Friday, January 26, 2018

कर्नाटक में कान्हा की नगरी - उडुपी

केरल से लौटते हुए हमारा पड़ाव था कर्नाटक का तटीय शहर उडुपी। वही उडुपी जिसका नाम सालों से हम उडुपी रेस्टोरेंट की श्रंखला के कारण सुनते आए थे, जो अपने दक्षिण भारतीय स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। सुबह 6 बजे हमलोग उडुपी रेलवे स्टेशन पर उतरे। कोंकण रेलवे का साफ सुथरा चमचमता हुआ रेलवे स्टेशन हमारा स्वागत कर रहा था।


उडुपी कोंकण रेलवे का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। हालांकि छोटा सा स्टेशन है पर यहां राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें भी रुकती हैं। स्टेशन भी कृष्ण के रंग में रंगा नजर आता है। रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको कान्हा जी के दर्शन होते हैं। रेलवे स्टेशन से श्रीकृष्ण मंदिर की दूरी 4 किलोमीटर है। उडुपी में आप कहीं भी जाएं आटोरिक्शा का किराया तय है। प्रीपेड से आटो लें, दिल्ली की तरह कोई ठगी का आलम नहीं है। हमलोग एक प्रीपेड आटो रिक्शा लेकर श्रीकृष्णा मंदिर पहुंच गए।

हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उडुपी रेलवे स्टेशन से हाईवे को जोडने वाली सड़क का नाम जार्ज फर्नाडिस रोड है। समाजवादी नेता जार्ज की उडुपी में बहुत इज्जत है इसलिए शहर में उनके नाम पर सड़क का नाम उनके जीवनकाल में ही रख दिया गया। ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। यह शहर जार्ज की कर्मस्थली भी रहा है।
एक तरफ ऊंची आवाज में अनवरत गर्जना करता अरब सागर दूसरी तरफ सहयाद्रि की पर्वतमालाएं। बीच में बसा है मंदिरों का यह शहर उडुपी। कर्नाटक के इस छोटे से खूबसूरत शहर को श्रीकृष्ण जी के शहर के तौर पर जाना जाता है।

परशुराम की भूमि है उडुपी – कहा जाता है महर्षि परशुराम ने जब सारी धरती ब्राह्मणों को दान कर दी तब उनके रहने के लिए कोई स्थान नहीं बचा। तब उन्होंने तीर चलाया और समुद्र के देवता वरुण ने धरती का नया क्षेत्र प्रकट किया। यह क्षेत्र अरब सागर से निकला। इसलिए गोवा से आगे कर्नाटक के गोकर्ण, उडुपी, मंगलुरू से लेकर केरल के कासरगोड तक के इलाके को परशुराम का क्षेत्र कहते हैं।


उडुपी का प्राचीन नाम रुपी ( रजत ) पीठ था जो बाद में उडुपी कहलाने लगा। इस क्षेत्र में सात पवित्र पीठों की चर्चा आती है जिसमें से पांच उडुपी जिले में ही हैं। उडुपी क्षेत्र की स्थानीय भाषा तुलु है। तुलु में इसे ओडिपू उच्चारित करते हैं।   सालों भर सदाबहार मौसम वाले शहर उडुपी हर ओर कान्हा के रंग में रंगा नजर आता है। धार्मिक शहर होने के साथ साथ यहां सागर की लहरों के संग अटखेलियों का भी आनंद लिया जा सकता है।

कैसे पहुंचे – उडुपी मुंबई से मंगलुरू के बीच कोंकण रेल मार्ग का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। प्रकृति से सुंदर नजारे देखते हुए उडुपी पहुंचना हो तो कोंकण रेल के किसी भी ट्रेन से यहां तक पहुंच सकते हैं। उडुपी छोटा स्टेशन है, पर यहां पर राजधानी एक्सप्रेस जैसी सभी प्रमुख ट्रेनों का ठहराव है।  

अगर हवाई मार्ग से पहुंचना हो तो मंगलुरु एयरपोर्ट यहां से सिर्फ 60 किलोमीटर है। गोवा का डाबोलियम एयरपोर्ट या बेंगलुरु से भी उडुपी पहुंचा जा सकता है।    वहीं कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से उडुपी के लिए शानदार वातानुकूलित बसों की सेवाएं भी उपलब्ध है। पर कहीं से भी आएं पर आप उडुपी में कुछ दिन गुजारें तो आपको काफी आनंद आएगा। जय श्री कृष्णा।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य   - vidyutp@gmail.com 
( UDUPI, LAND OF PARSHURAM ) 

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