Wednesday, January 24, 2018

मीठी यादों के संग मुन्नार से वापसी

चार दिन मुन्नार में गुजारने के बाद अब हमारी वापसी की बारी थी। सच पूछो तो वापस आने की तो इच्छा नहीं हो रही थी। सुबह जिस अनाई रेस्टोरेंट में नास्ता किया करते थे उनसे एक अपनेपन का रिश्ता बन गया था। हम चलते हुए उनके साथ फोटो खिंचवाना नहीं भूले। वे रोज हमें मुन्नार घूमने को लेकर टिप्स दिया करते थे जो हमारे काम आए। अक्तूबर महीने में भी हर रोज हल्की बूंदा बांदी ने मुन्नार में सर्दी का माहौल बनाए रखा।
हमने 12 बजे अपने होटल से चेकआउट कर दिया। दोपहर दो बजे हमारी वापसी की बस है। इस बार हमारा आरक्षण केरल रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन की बस में है। इसे हमने आनलाइन ही बुक करा रखा है। लोगों ने बताया कि बस स्टैंड पर बस नियत समय पर आएगी। बाजार के बस स्टैंड में बसे खड़ी होने की जगह नहीं है। बसें आती हैं और थोड़ी देर चल पड़ती हैं। एक यात्री शेड बना हुआ है। पास में टैक्सी और आटो स्टैंड भी है। आसपास में शापिंग करने के लिए कुछ अच्छी दुकानें है।

चलते चलते मुन्नार का हैंड मेड चाकलेट, नारियल तेल आदि खरीदा जा सकता है। तो हमलोग नीयत समय पर अपने बस के इंतजार में थे। बस समय पर ही आई। वास्तव में यह दिल्ली में चलने वाली डीटीसी की एसी बस की तरह ही है। बस इसे लांग रुट पर चला दिया गया है। लिहाजा लंबी यात्रा के नजरिए से देखें तो सीटें अरामदेह नहीं हैं। पर केरास की बस की तुलना में किराया कम है। लगेज रखने की खूब जगह है। केरास में किराया 370 रुपये है तो इस बस में 225 रुपये ही है। बस समय पर चल पड़ी। अब उतरने की बारी है मुन्नार धीरे धीरे पीछे छूटता जा रहा है।

बस में हमारे साथ अशोक दास का परिवार है। वे भुवनेश्वर एनआईसी में कार्यरत हैं। एलटीसी पर टूर करने आए हैं। रांची में भी लंबे समय रह चुके हैं। उन्होंने एसी बस के लिए पहले से टिकट नहीं करा रखा था। पर बस में जगह थी उन्हें आसानी से जगह मिल गई तो वे हमारे सहयात्री बन गए। बोलचाल से बिहारी जैसे ही लगते हैं। दुखी हैं कि मुन्नार में सिर्फ दो दिन ही समय दे पाया। इसलिए सब कुछ ठीक से घूम नहीं सके। वापसी की यात्रा में दास जीऔर उनके बच्चों से बातें करते हुए समय कट रहा है। समय काटना जरूरी भी है। जी मिचलाने और उल्टी होने का डर बना हुआ है। माधवी और अनादि को वापसी में एक –एक बार उल्टी हो गई। मेरा जी घबरा रहा था, पर खुद को मिस्टर दास के साथ बातों में उलझा कर हमने अपने को नियंत्रित रखा।

कोठामंगल पहुंचककर राहत मिली, जब घाट सेक्शन खत्म हो गया। बस कोठामंगलम के स्टैंड में थोड़ी देर रुकी। यात्रियों को चाय पीने के लिए ब्रेक दिया गया। इसके बाद चल पड़ी तो कहीं नहीं रुकी। शाम छह बजे के बाद अलुवा आ गया। हालांकि बस कोच्चि तक जाती है, पर हमें तो अलुवा में ही उतर जाना था। अलविदा मुन्नार। फिर मिलेंगे। ढेर सारी मीठी यादों के लिए शुक्रिया। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य
(MUNNAR RETURN, KRTC, AC BUS, KOTHAMANGLAM, ALUVA )