Sunday, March 18, 2018

उज्जयंत पैलेस के चारों कोनों पर चार मंदिर

अगरतला के राजमहल उज्जयंत पैलेस की खास बात है कि इसके चारों कोने पर चार मंदिर बने हैं। अगरतला के राजा बड़े ही धार्मिक प्रवृति के रहे हैं। इसलिए वे जहां भी रहे उन्होंने अपने महल के आसपास सुंदर मंदिरों का निर्माण जरूर कराया। हालांकि वे जातिगत दृष्टि से देखें तो जनजातीय समाज (आदिवासी) वर्ग से आते हैं। पर हिंदू धर्म में उनकी रूचि उदयपुर, पुराना अगरतला और नए अगरतला में हर जगह दिखाई देती है। उनकी राजधानी जिस कालखंड में जहां भी रही उन्होने सुंदर मंदिर और विशाल सरोवर का निर्माण कराया।
उज्जयंत पैलेस के मुख्यद्वार के सामने भी दो विशाल सरोवर हैं। महल के चारों कोने पर चार मंदिर देखे जा सकते हैं। अब ये चारों मंदिर राजधानी अगरतला के प्रमुख मंदिर गिने जाते हैं। ये चार मंदिर हैं – लक्ष्मीनारायण बाड़ी, काली बाडी, जगन्नाथ बाड़ी और दुर्गा बाड़ी।
लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम पर किले से होकर गुजरती एक सड़क है जिसका नाम ही लक्ष्मीनारायण बाड़ी रोड है। इनमें ज्यादातर मंदिरों की बाहरी दीवारें सफेद रंग की हैं। मंदिर का भवन भी सफेद रंग का है। जो उज्जयंत पैलेस से साम्यता रखता है। सफेद रंग के कारण उज्जयंत पैलेस को श्वेत महल के नाम से भी जाना जाता है।
लक्ष्मीनारायण बाड़ी - लक्ष्मीनारायण बाड़ी किले के मुख्यद्वार के दायीं तरफ स्थित है। इसकी दीवारें सफेदी लिए हुए हल्के नीले रंग की हैं। मंदिर के मुख्यद्वार पर लक्ष्मी के सवारी उल्लू की दो विशाल प्रतिमाएं स्थापित है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा वीरेंद्र किशोर माणिक्य बहादुर ने 1909 से 1923 के बीच अपने शासन काल के दौरान कराया था। इस मंदिर का निर्माण उन्होंने 1910 में अपने पिता महाराजा राधाकिशोर माणिक्य देव की याद में करवाया था। इस मंदिर में कुल 14 देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।




जगन्नाथ जी का मंदिर - उज्जयंत पैलेस के पास स्थित जगन्नाथ जी का मंदिर चैतन्य गोड़ीय मठ के अधीन है। इस मंदिर के अंदर एक छोटा सा सरोवर है। मंदिर में प्रवेश करने के बाद आपको कृष्ण लीला से जुडी अदभुत और मनोरम झांकियां देखने को मिलेंगी। यहां कृष्ण का जन्म उनका बचपन और कृष्ण से जुडी अन्य कथाओं को झांकियों में देखा जा सकता है।
मंदिर परिसर में एक गौशाला भी है। इस सुव्यवस्थित मंदिर में अतिथि निवास भी बना है। परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालुओं के रहने के लिए यहां अच्छी संख्या में कमरे बने हुए हैं। जगन्नाथ मंदिर के सभी विग्रह और झांकियों को देखने के लिए आपको कम से कम एक घंटे का वक्त निकालना होगा।
मां दुर्गा की पूजा तो पूरे बंगाल में होती है, इसलिए जब चार मंदिर बने हैं तो उसमें एक मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है, तो दूसरा उनके ही दूसरे रूप मां काली को समर्पित है। इन सभी मंदिरों को राजकीय महत्व का दर्जा दिया गया है और उनकी व्यवस्था राज्य सरकार देखती है।

दो क्रांतिकारियों की प्रतिमाएं - उज्जयंत पैलेस के मुख्य द्वार के सामने लॉन में अब दो प्रसिद्ध क्रांतिकारियों की प्रतिमा स्थापित की गई है। एक तरफ खुदीराम बोस की प्रतिमा की स्थापना की गई है तो दूसरी तरफ महान क्रांतिकारी सूर्योसेन की प्रतिमा स्थापित की गई है।
अपनी 2013 की अगरतला यात्रा के दौरान मैंने उज्जयंत पैलेस का भ्रमण किया था और इसके संग्रहालय को देखा था। इसलिए इस बार संग्रहालय के अंदर नहीं जा रहा हूं। तो अब चलें वापस।


-        विद्युत प्रकाश मौर्य 
( UJJYANT PALACE, FOUR TEMPLES, LAXMINARAYAN BARI, DURGA BARI, KAL IBARI )