Friday, March 23, 2018

समवार में उबलकर मिट्टी की प्याली में छलकती चाय

कोलकाता के लार्ड विलियम 
बेंटिक स्ट्रीट पर रात को घूमते हुए अचानक एक चाय की दुकान दिखाई दे जाती है।यहां मिट्टी के कप में चाय मिल रही है। यहां पर दो रेट की चाय है। बड़े कप में 10 रुपये की और छोटे कप में तीन रुपये की। तीन रुपये की चाय वह भी महानगर में अब कहां मिलती है। पर जनाब कोलकाता में मिल रही है। वह भी चाय तांबे के विशाल समवार में बन रही है। यह चाय बनाने का सबसे पुराना तरीका है। मैंने दक्षिण भारत के कई शहरों सोमवार में चाय बनते देखा है पर कोलकाता में पहली बार देख रहा हूं।
टंकी वाली चाय- कोलकाता में लोग प्यार से इसे टंकी वाली चाय कहते हैं। चाय पीकर आनंद आ गया। कोलकाता यूं ही आम आदमी का शहर नहीं है। पर इस टंकी वाली चाय के दीवाने दूर दूर तक के लोग हैं। सुबह छह बजे से लेकर रात के 10 बजे तक यहां लोग चाय पीने आते हैं। आसपास के कई दफ्तर लोग भी इसी दुकान से चाय मंगाना पसंद करते हैं। भले थोड़ा थोड़ा इंतजार करना पड़े पर वे कहीं और नहीं जाना चाहते। 

कोलकाता के बेंटिक स्ट्रीट पर ये चाय की दुकान सत्तर साल से ज्यादा पुरानी है। पचास से दशक में यानी आजादी के तुरंत बाद यूपी के आजमगढ़ से आए भृगुनाथ सिंह ने बेंटिंक स्ट्रीट पर बेरीवाला बिल्डिंग में ये चाय की दुकान शुरू की। तब से लेकर अब तक इस दुकान में कुछ नहीं बदला। वही तांबे का समवार और चाय का वही पुराना स्वाद। खालिस भैंस के दूध में उबलती ईमानदार चाय। 
इसके कद्रदानों की कई पीढ़ियां बदल गई हैं। तो दुकान के स्वामित्व में भी कई बदलाव हुए हैं। भृगुनाथ सिंह के बाद कई साल तक इस दुकान को उनके छोटे भाई झूरी सिंह ने चलाया। 
पीढ़ियां बदली पर स्वाद नहीं बदला -  साल 1970 के आसपास भृगुनाथ सिंह के बेटे प्रमोद कुमार सिंह ने चाय की इस दुकान को अपने स्वामित्व में लिया। प्रमोद जी  काशी हिंदू विश्वविद्यालय से एलएलबी कर रहे थे। पर ऐन वक्त पर पढ़ाई बीच में छोड़कर कोलकाता आकर इस पारिवारिक कारोबार को संभाला।  प्रमोद कुमार जी कोलकाता के पूर्वांचल समाज के लोकप्रिय नेताओं में से थे। साल 2018 में उनके निधन के बाद आजकल इस दुकान को महेंद्र यादव चला रहे हैं। पर दुकान का स्वामित्व प्रमोद जी के बेटे मोनेंद्र मोहन सिंह के पास है। बात इस तांबे के समवार की। मोनेंद्र बताते हैं कि मैंने जब से होश संभाला है उस समवार को यूं ही देख रहा हूं।


 बेंटिक स्ट्रीट पर सुबह सुबह ही चाय के कद्रदानो की भीड़ लग जाती है। यहां कई बार तो लोगों को एक कप चाय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ जाता है। कई सालों से चाय की कीमत में भी इजाफा नहीं हुआ है। आज भी छोटी चाय तीन रुपये की तो बड़ी चाय दस रुपये में मिट्टी के कप में मिलती है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य-  vidyutp@gmail.com 
(SAMWAR TEA, MILK,  BENTIC STREET KOLKATA, PRAMOD KUMAR SINGH ) 

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