Thursday, February 1, 2018

लोकमान्य तिलक टर्मिनस – बोरिवली और गरीबरथ से दिल्ली

मत्स्यगंधा एक्सप्रेस सुबह 7 बजे के आसपास लगभग समय पर ही लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचा देती है। मुंबई के इस टर्मिनस पर हम पहली बार उतरे हैं। कुर्ला क्षेत्र में इस टर्मिनस को नया विकसित किया गया है। स्टेशन परिसर काफी खुला खुला है। स्टेशन का नया भवन भी विशाल है। बाहर पार्किग के लिए भी काफी जगह है।
हमारे पास मुंबई में कुछ घंटे का समय है। दोपहर में बांद्रा टर्मिनस से हमारी अगली ट्रेन दिल्ली के लिए है। तो हमने तय किया है कि इस बार अपने पत्रकार साथी सुभाष चंद्र मौर्य से मुलाकात करेंगे। वे बोरिवली इलाके में ही रहते हैं। हमने एलटीटी से ओला बुक कर ली। छुट्टी का दिन है। सड़क खाली होने के कारण हमलोग जल्दी पहुंच गए, ठाकुर कांप्लेक्स। 


अनादि रास्ते में एक जगह बड़ा पाव खाने के लिए रुके। भला मुंबई में आकर बड़ा पाव नहीं खाया तो क्या मुंबई आए। उसके बाद के कुछ घंटे सुभाष भाई के साथ गुजरे। दोपहर का भोजन उनके घर करने बाद हमलोग स्टेशन के लिए चले। हमारी ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से खुलती है। पर उसका अगला पड़ाव बोरिवली है। हम बोरिवली में ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। अनादि एक बार फिर बड़ा पाव खा रहे हैं। यहां रेलवे स्टेशन पर बड़ा पाव अभी 8 रुपये का है। अलग अलग तरह के जूस 5 रुपये के ग्लास हैं। माधवी को चप्पल मरम्मत करानी है, तो प्लेटफार्म पर मोची महोदय मिल गए। उन्होंने 10 रुपये में हमारी समस्या का हल निकाल दिया। हम शुक्रगुजार हैं उनके। वे हमारे बड़े काम आए।

ट्रेन समय पर आ गई है। हम अपनी सीट पर पहुंच गए। हमारे आसपास कुछ गुजराती परिवार हैं जो दोपहर में खाते पीते चल रहे हैं। सूरत रेलवे स्टेशन पर मैं भी नीचे उतरकर खम्मण लेकर आता हूं। सूरत के बाद ट्रेन अंकलेश्वर और भरूच से होकर गुजरती है। हम दिन में ऐतिहासिक गोल्डन ब्रिज के दर्शन करते हैं। इसके बाद बड़ौदा फिर आगे। शाम को ट्रेन अहमदाबाद पहुंची। अहमदाबाद में इसका ठहराव 20 मिनट का है। हमलोग अहमदाबाद में खाने का विकल्प ढूढने प्लेटफार्म पर पहुंचे। यहां पर आनेस्ट नामक आईआरसीटीसी का फूड प्लाजा है। पर उसकी महंगी थाली पैक कराने वालो की भीड़ है। हमें एसके केटर्स का स्टाल नजर आता है। यहां पर 72 रुपये की थाली में पराठे, गाढ़ी दाल, पनीर और अच्छी किस्म का चावल भी है। हम तीन थालियां लेकर अपने कंपार्टमेंट में लौट आते हैं। ट्रेन चल पड़ी है और हमलोग पेट पूजा में लगे हैं। ट्रेन साबरमती नदी के पुल को पार कर रही है। रात को रोशनी में रिवर फ्रंट नजर आ रहा है। मैं 2013 में अहमदाबाद आया था तो साबरमती में बिल्कुल पानी नहीं था। अब पानी आ गया है।

सुबह नींद खुली तो ट्रेन जयपुर में थी। यहां हम हल्का नास्ता लेते हैं। आगे ट्रेन दिगावड़ा नामक स्टेशन पर काफी देर तक यूं रूक जाती है। अलवर में ट्रेन का ठहराव है। यहां पर हमने अलवर का मावा खरीदा। अलवर स्टेशन के प्लेटफार्म पर म्यूरल्स बनाकर सरिस्का के बाघों को दिखा गया है। कुछ घंटे देर से सही ट्रेन दिल्ली में प्रवेश कर रही है।  

-        विद्युत प्रकाश मौर्य
 ( KHAMMAN, BADA PAW, BORIWALI, SURAT, ALWAR )