Thursday, February 8, 2018

मिजोरम के लिए इनर लाइन परमिट

आईजोल के लिए सूमो चल पड़ी है। कछार जिले के सपाट हरे भरे रास्ते पर गाड़ी दौड़ रही है। एक किलोमीटर आगे जाकर एक खाली सीट पर एक सवारी बैठती है। नाम राजू है पेशे से ट्रक ड्राईवर हैं। मिजोरम में कहीं गाड़ी फंसी हुई है तो सूमो से जा रहे हैं। मेरी बगलवाली सीट उनकी हो गई है। रास्ते में भागा बाजार मणिपुरी मार्केट आता है। उसके बाद लैलापुर पुलिस पेट्रोल पोस्ट। अभी अगर आप गुवाहाटी से सिलचर आने के बाद आईजोल की तरफ जाना चाहें तो सिलचर बाजार में आने के बाद मिजोरम रोड पकड़ना पड़ता है। पर अब एक बाईपास का निर्माण जारी है जो सिलचर शहर के बाहर से ही मिजोरम रोड पर जाकर मिल जाएगा।
लगभग 40 किलोमीटर चलने के बाद मिजोरम की सीमा शुरू हो गई। वैरेंगते चेकपोस्ट पर सूमो वाले ने रोक दिया। यह कोलासिब जिले में पड़ता है। सभी यात्रियों से इनरलाइन परमिट की मांग की गई। मेरा आईएलपी मेरी जेब में था, मैंने पकड़ा दिया। ड्राईवर ने कहा था कि आईएलपी जेब में रखकर सामान सूमो की छत पर पैक करवा दें। मैंने पानी की बोतल और अपने पास रख ली थी। पर पड़ोसी राजू के पास आईएलपी जैसी चीज नहीं थी। अच्छी बात है कि वैरेंगते चेकपोस्ट पर आईएलपी बन जाता है हाथों हाथ. पर आपको आधार कार्ड, वोटआईडी जैसा कोई प्रमाण पत्र मूल प्रति में दिखाना और छायाप्रति संलग्न करना पड़ता है। राजू ने अपना आधार ऊपर सामान में पैक करा दिया था। उसका सामान निकाला गया। उसमें से आधार निकालकर 120 रुपये फीस देकर आईएलपी बन गया। यहां कंप्यूटरीकृत आईएलपी बना।
मैंने अपना आईएलपी दिल्ली में ही बनवा लिया था। पर वहां फार्म पर पेन से भरकर मुहर लगाकर आईएलपी जारी किया गया था। आपको पता ही होगा कि पूर्वोत्तर के तीन राज्यों अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम में भारतीय नागरिकों के प्रवेश के लिए भी आईएलपी जरूरी है। ये आईएलपी नई दिल्ली में चाणक्यपुरी में उमाशंकर दीक्षित मार्ग स्थित मिजोरम हाउस, कोलकाता में बालीगंज स्थित मिजोरम हाउस,  गुवाहाटी और सिलचर के मिजोरम हाउस से भी बनवाया जा सकता है। आईएलपी का शुल्क 120 रुपये है।  
मैं दिल्ली के मिजोरम हाउस आईएलपी के लिए गया तो वहां इसे बनाने वाली मोहतरमा क्रिसमस की तैयारी में जुटी थीं, लिहाजा तीन घंटे इंतजार कराने पर परमिट बनाकर दिया। पर अच्छी बात है कि मिजोरम का परमिट आप चेकपोस्ट पर भी तुरंत फुरंत में ही बनवा सकते हैं।
परमिट चेक होने के बाद सूमो फिर आगे बढ़ चली। अब हम मिजोरम में दौड रहे हैं। पूर्वोत्तर का यह आखिरी राज्य है जिसमें मुझे आने का सौभाग्य मिला है। इससे पूर्व सिक्किम समेत सभी राज्यों में जा चुका हूं। चढ़ाई वाला पहाड़ी रास्ता आरंभ हो चुका है। सड़कों पर मिजो लोग नजर आने लगे हैं। गांव का नाम है थिंगद्वाल उद्यान विभाग का बोर्ड नजर आता है। रास्ते में सेना के कैंप नजर आते हैं।
कोई 95 किलोमीटर के सफर के बाद आया कोलासिब शहर। यह जिला मुख्यालय भी है। यहां कोई उतरने चढ़ने वाला नहीं था इसलिए सूमो यहां रुकी नहीं। वैसे कोलासिब सिलचर और आईजोल के मध्य में स्थित है। यहां स्थानीय टैक्सी सेवा है। ठहरने के लिए होटल गेस्टहाउस आदि उपलब्ध है। 900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कोलासिब का वातावरण मनोरम है। हालांकि यहां देखने लायक कुछ खास नहीं है तो आगे चलते हैं।
-विद्युत प्रकाश मौर्य

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