Saturday, March 24, 2018

कोलकाता की गलियां और जेम्स हिक्की

कोलकाता के दिल चौरंगी के उत्तर में है डेकर्स लेन। अब इसे कोलकाता में सस्ते खाना खाने वाली गली के तौर पर जाना जाता है। कई बार इस गली से गुजरा हूं। पर साल 2011 में डेकर्स लेन का नाम बदलकर जेम्स हिक्की सरनी किया गया। हालांकि अभी भी लोग इसे डेकर्स लेन के नाम से ही बुलाते हैं। कोलकाता म्युनिसिपल कारपोरेशन ने हिक्की के सम्मान में एक सड़क को उसके नाम पर किया। आखिर कौन था हिक्की।

भारत में प्रकाशित होने वाला एक अंग्रेजी भाषा का पहला समाचार पत्र बंगाल गजट या ओरिजिनल कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर था। इसके प्रकाशक जेम्स आगस्टस हिक्की ( James Augustus Hickey ) थे। जेम्स ऑगस्टस हिक्की ईस्टक इंडिया कंपनी के मुलाजिम के रूप में भारत आए थे ।
हिक्की का अखबार एक साप्ताहिक पत्र था जो कोलकाता से सन् 1780 में 29 जनवरी को आरम्भ हुआ। इसका प्रकाशन हिक्की स्वयं किया करता था। 'हिकी गजट' के प्रवेशांक में हिक्की ने स्वयं को ऑनरेबल कंपनी का मुद्रक घोषित किया हुआ था।

हिक्की गजट के प्रकाशन का एक कारण बाजार के लिए सूचनाएं उपलब्ध कराना था। यह भी माना जाता है कि वह अंग्रेजी प्रशासन के विरोध के लिए निकाला गया समाचार पत्र था। इसमें अंग्रेजी प्रशासन में व्याप्त भ्रप्टाचार और रिश्वतखोरी के समाचार प्रमुखता से होते थे।

हिक्की ने अपनी निष्पसक्ष लेखनी से उन्हों  ने किसी को भी नहीं बख्शाम, यहां तक कि वायसराय जैसे ताकतवर औहदेदार वारेन हेस्टिंग्स के द्वारा किए गए स्वेमच्छा चार और कंपनी के धन का निजी हितों के इस्तेमाल पर लिखा। हिक्की को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। अंग्रेज होने के बाबजूद उन्हें कई बार कंपनी की जेल में भी जाना पड़ा। कंपनी की आलोचना करने पर हिक्की पर 80 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर वारेन हेस्टिंग्स ने हिक्की को जेल में डाल दिया। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि 'हिक्की गैजेट्स' पहला भारतीय अखबार सिर्फ अफवाहों से भरा हुआ करता था।
 कटाक्ष करने में बेहद दक्ष संपादक
जेम्स हिक्की सरकारी कर्मियों पर कटाक्ष करने में बेहद दक्ष संपादक माने जाते थे। जनता में जितने लोकप्रिय थे, सरकार के बीच उतने ही अलोकप्रिय। हिक्की का जन्म 1740 में आयरलैंड में हुआ था। उसका निधन 1802 में हुआ। वह 1772 में कोलकाता आए। वह पेशे से सर्जन और कारोबारी थे।
वास्तव में हिक्की भारत में आधुनिक पत्रकारिता की नींव डालने वाले पत्रकार थे। वे अपनी निष्पक्ष लेखनी के लिए जाने जाते हैं। हिकी ने 1779 में कलकत्ता (अब कोलकता) में प्रेस लगाया था। इससे 12 वर्ष पूर्व 1768 में में विलियम बोल्ट नामक कम्पनी से नौकरी छोड़ने के बाद कलकत्ता से ही पत्र प्रकाशित करना चाहा था लेकिन उसे बंगाल छोड़ने का आदेश दिया गया। उसके बाद यूरोप जाने को कहा गया जिसके कारण वह पत्र आरंभ न हो सका।

यह संयोग है कि जेम्स हिकी सरनी में ही कोलकाता से प्रकाशित हिंदी दैनिक प्रभात खबर का दफ्तर है। इसके साथ ही कई ऐसे रेस्टोरेंट हैं जहां लाइव म्युजिक बैंड का परफारमेंस रोज शाम को होता रहता है। पर दिन भर किसी भी समय चले जाइए जेम्स हिक्की लेन खाने पीने के शौकीनों से गुलजार रहता है। कुछ प्रसिद्ध चाय की दुकानें, चाउमीन से लेकर बंगाली मिठाईतक सब कुछ यहां मिलता है। कोलकाता में सस्ता खाने की बेहतरीन जगहों में शामिल है हिक्की लेन।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
 (James Augustus Hickey , First English News Paper of INDIA) 

जेम्स हिकी लेन में स्थित प्रभात खबर में कार्यरत पत्रकार अजय विद्यार्थी और मैं।