Tuesday, February 20, 2018

आईजोल का आईआईएमसी और एलआर साईलो

आईजोल शहर के राजधानी क्षेत्र में टहल रहा हूं। विधानसभा और राजभवन को देखते हुए आगे बढ रहा हूं। अचानक याद आता है कि आईजोल में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) की शाखा है। जब मैं 1995-96 में आईआईएमसी का छात्र था तब इसकी ढेंकानाल (ओडिशा) और आईजोल (मिजोरम) शाखा के बारे में सुनता था। तो अब आईजोल आने पर आईआईएमसी की शाखा देखने की इच्छा हुई। मैंने मोबाइल में आईआईएमसी, आईजोल सर्च किया। इसके प्रभारी एलआर साइलो साहब का संपर्क नंबर मिल गया।उन्हें फोन लगाया। कोई पुरानी जान-पहचान नहीं, पर बड़ी उत्साहजनक बात हुई। उन्होंने कहा मैं अभी घर में हूं। आज छुट्टी है। घर पर आ जाएं। कहां पर हैं आप। मैंने बताया कि एसेंबली के पीछे वाली सड़क पर। वहां से ट्रेजरी स्कायर चौराहे पर आएं। मैं एक छात्र को भेजता हूं। वह आपको मेरे घर ले आएगा। मैं पांच मिनट में एक बार फिर ट्रेजरी स्कावयर पर था।वहीं जहां लालडेंगा मेमोरियल बना है। यहां आदित्य गौतम मिले।
साइलो साहब के ड्राईंग रुम में क्रिसमस ट्री। 
आदित्य आईआईएमसी आईजोल के सत्र 2017-18 में अंग्रेजी पत्रकारिता के छात्र हैं। वैसे इंजीनियरिंग करने के बाद पत्रकारिता पढ़ने आए हैं। आगे लेखक बनने की तमन्ना रखते हैं।

आईआईएमसी आईजोल में साल 2011 से अंग्रेजी पत्रकारिता का डिप्लोमा कोर्स संचालित किया जा रहा है। हांलाकि परिसर दूर होने के कारण दूसरे राज्यों से छात्र यहां कम आते हैं। पर इस बैच में नौ छात्र अध्ययन कर रहे हैं। यहां तीन शिक्षक पदस्थापित हैं। हां नौ छात्रों के लिए तीन शिक्षक। क्लासरूम का माहौल कितना आत्मीय होता होगा आप अंदाजा लगा सकते हैं। आईजोल परिसर 8 अगस्त 2011 से नियमित रूप से कार्य कर रहा है। फिलहाल इसकी कक्षाएं मिजोरम यूनीवर्सिटी के कैंपस में ही संचालित होती हैं। यह शहर से 6 किलोमीटर बाहर है। पर आईआईएमसी आईजोल का विशाल परिसर बनकर तैयार हो रहा है। आने वाले सालों इसका अपना परिसर होगा। आईआईएमसी में हमारे शिक्षक रहे केएम श्रीवास्तव कई बार आईजोल आ चुके थे।
हम एक अत्यंत सुरुचिपूर्ण ढंग से सजे घर में प्रवेश करते हैं। एलआर साइलो के घर का ड्राईंग रूम बडे ही करीने से सजाया गया है। इसमेंविशाल क्रिसमस ट्री है। साथ ही दीवारों पर फोटोग्राफी में आईजोल शहर की सुंदर तस्वीरे हैं। 71 वर्षीय साइलो साहब कुछ दिन से बीमार थे। नए साल के पहले दिन मैं पहला कोई व्यक्ति हूं जिससे वे मिल रहे हैं।
हमारी बातचीत शुरू होती है। पहले आईआईएमसी पर फिर बात निकलकर जाती है मिजोरम पर। वे 1971 से मिजोरम सरकार की सेवा में हैं। उन्होंने मिजोरम का उग्रवाद प्रभावित दौर भी काफी करीब से देखा है। वे मिजोरम पर एक चलती फिरती किताब ही हैं। पूर्वोत्तर के सारे बड़े पत्रकार उनके दोस्त हैं। एलआर साइलो लंबे समय तक मिजोरम सरकार के सूचना एवं प्रसारण विभाग के निदेशक रहे। 2007 में अवकाश प्राप्ति के बाद भी मिजोरम सरकार उनकी सेवाओं का विस्तार दे रही है।आजकल भी वे मिजोरम सरकार के मुख्यमंत्री पू ललथनहवला के मीडिया सलाहकार हैं।
कुछ घंटे की मुलाकात में पत्रकारिता, सरकारी मीडिया के तौर पर एक सूचना अधिकारी की जिम्मेवारियां और मिजोरम में उग्रवाद के दौर पर संक्षेप में उनसे चर्चा हुई। उनके ड्राईंग रुम में मिजोरम पर कुछ सुंदर कॉफी टेबल बुक देखने को मिलीं।
चाय नास्ते के बाद अब उनसे विदा लेना चाहता हूं। वे कहते हैं जब तक मिजोरम मे हैं आप किसी भी तरह की सहायता के लिए फोन कर सकते हैं। चलते समय वे एक कलम और मिजोरम पर कुछ पुस्तिकाएं उपहार में देते हैं। चलते हुए पता चलता है कि साइलो साहब अपने आवास में एक गेस्ट हाउस भी संचालित करते हैं। 70 के पार हैं पर कई मोर्चों पर उनकी सक्रियता प्रेरणा लेने योग्य है। 
आदित्य फिर ऊपर तक छोड़ने आए। आदित्य हरिद्वार के पास कनखल के रहने वाले हैं। पर पत्रकारिता पढ़ने के लिए उन्होंने आईजोल आना पसंद किया। उनसे थोड़ी चर्चा के बाद मैं विदा लेता हूं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य 
( IIMC, AIZAWL, LR SAILO )