिकचू मे तीस्ता नदी के पुल पर। 
साढ़े दस बजे हमारी गाड़ी अपने सफर पर निकल पड़ी। हमलोग नेशनल हाईवे नंबर 10 पर चल रहे हैं। हमारा पहला पड़ाव आता है 32 किलोमीटर चलने के बाद डिकचू। डिकचू में तीस्ता नदी का पुल पर गाडी रूकती है। यह एक व्यू प्वाइंट है। यहां से नदी और डिकचू शहर का मनोरम नजारा दिखाई देता है। डिकचू से ही हम पूर्वी सिक्किम जिले को छोड़कर उत्तर सिक्किम में प्रवेश कर जाते हैं।


रंग-रंग में लंच - करीब 56 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद हमलोग लंच के लिए रुके। रंग-रंग नामक जगह में चिराग ढाबा के बाहर गाड़ी रुक गई है।  नाम कितना सुंदर है ना  रंग रंग। यानी ढेर सारे रंग। यहां चिराग ढाबा में बुफे सजा हुआ है। खाने के लिए शाकाहारी और मांसाहारी दोनों विकल्प मौजूद हैं। चावल, दाल, सब्जी की थाली।


नार्थ सिक्किम का मुख्यालय  है मंगन -  सुस्वादु भोजन के बाद आगे का सफर शुरू हुआ। अगला शहर आया मंगन। मंगन छोटा सा शहर है। यह नार्थ सिक्किम जिले का मुख्यालय भी है। मंगन शहर की आबादी  महज पांच हजार के आसपास  है।  आजकल इस  इलाके में आर्गेनिक फार्मिंग जमकर हो रही है। 

सेवेन सिस्टर्स फॉल – मंगन के आगे चलने पर सड़क के किनारे ही एक विशाल और अति सुंदर झरना नजर आता है। इसे सेवेन सिस्टर फॉल्स के नाम से जाना जाता है। छोटे बड़े सात  झरनों के कारण ये नाम मिला है। यहां पानी काफी ऊंचाई से बड़ी ही तीव्र गति से गिरता हुआ नजर आता है। लाचुंग जाने वाले सारे सैलानी यहां जरूर रुकते हैं।



यहां फोटो के लिए पर्याप्त मौके हैं। पहाड़ों का सारा पानी तीस्ता नदी में चला जाता है। थोडी देर मस्ती के बाद हमलोग भी आगे बढ़ते हैं। 
थोड़ी दूर आगे जाने पर चुंगथांग शहर को पार करने के बाद चेक पोस्ट आया। यहां पर लाचुंग घाटी में जाने वाले वाहनों और सैलानियों की जानकारी  को रजिस्टर में दर्ज किया  जाता है।  एंट्री प्रक्रिया के बाद हमलोग आगे बढ चले हैं। 


प्लास्टिक की बोतलें प्रतिबंधित  -  ड्राईवर साहब बताते हैं कि चेकपोस्ट के इस प्वाइंट के बाद आगे प्लास्टिक की बोतलें प्रतिबंधित हैं। तो हम अपनी बोतलों को यहीं कचरा पेटी के हवाले कर देते हैं। आपके पास थर्मोवेयर वाली या धातु की बोतल है तो आगे ले जा सकते हैं।   यह बहुत   अच्छी कोशिश है पर्यावरण को बचाने के लिए।   पूरी लांचुग घाटी को  प्लास्टिक  मुक्त करने की कवायद है।  हमें अब आगे   रास्ता चढ़ाई वाला और थोड़ा खराब मिल रहा है।
भेवमा फॉल्स यानी अमिताभ बच्चन फॉल्स    
लाचुंग से कोई 15 किलोमीटर पहले एक और सुंदर झरने से मुलाकात होती है। सडक पर ही बायीं तरफ आया है भेवमा फाल्स। स्थानीय भाषा में भेवमा का अर्थ लाल सांप से है। इसे लोग लाचुंग फॉल्स भी कहते हैं। पर काफी लोग इसे अमिताभ बच्चन फॉल्स  के नाम से पुकारते हैं। शायद इसकी लंबाई के कारण ही ऐसा कहा जाता होगा। यह झरना तीन चरणों में दिखाई देता है। यहां 275 फीट से ज्यादा ऊंचाई से लगातार पानी गिर रहा है। यहां पर अंदर जाकर झरने को एक  प्लेटफार्म पर खड़े होकर करीब से देखने के लिए 20 रुपये का टिकट भी है। अभी शाम नहीं गहराई है तो हम इस झरने का भी खूब नजारा कर सके हैं।


सुबह  10 बजे गंगटोक से चलने के बाद रास्ते में रुकते-रुकते कोई सात घंटे के सफर के बाद हमारी मंजिल करीब आ गई है। करीब 125 किलोमीटर चलकर हमलोग लाचुंग शहर में पहुंच  रहे  हैं। पर ये दिन भर का सफर यादगार रहेगा। अंधेरा गहराने लगा है। पर लाचुंग बाजार की दुकानों में जल रही नन्ही मोमबत्तियां हमारा स्वागत कर रही हैं। 
-विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com

( मार्ग – गंगटोक- डिकचू- रंग रंग- मंगन- मनूल, थेंग – चुंगथांग- भेवमा फाल्स – लाचूंग घाटी। GANGTOK, DIKACHU, RANGRANG, MANGAN, CHUNGTHANG, SEVEN SISTER FALLS, BHEWMA FALLS )

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