Monday, March 5, 2018

मैंने कहा न, कछार में बहुत झमेला है...

सिलचर-अगरतला पैसेंजर बदरपुर जंक्शन से आगे बढ़ चली है। हमारे सामने वाली सीट पर बैठी मौसमी राय के संग बातों का सिलसिला चल पड़ा है। उनके पति बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वे वहीं रहती हैं। पर साल में एक बार अपने गांव आती हैं। सिलचर में उनके बहुत से रिश्तेदार हैं। आगे करीमगंज जिले के कनाई बाजार के पास में उनका गांव है। कुछ दिन सिलचर में गुजारने के बाद अपनी प्यारी सी बिटिया को लेकर अब गांव जा रही हैं। रास्ते में बदरपुर और करीमगंज में उनके रिश्तेदार स्टेशन पर मिलने आ रहे हैं। हालांकि कई साल से दक्षिण भारत के शहर बेंगलुरु में रह रही मौसमी रॉय को कछार पसंद नहीं है। कहती हैं...कछार में बहुत झमेला है। भला क्यों... कहतीं हैं भले मेरी मातृभूमि है पर मुझे कछार इलाका पसंद नहीं।


इस बार तो काफी कफा हैं वे असम में भाजपा की नई सरकार और उसके मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से। ये नई बला एनआरसी आ गई है। मतलब नेशनल रिकॉर्ड ऑफ सिटिजन्स। इसकी पहली सूची हाल में प्रकाशित हुई है। उसके बाद से पूरे असम में बवाल मचा हुआ है। हर किसी को सूची में अपना और अपने परिवार के सभी सदस्यों का नाम चेक करना है। नाम नहीं होने पर वह असम का वासी नहीं माना जाएगा। अब मौसमी का नाम उस सूची में नहीं है।
काफी पढ़ी लिखी और बिंदास मौसमी कहती हैं कि सुना है कि सरकार हमारी जमीन से हमें बेदखल कर देगी। मैं आपको यूं ही नहीं कह रही हूं कि कछार में बहुत झमेला है। पहली सूची में पिता का नाम है तो बेटे का गायब है। कहीं पत्नी का नाम है तो पति का गायब है।

वे कहती हैं, एनआरसी बनाई जा रही है बंग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए, पर इसने तो सारे असम को लोगों को परेशान कर रहा है। हालांकि सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया है कि घबराएं नहीं कोई भी असमवासी इसका शिकार नहीं होगा। पर 40 साल से असम में रह रहे यूपी-बिहार के लोग भी इस नए बवाल से घबराए हुए हैं।
ट्रेन रुपसबाड़ी और चारगोला को पारकर करीमगंज पहुंच गई है। करीमगंज में ट्रेन का इंजन रिवर्स होता है। तो यहां पर आधे घंटे का ठहराव है। पर अब शहर से बाहर नया स्टेशन न्यू करीमगंज बनाया जा रहा है। इसके बाद इंजन को रिवर्स करने की जरूरत नहीं रह जाएगी।
मौसमी रॉय की एक नन्ही सी बिटिया भी है। उसे हर थोड़ी देर पर कुछ खाने को चाहिए। हमलोग कुछ बिस्कुट साझा करके खाते हैं। इसके बाद फोंफी भी खाते हैं। ट्रेन में लगातार खाने-पीने की चीजें बेचने वाले आ रहे हैं। मौसमी राय की बर्थ तो करीमगंज तक ही कनफर्म है, पर उन्हे जाना कनाई बाजार तक है। वे परेशान हैं, आगे कुछ घंटे के सफर के लिए। पर उनकी समस्या का समाधान हो जाता है।
तो नीलम बाजार, कायस्थ ग्राम जैसे स्टेशन पीछे छूट रहे हैं। बारइग्राम जंक्शन आ गया है। इसके बाद कनाई बाजार में मौसमी रॉय और उनका कुनबा उतर जाता है। वे जाते हुए मुझे बाय-बाय करके जाती हैं। इतने खूबसूरत मुसाफिर का साथ कुछ देर और रहता तो अच्छा था। खैर अब मैं खिड़की से हरे भरे असम के नजारे देखने लगता हूं।
कनाई बाजार जहां मौसमी राय का गांव है....
हरे-भरे धान के खेत, खेतों में काम करते लोग, पहाड़ों की तलहटी में अलसाए से जंगल, छोटे-छोटे पोखर, पोखर में कलरव करते पंछी। पोखर के साथ लगे लोगों के घर, घर में काम करती महिलाएं। हरियाली के बीच असमिया मंदिर।
छोटी-छोटी नदियों के पुल को पार कर ट्रेन आगे बढ़ती जा रही है। अगला स्टेशन है पाथरकांडी। इसके बाद अब आ गया तिलभूम असम का आखिरी स्टेशन। इसके बाद चुरई बाड़ी से त्रिपुरा शुरू हो जाता है। एक बार फिर हमारी रेलगाड़ी त्रिपुरा में प्रवेश कर चुकी है। पर इसकी चाल कुछ अलसाई हुई सी है। चुरई बाड़ी से छह किलोमीटर आगे नदियापुर नामक छोटा सा स्टेशन आया, इसके बाद धर्मनगर जो त्रिपुरा का पहला बड़ा रेलवे स्टेशन है। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
( CACHAR, NRC, ASSAM, KARIMGANJ ,CHURAI BARI, DHARMNAGAR) 
और शुरू हो गया हरा भरा त्रिपुरा...

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