Sunday, April 1, 2018

तालबेहट - बेतवा का प्यार और माताटीला डैम


फरवरी में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल होने के लिए तालबेहट जाने का मौका मिला। तालबेहट उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में झांसी से 40 किलोमीटर आगे छोटा सा शहर है। तालबेहट राजा मर्दन सिंह की रियासत हुआ करता था, जो 1857 के विद्रोह में झांसी की रानी के साथ ब्रिटिश फौज के खिलाफ लड़े।
गोंड़ की लोकभाषा में 'बेहट' या 'बीहट' गांव को कहा जाता है। ललितपुर जनपद के अनेक गांवों में बनी बावलियां अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। गोंड़ काल की यह बावलियां जलस्रोत का कार्य करती रहीं।  तालबेहट तहसील में अदरक का अधिक उत्पादन होता है। यहां का अदरक महाराष्ट्र गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं दक्षिण भारत के प्रांतों तक भेजा जाता है।

तालबेहट में आकर नहीं लगता कि आप यूपी में है। बेतवा नदी के गोद में बसा ललितपुर जिले का छोटा सा कस्बा काफी अलग दिखता है। दिन भर के कार्यक्रम से फारिग होने के बाद शाम को हमलोग बस स्टैण्ड के पास स्थित लोक निर्माण विभाग के इंस्पेक्शन बंगला में पहुंचे। ये बंगला 1902 का बना हुआ है। एक मंजिल की इमारत दो मंजिल के मकान के बराबर ऊंची है। आसपास के बाजार में टहलने निकलता हूँ । समोसा दस रुपये का तीन मिल रहा है। मतलब सस्ता बाजार है। इन दिनों तालबेहट में कई जैन मुनि पधारे हुए हैं। उनकी विशाल होर्डिग लगी हुई है। वापस निरीक्षण भवन में पहुंचता हूं तो मुझे प्रो. रामायण कहते हैं कि आपके ठहरने का इंतजाम माताटीला डैम के वीआईपी गेस्टहाउस में किया गया है। मैं और प्रो कमलेंद्र कुशवाहा एक जीप में चल पड़े माताटीला के लिए। हां रास्ते में रात्रि भोजन के लिए कॉलेज में रुके। शाकाहारी सुस्वादु भोजन। तवे पर बनती गर्म गर्म रोटियां औ उस पर लगी घी। खाकर मन तृप्त हो गया।
तालबेहट बाजार से माताटीला की दूरी 13 किलोमीटर है। रास्ते में तालबेहट का कैंटोनमेंट इलाका आता है। प्रवेश और निकास द्वार पर हर वाहन की जांच होती है। झांसी, बबीना और तालबेहट इन तीनों की स्थलों पर सेना का कैंटोनमेंट इलाका है।
हमारी जीप कैंटोनेंट इलाका पार करके तालबेहट के विशाल सरोवर के साथ लगी सड़क से होकर गुजरती है। बेतवा नदी पर बांध के बाद यहां विशाल रिजरवायर बन गया है। हमलोग माताटीला डैम के वीआईपी गेस्ट हाउस में पहुंच गए हैं। इस अतिथिगृह में तीन बड़े कमरे हैं। रिसेप्शन एरिया और रसोई घर और डायनिंग रुम भी है।
गेस्ट हाउस के चारों तरफ जंगल है। हमलोग रात में थोड़ी देर जंगल में टहलने के बाद गप्पे लड़ाते हुए सो जाते हैं। पर मैं अगली सुबह जल्दी उठता हूं। गेस्ट हाउस के बाहर खूबसूरत फूलों को उद्यान है। इसमें गेंदा, गुलाब और किस्म किस्म के फूल खिले हैं। इन फूलों के संग थोड़ा वक्त गुजारने के बाद हमलोग टहलने निकल पड़ते हैं।
यह संयोग ही है कि हम जिस माताटीला गेस्ट हाउस में ठहरे हैं इसी में छह दिसंबर 1992 के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जी को नजरबंद करके कुछ दिनों के लिए रखा गया था।

अतिथि गृह से आधा किलोमीटर आगे देवी मंदिर है। ये मंदिर है माता श्री मालिनी देवी का। मालिनी देवी के मंदिर के नाम पर ही इस स्थल का नाम पड़ा है माताटीला। टीला मतलब पहाड़ी और उस पर माता का मंदिर। ये मंदिर लोग काफी पुराना बताते हैं। पर अब कैंटोनमेंट इलाके के सैन्य अधिकारियों ने समय समय पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया है। मंदिर के प्राचीर से आसपास का नजारा बड़ा मनोरम दिखाई देता है। मंदिर में प्रवेश के मुख्य द्वार के अलावा जंगलों के बीच से सीढियों वाला रास्ता भी है। पर इस रास्ते पर बंदर बहुत हैं। तनिक सावधान रहिएगा।


हमलोग आगे बढ़ते हैं तकरीबन एक किलोमीटर आगे चलने के बाद हमलोग बेतवा नदी के किनारे पहुंच गए हैं। नदी की गहराई ज्यादा नहीं है पर पानी का बहाव तेज है।   
नदी के मार्ग में ढेर सारे पत्थरों के छोटे बड़े टीले हैं। बेतवा बलखाती हुई इन टीलों के संग प्रेमालाप करती आगे बढ़ती है। और ये पत्थर भी ना बेतवा का प्यार पाकर निहाल हुए जा रहे हैं। हों भी क्यों न भला बेतवा जल है ही इतना निर्मल। प्रदूषण मुक्त । कल कल छल छल...पारदर्शी।

सामने दूर रेल का पुल नजर आता है। नदी के उस पार मध्य प्रदेश राज्य है। पीछे की ओर बेतवा नदी पर विशाल बांध बना है- माताटीला डैम। बांध में कुल 20 दरवाजे हैं, पर उनमें से भी तीन ही खुले हुए है इसलिए नदी में पानी कम आ रहा है। बरसात में सारे द्वार खुलने पर जल स्तर कितना बढ़ जाता होगा इसका अनुमान मैं यहां लगा पा रहा हूं। डैम के ठीक बगल में सुंदर हरा भरा उद्यान बना है। यहां रोज काफी लोग पिकनिक मनाने और घूमने पहुंचते हैं। लौटकर एक बार फिर माताटीला गेस्ट हाउस में फूलों के बीच वक्त गुजारने का मौका मिलता है। तो बेतवा से ये मुलाकात याद रहेगी।  


कैसे पहुंचे – तालबेहट झांसी 40 किलोमीटर आगे ललितपुर रोड पर छोटा सा कस्बा है। कुछ एक्सप्रेस ट्रेनें तालबेहट जिले में भी रुकती हैं। अन्यथा आप झांसी से नेशनल हाईवे से होकर फर्राटे से तालबेहट पहुंच सकते हैं। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
(TALBEHAT, BETWA RIVER, MATATILA DAM )