Monday, March 26, 2018

राधाकृष्ण की मोहक मूर्ति - बिरला मंदिर कोलकाता


बिरला परिवार द्वारा देश के कई शहरों में बिरला मंदिर का निर्माण कराया गया है। ये मंदिर अत्यंत सुंदर और सुरूचिपूर्ण हैं। कोलकाता का बिरला मंदिर बॉलीगंज में स्थित है। यह कोलकाता का संभ्रांत इलाका गिना जाता है। बॉलीगंज मुख्य सड़क पर क्विंस पार्क के पास ये मंदिर स्थित है।
अगर देश के शेष बिरला मंदिरों से तुलना करें तो यह एक नया मंदिर है। इसका निर्माण 1970 में आरंभ हुआ। 21 सालों तक निर्माण कार्य चलता रहा। मंदिर 21 फरवरी 1996 को पूरी तरह तैयार होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। मंदिर के मुख्य गुंबज की ऊंचाई 166 फीट है। मंदिर 44 कट्ठा के विशाल परिसर में बना है।मंदिर में तीन विशाल गुंबद हैं जो दूर से भी देखने में काफी सुंदर प्रतीत होते हैं। रात रोशनी में तो मंदिर का सौंदर्य और भी निखर जाता है।
इस मंदिर में मुख्य गर्भ गृह में राधाकृष्ण की बड़ी ही मनोरम प्रतिमा है। इसके एक तरफ महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा स्थापित की गई है। वहीं दूसरी तरफ महादेव शिव का मंदिर है। मंदिर के निर्माण में परंपरागत भारतीय वास्तुकला का पूरा ख्याल रखा गया है। इसके शिखर विशाल हैं। मंदिर परिसर में दाहिनी तरफ गणेश जी का मंदिर है। इस मंदिर की प्रमुख विशेषता है परिसर में दशावतार मंदिर। यहां विष्णु के सभी दस अवतारों के दर्शन आप एक साथ कर सकते हैं। मंदिर का भव्य और साफ सुथरा परिसर मन मोह लेता है। पूरब रूख का होने के कारण सुबह के सूरत की किरणें मंदिर परिसर में पड़ती हैं। मंदिर की दीवारों पर गीता के श्लोक और उससे जुड़े चित्र उकेरे गए हैं।

इसके निर्माण के लिए आगरा, मिर्जापुर और मुजफ्फरपुर से शिल्पी बुलाए गए थे। मंदिर के निर्माण में मोतियों के रंग के सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर की आंतरिक सज्जा में बेल्जियम के ग्लास का भी इस्तेमाल किया गया है। इसका डिजाइन वास्तुविद नोमी बोस ने तैयार किया था।
मंदिर परिसर में मंदिर के निर्माता बिरला परिवार के प्रमुख सदस्य कृष्ण कुमार बिरला और मनोरमा देवी बिरला की प्रतिमा भी लगी है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर जूता घर बना है। मंदिर परिसर के अंदर फोटोग्राफी निषेधित है।
खुलने का समय – मंदिर सुबह 5.30 बजे से 11 बजे तक खुलता है। फिर शाम को यह 4.30 बजे से रात्रि 9 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। आमतौर पर मंदिर में ज्यादा भीड़ नहीं होती। जन्माष्टमी पर मंदिर में विशेष सजावट होती है।
कैसे पहुंचे – कोलकाता के किसी भी कोने से बॉलीगंज के लिए सिटी बसें मिल जाती हैं। यहां आप ट्राम से भी पहुंच सकते हैं। मंदिर के सामने सड़क से ट्राम गुजरती रहती है। मंदिर गरिया घाट और पार्क सर्कस के बीच आशुतोष चौधरी एवेन्यू पर स्थित है।
दिल्ली, भोपाल, हैदराबाद, पटना के मंदिर मैं देख चुका था। इस बार कोलकाता के बिरला मंदिर को  देखने का मौका मिला। सुबह का समय था मंदिर में जाकर कुछ वक्त गुजरना बड़ा आनंददायक रहा। अब बिरला मंदिर कोलकाता आने वाले सैलानी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में बिरला मंदिर भी पहुंचते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  ईमेल - vidyutp@gmail.com
(BIRLA TEMPLE, KOLKATA)