Monday, March 19, 2018

अगरतला - केसर चमचम, मालपुआ और वापसी

पुराने अगरतला से लौटते हुए मुझे सड़क पर एक स्टाल में हास नामक स्थानीय चिड़िया का मांस बिकता हुआ दिखाई दिया। दुकानदार भाई ने उस चिड़िया की तस्वीर भी लगा रखी थी। वे उस चिडिया के मांस के साथ बिरयानी की प्लेट 80 रुपये की बेच रहे थे। जैसा कि उन्होने बताया कि इस चिड़िया का मांस सर्दियों में गर्म होता है इसलिए लोग खाते हैं। भले ही त्रिपुरा बंगाली बहुल शहर हो पर यहां के रेस्टोरेंट में चिकेन, मटन, मछली, पोर्क और कई तरह की चिड़िया का मांस आपको बिकता हुआ दिखाई देता है।

पर घबराइए मत अगरतला में शाकाहारी खाने के लिए तमाम विकल्प मौजूद हैं। पुराने मोटर स्टैंड के पास निरामिष भोजनालय स्थित है। यहां पर पांच रुपये की चपाती और अलग अलग सब्जियां 20, 30 और 40 रुपये की हैं। यहां पर मुझे कटहल की सब्जी की प्लेट भी दिखाई देती है। हर सब्जी की प्लेट का नमूना स्वागत कक्ष के काउंटर पर लगा रखा है। खाना संतोषजनक है। पर इस बार मुझे एक और बेहतरीन शाकाहारी भोजनालय दिखाई दे गया अगरतला की सड़कों पर।
उज्जयंत पैलेस के पास एलएनबाड़ी रोड पर है मां शेरावली स्वीट्स । यह मिठाईकी दुकान के साथ एक होटल भी है। एक तरफ मिठाई की दुकान दूसरी तरफ डाइनिंग हॉल।
अगरतला के शेरावली स्वीट्स में आपको हर तरह की मिठाइयां मिल जाएंगी। मालपुआ, केसर चमचम, केसर बर्फी, चना टोस्ट, स्ट्राबेरी बर्फी के अलावा वे शुगर फ्री मिठाइयां भी बनाते हैं। सुबह के नास्ते में आपको यहां गुजराती स्वाद ढोकला, खमण आदि भी मिल जाएगा।

वहीं लंच और डिनर में दक्षिण भारतीय खाना, गुजराती थाली और उत्तर भारतीय थाली के विकल्प भी मौजूद हैं। मेरे पास अब समय नहीं है इसलिए सुबह नास्ते में मैं यहां ढोकला लेता हूं। इसके बाद वापस अपने होटल के निकल जाता हूं। अपनी पिछली यात्रा में मैं शकुंतला रोड स्थित गुजरात भोजनालय गया था। अब उस होटल की पुरानी बिल्डिंग गिराई जा चुकी है। गुजरात भोजनालय अब नए भवन में शिफ्ट हो चुका है। हालांकि इस बार में इस शाकाहारी भोजनालाय में खाने का समय नहीं निकाल सका।
शकुंतला रोड पर ही अब रविंद्र शतवार्षिकी भवन नामक विशाल सभागार बन चुका है। पास में एक विशाल मार्केटिंग कांप्लेक्स भी दिखाई दे रहा है जो हाल में ही बनकर तैयार हुआ है। रविंद्र भवन के बाहर एक विशाल पोस्टर लगा है जिसमें 2017 में त्रिपुरा में हमले में मारे गए दो पत्रकारों के  मौत की सीबीआई जांच की मांग की जा रही है। यहां की पत्रकार बिरादरी लंबे समय से धरना प्रदर्शन कर रही है।
अगरतला की सड़कों पर एक पोस्टर दिखाई देता है जिसमें ग्रेटर त्रिपुरा के निर्माण की मांग की गई है। इस नक्शे में उन इलाकों को भी दिखाया गया है जो कभी त्रिपुरा सम्राज्य के हिस्सा थे, पर अब बांग्लादेश और असम के हिस्सा बन गए हैं। पर क्या अब ऐसा संभव है।
इस बार की अगरतला यात्रा में मेरी मुलाकात विभूति देववर्मा से भी हुई। सूचना देने पर विभूति मुझसे मिलने होटल में आए फिर अपने घर और ससुराल भी ले गए। विभूति मेरे फेसबुक फ्रेंडलिस्ट में हैं। वे त्रिपुरा सरकार में कर्मचारी और सामाजिक मोर्चों सक्रिय रहने वाले नौजवान हैं।
अब चला चली की वेला है। मैं होटल से चेकआउट कर अगरतला एयरपोर्ट के लिए निकल पड़ा हूं। कमान चौमुहानी के आसपास से एयरपोर्ट से लिए शेयरिंग आटोरिक्शा एयरपोर्ट के लिए चलते हैं। कुल 11 किलोमीटर की दूरी का किराया है 20 रुपये। आटोरिक्शा बिल्कुल एयरपोर्ट के पोर्च में जाकर छोड़ते हैं। अगरतला देश के चंद उन एयरपोर्ट में शामिल है जहां आप इतने सस्ते में समाजवादी तरीके से पहुंच सकते हैं।


पिछली बार मैं अगरतला से ट्रेन से गुवाहाटी पहुंचा था। पर इस बार वायु मार्ग से कोलकाता जाना है। इंडिगो की उड़ान है। संख्या 6ई 275 कोलकाता होकर चेन्नई और फिर कोयंबटूर तक जाती है। अगरतला एयरपोर्ट पर जेट की लाइन में लग गया। तभी एक जेट कर्मचारी आकर बोलती हैं लाइए मैं आपका बोर्डिंग पास निकाल लाती हूं। थोड़ी ही देर में मैं विमान में अपनी सीट पर हूं। कैप्टन हैं जयमूर्ति और वाइस कैप्टन ताशी भूटिया। क्रू के हेड हैं मणिपुर के मेरान। भूटिया महिलाएं विमान भी उड़ा रही हैं, गर्व की बात है।
कैप्टन बताते हैं कि अगरतला से कोलकाता की 40 मिनट की उड़ान में हम ज्यादातर समय बांग्लादेश के आसमान से उड़ेंगे। तो सारे रास्ते हमें विमान की खिड़की से बांग्लादेश के नदी, पहाड़ और खेत धुंधले ही सही नजर आते रहे हैं। वह सारा भू भाग जो कभी हमारे अपने देश का ही हिस्सा हुआ करता था। पर 1947 में एक दीवार खींच गई। मेरे जेहन में ख्याल आता है, क्या ये दीवार कभी गिरेगी। तभी कैप्टन घोषणा करते हैं- हम कोलकाता उतरने वाले हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य ( MA SHERAWALI SWEETS, AGARTALA AIRPORT, BANGLADESH )