Saturday, February 3, 2018

दिल्ली से कोलकाता वाया मुगलसराय, धनबाद

दिल्ली से चला हूं 26 तारीख की रात भागलपुर एक्स्सप्रेस से। नई दिल्ली से इस ट्रेन के खुलने का समय रात के 12 बजे है। माधवी और अनादि एसी3 में हैं तो मैं बगल वाली स्लीपर कोच में। उनका पटना जाने का कार्यक्रम पहले से तय था तो मेरा बाद में बना। योजना ये है कि उन्हें पटना छोड़कर मैं आगे कोलकाता की ट्रेन ले लूंगा। भागलपुर एक्सप्रेस पटना 3 बजे दिन में पहुंचती है। जबकि गरीब रथ वहां से रात 8.30 बजे है। दिल्ली से ट्रेन 12 के बजाए 1.15बजे चली। रात भर चलते चलते इलाहाबाद पहुंचने से पहले ट्रेन पांच से छह घंटे लेट हो चुकी है। अब मुझे पटना से कोलकाता गरीब रथ मिलने संभावना कम नजर आ रही है। हमारे कुछ अनुभवी सहयात्रियों ने भी कहा कि टिकट रद्द कर देना अच्छा होगा। मैंने तीन बजे टिकट रद्द कर दिया।आधा रिफंड मिलेगा।
पांच बजे के आसपास मुगलसराय उतर गया। हावड़ा की अगली ट्रेन तीन घंटे बाद है। दून और जोधपुर हावडा भी लेट चल रही हैं। मुगलसराय में बाहर निकलकर रोटी दाल खाई। एक हावड़ा का जनरल टिकट खरीदा। वापस प्लेटफार्म पर। प्लेटफार्म नंबर 1-2 पर सर्वोदय बुक स्टाल  से कुछ अल्पमोली अनमोल पुस्तकें खरीदीं। इस स्टाल के प्रभारी प्रकाश जी बड़े जानकार व्यक्ति हैं। कभी मुगलसराय उतरिएगा तो उनसे मिलिएगा। पटना नहीं जाने का फैसला ठीक ही रहा। भागलपुर एक्सप्रेस रात 11 बजे के बाद पटना पहुंची।
सुबह के 5 बजे धनबाद रेलवे स्टेशन। 
दून एक्सप्रेस आई। जनरल डिब्बे में चढ़ना मुश्किल था। टीटीई से बात की। कहा कि स्लिपर में चढ़िए, आकर पेनाल्टी बना दूंगा। बहुत दिनों बाद बिना आरक्षण के लंबी यात्रा कर रहा हूं। टीटी बाबू ने पेनाल्टी लेकर बर्थ भी दे दी। पर वह सीट हमें पारसनाथ मे खाली करनी पड़ी। अब मैं धनबाद रेलवे स्टेशन पर उतर गया। मोबाइल में टाइम टेबल देखने पर पता चला कि सुबह 5.50 में कोलफील्ड्स एक्सप्रेस यहां से बनकर चलती है। पूरी सिटिंग ट्रेन है। 10 बजे के आसपास हावड़ा पहुंचा देगी।

कोलफील्ड्स में एक सिटिंग कोच में विंडो सीट तलाश कर बैठ गया। सहयात्री भी अच्छे मिले। हां धनबाद स्टेशन पर 5 रुपये मिलने वाली नींबू वाली चाय खूब पसंद आई। कुमारधुबी, बराकर, कुल्टी, सीतारामपुर के बाद ट्रेन आगे आसनसोल में रुकी। बंगाल शुरू हो चुका है। इसके बाद रानीगंज फिर अंडाल। वारिया के बाद फिर आया दुर्गापुर। दुर्गापुर में स्टील प्लांट है। जब मैं बीएचयू में पढ़ता था तो दुर्गापुर से खूब लड़के लड़कियां बीएचयू में आते थे। इसके बाद खाना जंक्शन। सारे स्टेशन बिल्कुल साफ सुथरे नजर आ रहे हैं। बर्धमान जंक्शन पर ट्रेन रुकी थोड़ी देर। पर कोलफील्ड्स एक्सप्रेस समय से चल रही है।
हावड़ा से पहले रास्ते में दार्जिलिंग मेल से मुलाकात हुई। सामने के प्लेटफार्म पर खड़ी थी। डानकुनी जंक्शन के बाद लिलुआ फिर हावड़ा। 1991 में पहली बार हावड़ा आया था। उसके बाद 2004 में , फिर 2007 में हैदराबाद से लौटने के क्रम में, फिर आना हुआ कोलकाता 2014 में गंगा सागर यात्रा के दौरान। एक बार फिर जुलाई 2016 में अंदमान से लौटते हुए। यह मेरी कोलकाता की छठी यात्रा है। हर बार सिटी ऑफ जॉय यानी कोलकाता कुछ नया सा लगता है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
( MUGALSARAI, DHANBAD, DEHRADUN EXP, COALFIELDS EXP, HAWRAH )