Tuesday, March 13, 2018

नीरमहल – त्रिपुरा के ताजमहल की ओर

अगरतला बस स्टैंड से बट्टला के लिए बैटरी रिक्शा पर बैठ गया। एक बार फिर हरिगंगा बसाक रोड पर उसी राज पैलेस होटल में ही पहुंचा, जहां 2013 में भी ठहरा था। होटल को फोन पर अपने आने की सूचना दे दी थी। पर वे बोले सिंगल बेडरूम खाली नहीं है। मैंने उन्हें याद दिलाया कि मैंने तो फोन किया था। उन्होने कहा चलिए आपको सिंगल के ही रेट में डबल बेडरूम दे देते हैं। मैं 212 नंबर कमरे में पहुंच गया हूं। होटल से निकल कर मैं थोड़ी पेटपूजा के लिए निकल पड़ा। बट्टला चौराहे पर इस बार फ्लाईओवर का निर्माण कार्य जारी है।


बट्टला चौराहे पर कई होटल हैं। खासतौर पर चिकेन पुलाव वाले। चिकेन पुलाव के अलावा कई मांसाहारी बजट रेस्टोरेंट और मिठाईयों की दुकानें भी हैं। यहां ज्यादातर रेस्टोरेंट में लोग खुलेआम शराब पीते देखे जाते हैं। हालांकि कोई पीकर बहकता हुआ नहीं दिखाई देता। साथ ही यहां बड़ा बाजार है बांग्लादेश निर्मित कपड़ों का। थोड़ा समय है तो मैं कपड़ों के बाजार से होता हुआ अगरतला के सब्जी बाजार और पंसारी बाजार का मुआयना भी कर लेता हूं। कुछ घंटे घूमने के बाद एक होटल में पुलाव खाने के बाद होटल लौट आया। 
अगली सुबह नीरमहल के लिए निकल पड़ा हूं। बट्टला के पास ही हावड़ा नदी को पार करके नगरजल बस स्टैंड से मेलाघर, सोनमुड़ा जाने वाली बस में बैठ गया। अगरतला से नीरमहल (मेलाघर) की दूरी 48 किलोमीटर है। सुबह अच्छी ठंड है। बस में बैठने से पहले एक कप चाय। पांच रुपये की एक कप चाय। मुझे याद आ रहा है महाराष्ट्र में 2013 में ही 10 रुपये की चाय बिकने लगी थी। बस चलने पर देखता हूं  बदरघाट सिद्धी आश्रम के आसपास अखौरा (बांग्लादेश) को जोड़ने के लिए रेलवे लाइन का निर्माण कार्य जारी है।
हमारी बस सबरूम हाईवे पर सरपट दौड़ रही है। सड़क को फोर लेन करने का काम तेजी से जारी है। विश्रामगंज बाजार से बस रास्ता बदल लेती है मेला घर के लिए। बैरागी बाजार के बाद सुबह के 7 बजे मैं मेलाघर में उतर गया। बस स्टैंड के आसपास देख रहा हूं कि  यहां अच्छा खासा बाजार है। पर सुबह सुबह दुकानें नहीं खुली हैं। यहां से नीरमहल का रास्ता पूछकर पैदल चल पड़ा।  मुख्य सड़क पर दाहिनी तरफ एक प्रवेश द्वार बना है और आगे सड़क चलती जा रही है। एक किलोमीटर चलने पर रुद्रसागर झील के किनारे पहुंच गया हूं। पर सुबह सुबह कुहरा इतना है कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।


मेलाघर के घाट पर नीरमहल के लिए टिकट और नाव से जाने की दरें लिखी हैं। शेयरिंग बोट पर 30 रुपये प्रति सवारी और आरक्षित बोट 250 रुपये की है। इस बोट में भी 10 सवारियां जा सकती हैं। पर मुझे न कोई सैलानी न कोई जाने को तैयार बोट दिखाई दे रही है। कुहरे के कारण  मुझे कहीं नीरमहल भी नहीं दिखाई दे रहा है। मैं मन ही मन सोच रहा हूं। अब शायद यहीं से वापस लौटना पड़ेगा। तो मैं कुछ तसवीरें लेकर वहां कुछ देर गुजारने के बाद वापस लौटने की सोचने लगता हूं। तभी एक सज्जन आते हैं और पूछते हैं नीरमहल देखने चलना है क्या। मैं हां बोलता हूं। तो 250 रुपये में आरक्षित बोट की बात दुहराते हैं। मैं अकेला हूं पर आरक्षित बोट के लिए हां कर देता हूं। और हम चल पड़े हैं अब नीरमहल की ओर। कुहरे को चिरती हुई नाव रुद्रसागर झील में चल पड़ी है।
नाव से चलते हुए कुहरा छंटने पर नीरमहल का पहला दीदार। 
37 साल के नाविक संजीव बर्मन बताते हैं कि आप थोड़ा जल्दी आ गए हैं। यहां सुबह 9 बजे के बाद रोज अच्छी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। मैं अपनी पिछली त्रिपुरा यात्रा में नीरमहल नहीं पहुंच पाया था। इसलिए इस बार यह प्राथमिकता सूची में था। थोड़ी देर पहले नीरमहल नहीं देखपाने के मलाल था, पर अब ये हशरत पूरी होने जा रही थी। पर ये नीरमहल है क्या। अरे जनाब ये त्रिपुरा का ताजमहल है। या मैं तो यों कहूं कि ये ताजमहल से भी ज्यादा रुचिकर और शानदार है। तो आप त्रिपुरा आए और नीरमहल नहीं देखा तो क्या देखा।  (जारी...)
-        विद्युत प्रकाश मौर्य 
( NEERMHAL, MELAGHAR, TRIPURA, AGARTALA )