Saturday, March 3, 2018

स्वामी दयानंद ठाकुर और अरुणाचल आश्रम

अरुणाचल आश्रम के संस्थापक स्वामी दयानंद ठाकुर बंगाल के प्रमुख संतों में हैं जिन्होंने कई चमत्कार भी किए। पर निहायत सादा जीवन जीया और प्रभु को पाने का सीधा सादा संदेश दिया। वे कहते हैं  कि मैं भौतिक और आध्यात्मिक जगत के बीच एक पुल बनाना चाहता हूं। वे कहते हैं - "एक महत चेतना की सशक्त धारा आ रही है, जिसके प्रवाह में राष्ट्रों की पूर्वाग्रहों और संकीर्णताओं की दीवारें चूर चूर हो जायेंगी और तब विश्व के समस्त राष्ट्र प्रेम का महोत्सव मनाएंगे। वे कहते हैं कि यदि ईश्वर सत्य है तो जगत भी सत्य है।भक्ति चैतन्य ब्रह्मचारी आश्रम के वर्तमान प्रभारी हैं। अरुणाचल आश्रम में हमारी बातचीत युवा सन्यासी पन्ना ब्रह्मचारी से हुई।
ठाकुर दयानंद देव का जन्म 19 मई 1881 में सिलहट (अब बांग्लादेश) जिले के हबीबगंज सब डिविजन के बामई ग्राम में हुआ। उनके पिता गुरुचरण चौधरी जाने माने वकील थे। मां का नाम कामाख्या देवी था। ठाकुर का पूर्व नाम गुरुदास चौधरी था। छात्र जीवन में उनका पढ़ने में मन नहीं लगा। छात्र जीवन में ही वे आधात्म की ओर प्रवृत हो गए।
इसी दौरान स्वामी विवेकानंद से एक मुलाकात के बाद उनका जीवन बदल गया। बाद में सिलचर शहर को उन्होंने अपना कार्यक्षेत्र बनाया। वे काफी सुंदर कीर्तन करते थे। भक्ति मार्ग को लेकर उनके सरल सहज संदेश के कारण लोग उनसे प्रभावित हुए। उन्होंने अपने जीवन में विश्व शांति का सपना देखा और इसी के तहत सन 1909 में अरुणाचल मिशननाम से एक संस्था की स्थापना की।

विश्व सरकार का प्रस्ताव रखा - स्वामी जी ने 17 दिसंबर, सन 1912 को पेरिस में हुए शांति सम्मलेन में अपनी विश्व-एकता योजना की एक रुपरेखा प्रस्तुत की । उन्होंने कहा -  प्रत्येक देश की जनता किसी निश्चित अवधि के लिए अपने बीच से एक राष्ट्रपति चुने और वह काउन्सिल की सहायता से उनका भाग्य निबटारा करे। फिर प्रत्येक देश के राष्ट्रपति अपने बीच से एक प्रधान राष्ट्रपति चुने जो भिन्न-भिन्न देशों से भेजे गए मंत्रियों के साथ ( जिसमें सार्वभौम प्रजातंत्र का अंग होगा) मिलकर, देशों की सरकार से भिन्न एक सरकार बनाएं। वह प्रत्येक देश के कार्यों की समीक्षा करेंगी और सभी को समान रूप से समृद्ध व विकसित होने देने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। जिससे की कोई देश किसी कमजोर देश का शोषण कर लाभ न उठा पाए। कहा जाता है कि उनके इस स्वप्न का ही परिणति के तौर पर 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन हुआ। स्वामी जी ने जग सुखी तो मैं सुखी के सिद्धांत को अपनाते हुए विश्वशांति को अपना उद्देश्य बनाया।  

आश्रम के त्योहार -  अरुणाचल आश्रम का स्थापना दिवस मकर संक्रांति के अलावा साल में आश्रम के कुछ खास त्योहार मनाए जाते हैं। ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि स्वामी दयानंद ठाकुर जी की जन्मतिथि पड़ती है। तब मंदिर में बड़ा आयोजन होता है। इसी तरह सावन का 25वां दिन आचार्य नित्यानंद तीर्थपुरी जी की जयंती पड़ती है।
आश्रम से निकल कर मुझे रेलवे स्टेशन जाना है। लोगों ने बता दिया था। आश्रम के गेट से आगे बढ़कर रेलवे फाटक पर आता हूं। यहां से रेलवे लाइन पकड़कर आगे बढ़ जाता हूं। रेल पटरियों पर ही एक किलोमीटर चलने के बाद अरुणाचल जंक्शन रेलवे स्टेशन दिखाई देने लगता है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य 
(THAKUR DAYANAND , ARUNACHAL KALIBARI, SILCHAR )