Sunday, March 25, 2018

द ग्रेट ईस्टर्न होटल और अतीत की यादें


कई मुलाकातें इतिहास बन जाती हैं। कई बैठकें इतिहास बन जाती हैं। तो कुछ भवन ऐसे होते हैं तो तमाम महान लोगों की बातों मुलाकातों के गवाह बनते हैं। ऐसा ही एक भवन है कोलकाता का द ग्रेट ईस्टर्न होटल।
कोलकाता का द ग्रेट ईस्टर्न होटेल अब एक हेरिटेज होटेल की सूची में शुमार हैं। यह होटल कोलोनियल समय मे स्थापित किया गया था। यह उस समय के महत्वपूर्ण होटलों में से शामिल था। इस होटेल की स्थापना 19 नवंबर 1840 को की गई थी। तब डेविड विल्सन ने इसकी स्थापना की थी और इसका नाम आकलैंड होटल रखा था। होटल खोलने से पहले डेविड विलसन इसी स्थान पर बेकरी चलाया करते थे। बाद में होटल का विस्तार हुआ तो इसमें 100 कमरे और एक डिपार्टमेंटल स्टोर खोला गया। 1865 में पूर्ण विस्तार होने पर इसका नाम द ग्रेट ईस्टर्न होटल रखा गया। इससे पहले लोक इसे विल्सन होटल के नाम से भी जानते थे। 1883 में इस होटल के कमरों में बिजली आई। बिजली की सुविधा वाला यह देश का पहला होटल था।

अंग्रेजी के जाने माने लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने इस होटल का जिक्र अपनी कहानी सिटी ऑफ ड्रेडफुल नाइट्स में किया है। इस होटल को लेकर कई कहावतें प्रचलित थीं। जो इस होटल में एक तरफ से घुसता है तो वह खरीददारी करके, खानापीना करके और शादी का उपहार खरीदकर दूसरी तरफ से बाहर निकलता था। कोलकाता के भद्रलोक के बीच इस होटल की अपनी प्रतिष्ठा बनी, जो लंबे समय तक बरकरार रही।
यह वो दौर था जब कोलकाता ईस्ट इंडिया का एक महत्वपूर्ण केन्द्र हुआ करता था। अपने प्रसिद्धि के दिनों मे इस होटल को ज्वेल ऑफ द ईस्ट कहा जाता था।
यह होटल इतिहास के कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आगमन और उनकी मुलाकातों का साक्षी रहा है। इस होटल में मार्क ट्वेन, एलिजाबेथ द्वितीय, महात्मा गांधी, होची मिन्ह जैसे लोगों का आगमन हो चुका है।
भारत के स्वतंत्र होने के बाद भी इस होटल की प्रतिष्ठा बरकरार रही। हालांकि एक समय में इसकी साख में थोड़ी गिरावट आई। बाद में इसका प्रबंधन सरकार ने अपने हाथों में ले लिया। पर 2005 में एक बार फिर इसका प्रबंधन निजी हाथों में चला गया है। 2005 में निजी हाथों में जाने के बाद इस होटल के कमरों का नवीनीकरण किया गया। ललित सूरी समूह ने 52 करोड़ में इस होटल की 90 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली। सात साल तक इसे रिस्टोर करने का काम चलता रहा।


इसके नवीकरण में तकरीबन 260 करोड़ खर्च किए गए। 2013 में 19 नवंबर को जब इसे दुबारा खोला गया तो यह होटल ललित ग्रेट ईस्टर्न होटल के नाम से जा जाने लगा। अब इसका स्वामित्व ललित समूह के पास है। अब इसमें तीन ब्लाक हैं। हेरिटेज1, हेरिटेज2 और न्यू ब्लॉक।
इस होटल में कुल 5 रेस्टोरेंट संचालित किए जा रहे हैं। इस होटल में आजकल 221 कमरे और 21 सूइट्स हैं। द ग्रेट ईस्टर्न होटल को ऐशिया का सबसे पुराना चलता हुआ होटल होने का श्रेय प्राप्त है। अपने इतिहास में कई बार इसका नाम बदला और कई बार मालिकाना हक बदला पर होटल हमेशा संचालन में रहा। आजकल यहां आपको 6500 से लेकर 14000 तक प्रतिदिन में कमरे मिल सकते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य